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प्रवासी पक्षियों पर भी पड़ रहा है जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

गांधीनगरः प्रवासी पक्षियों को भी जलवायु परिवर्तन की वजह से भिन्न आचरण करते

देखा जा रहा है। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण

इंसान ही नहीं दूसरे जीव-जंतुओं पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है और पक्षियों तथा अन्य

प्रवासी जीवों के प्रवास के तौर-तरीके बदल रहे हैं। प्रवासी जीवों पर संयुक्त राष्ट्र के

सम्मेलन (सीएमएस) की कार्यकारी सचिव एमी फ्रेंकिल ने बताया कि जलवायु परिवर्तन

प्रवासी जीवों के पारंपरिक आवास क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है जिससे वे स्थान अब उनके

रहने लायक नहीं रह गये हैं। वे अपने मूल स्वरूप से इतने बदल चुके हैं कि प्रवासी जीव

अब अपने लिए नये ठिकाने ढूंढने लगे हैं। सीएमस के सदस्य देशों की 13वीं बैठक के लिए

यहां आयीं श्रीमती फ्रेंकल ने इस बारे अपनी राय जाहिर की।

मानव विकास ही इसके रास्ते में सबसे बड़ा बाधक

परिवर्तन प्रवासी जीवों की आवाजाही को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने अपने प्रवास का

तरीका बदल दिया है – वे गंतव्य से पहले गंतव्य से आगे जाकर भी रुक सकते हैं। इससे

पूर्व में उनकी सुरक्षा के लिए किये गये बहुत सारे काम अर्थहीन रह गये हैं। हम एक इस

क्षेत्र की रक्षा करते हैं और फिर अचानक उनका प्रवास स्थल बदल जाता है। फिर हम पाते

हैं कि यह नया क्षेत्र उनके लिए सुरक्षित नहीं है। बैठक के दौरान जारी एक रिपोर्ट में यह

बात सामने आई है कि भारत में भी मौसम के बदलाव के साथ प्रवासी जीवों ने अपना

गंतव्य बदला है। प्रवासी जीवों द्वारा बदलते मौसम तथा जलवायु परिवर्तन के अनुरूप

खुद को ढालने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर श्रीमती फ्रेंकेल ने कहा कि सभी पक्षी

एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं जाते हैं। उनके प्रवास में काफी विविधता है।

प्रवासी पक्षियों ने सैकड़ों वर्षों में स्वयं को इसके लिए ढाला है

प्रजातियों और उनके प्रवासन के स्वरूप के हिसाब से वे अलग-अलग तरीकों से खुद को

ढाल रहे हैं। वे अब ज्यादा तेजी से अपना गंतव्य बदल रहे हैं। जैविक परिवर्तन और उदभव

में समय लगता है। इन प्रजातियों ने एक निश्चित वातावरण में रहने के लिए सैकड़ों वर्षों

में स्वयं को ढाला है। वे कैसे प्रवास पर जाते हैं और लौटते हैं, उनके प्रजनन और भोजन के

तरीके वर्षों के उदभव के दौरान विकसित हुये हैं। सीएमएस प्रमुख ने कहा,‘‘जलवायु

परिवर्तन तेजी से हो रहा है। इसलिए, सवाल यह है कि क्या प्रवासी जीव भी उसी तेजी से

खुद को ढाल सकते हैं। कई प्रजातियों के लिए इसका जवाब ना में है।’’ उन्होंने कहा कि

प्रवासी प्रजातियों के लिए सबसे बड़ा खतरा निवास प्रवास स्थल का नष्ट होना है

उनके प्राकृतिक आवास और रास्ते भी बाधित हो चुके हैं

प्राकृतिक क्षेत्रों को कृषि क्षेत्र में बदलना, चारागाह में बदलना और तटीय रेखा का

होना। भूमि उपयोग और जलक्षेत्र के उपयोग में बदलाव सीएनएस के लिए एक और चिंता

का विषय है। मिस फ्रेंकेल ने कहा कि इस सदस्य देशों की इस 13वीं बैठक से उन्हें काफी

उम्मीद है। बहुत सारे दृढ फैसले होने हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रजातियों को

सीएमएस की संरक्षण सूची में जोड़ने और विभिन्न प्रजातियों के लिए प्रस्तावित अधिक

ठोस कार्यों को अपनाने के बारे में ज्यादातर चीजें बिना किसी बाधा के होंगी। वन्य और

समुद्री जीवन की सुरक्षा के प्रति भारत के प्रयास की प्रशंसा करते हुए, उन्होंने कहा,‘‘मैं इस

तथ्य से प्रभावित हूं कि प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) कुछ प्रजातियों के बारे में जुनून के साथ

बात कर रहे थे। जाहिर है, वह एक लिखा हुआ वक्तव्य नहीं पढ़ रहे थे। मैंने देखा कि वे

दिल से बोल रहे थे। मैंने सुना है कि वह ‘वाइल्ड वर्सेस मैन’ से भी जुड़े थे। भारत में जीव

संरक्षण की दिशा में बहुत प्रभावशाली काम हो रहा है।’’

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