छोटे घोंघे लाखों साल से पृथ्वी पर हैं

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  • डीएनए अनुसंधान के विकास में सामने आया नया राज

  • इसका शोध प्रारंभ होने की कहानी भी रोचक

  • जांचा तो पता चला कि यह प्राचीन प्राणी है

  • अब कौन किसका रिश्तेदार है इसका विश्लेषण जारी

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः छोटे घोंघे कई लाख वर्षों से इस पृथ्वी पर रहते आये हैं।

डीएनए अनुसंधान के विकास में हर रोज नई नई जानकारी सामने आ रही है।

इसी से पता चल रहा है पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति का क्रमिक विकास का असली राज छोटे आकार के घोंघों में छिपा हो सकता है।

एक कोष वाले इन प्राणियों को जीव विज्ञान में प्रथम जीवन की श्रेणी में रखा जा सकता है।

पूर्व वैज्ञानिक अनुमान के मुताबिक इस पृथ्वी पर जीवन की प्रथम उत्पत्ति शैवाल

यानी एमिबा के तौर पर हुई थी।

अब वैज्ञानिक इसकी अगली कड़ी को जोड़ने की दिशा में शोध कर रहे हैं।

इन छोटे घोघों की तरफ वैज्ञानिकों का ध्यान जाने की कहानी भी बड़ी रोचक है।

एक जीव विज्ञानी ने मिसिसिपी राज्य विश्वविद्यालय में

कुछ और तलाशने के क्रम में पास के सीमेंट की दरारों के बीच चम्मच से खुरचा था।

इसी क्रम में कुछ छोटे घोंघे नजर आये थे।

सामान्य रूचि के तहत इन्हें प्रयोगशाला में जाकर जब इनके डीएनए का अध्ययन किया गया।

तब जाकर यह नई जानकारी सामने आयी।

डीएनए परीक्षण से यह साबित हुआ कि इस श्रेणी के घोंघे इस पृथ्वी पर लाखों वर्ष से सकुशल रहते आ रहे हैं।

इसी वजह से अब वैज्ञानिक जीवों की उत्पत्ति और क्रमिक विकास के लिए

इनके डीएनए का बेहतर तरीके से अध्ययन करने में जुट गये हैं।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस एक कोष वाले जीव के डीएनए के सघन विश्लेषण से इससे क्रमिक विकास के तौर पर आगे बढ़े जीवन की कड़ियों का पता लगाया जा सकता है।

किस जीव में इस घोंघे के डीएनए मौजूद हैं, उसके जरिए यह समझा जा सकेगा कि वह प्राणी किन किन स्तरों से गुजरते हुए घोँघे के आकार से अपने वर्तमान स्वरुप तक पहुंचा है ।

छोटे घोंघे की शोध दूसरे अंदाज में प्रारंभ हुई थी

एक कड़े खोल के अंदर रहने वाले इन प्राणियों के अध्ययन से पृथ्वी पर हुए जैविक बदलाव के अनेक तथ्यों का भी पता लगाया जा सकता है।

एमिवा से विकसित पेड़-पौधों की परिकल्पना तो सहज है लेकिन एक कोष के

चलंत जीव से कौन कौन से जीव बने हैं,

इसे जानना वैज्ञानिकों के अलावा आम जनों के लिए भी बिल्कुल नया और रोचक विषय होगा।

जैसे जैसे डीएनए अनुसंधान आगे बढ़ रहा है, वैसे वैसे इनकी मदद से किस जीव का संबंध किस प्राचीन जीव से रहा है, इसका खुलासा भी होता चला जा रहा है।

अब विकसित विधि में किसी भी जीव के अंदर मौजूद हर किस्म की प्रोटिन का पता लगाना संभव हो चुका है।

इसलिए अलग अलग नमूनों में मौजूद समानता का विश्लेषण भी आसान होता चला जा रहा है।

वैज्ञानिक इतना मानते हैं कि इस पृथ्वी पर जीवन करोड़ों वर्षों से मौजूद रहा है।

यह जीवन किस कालखंड में किस स्वरुप में रहा है और कैसे कैसे उसमें बदलाव हुए हैं, इससे जानना ज्यादा जरूरी है।

ताकि क्रमिक विकास की इस कहानी की सारी कड़ियों को क्रमबद्ध तरीके से जोड़ा जा सके।

इनमें से अनेक प्राणी अब इस दुनिया में नहीं हैं, वे पूरी तरह गायब हो चुके हैं।

लेकिन उनके फॉसिलों की मदद से भी डीएनए अनुसंधान का काम जारी है।

कैसे अचानक गायब हो गये डायनासोर देखें वीडियो

इस क्रम में अत्यंत विशाल प्राणी डायनासोर भी हैं, जो एक उल्कापिंड के पृथ्वी पर गिरने से अचानक ही पूरी तरह समाप्त हो गये।

हाल ही में एक दांत के डीएनए विश्लेषण से पता चला है कि

वह डेनिसोवान मानव का दांत है, जो पृथ्वी पर करीब एक लाख दस हजार वर्ष पूर्व रहा करते थे।

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