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बारूदी सुरंग सूंघने वाला चूहा अंततः सम्मान के साथ दफनाया




नोमपेहः बारूदी सुरंग सूंघने की अद्भुत क्षमता इस चूहे में थी। अपने इसी गुण की बदौलत उसने अपने सेवाकाल में एक सौ से अधिक बारूदी सुरंग और विस्फोटकों का पता लगाते हुए अनेक लोगों की जान बचायी थी। अब उसकी मौत हो गयी। मौत के बाद उसे देश के हीरो की तरह दफनाया गया है।




देश के प्रति उसकी भूमिका को सम्मान देते हुए यह कार्रवाई की गयी है। आठ साल की उम्र में उसकी मौत हुई है जबकि वह पिछले साल ही सक्रिय सेवा से रिटायर कर दिया गया था। कंबोडिया में कार्यरत एक गैर लाभकारी संगठन एपीओपीओ ने इसकी मौत की जानकारी दी है।

बताया गया है कि पिछले सप्ताह तक वह पूरी तरह ठीक था। अचानक ही उसने खाना छोड़ दिया और उसके बाद उसकी मौत हो गयी। बता दें कि कंबोडिया में गृहयुद्ध की स्थिति के दौरान एक दूसरे को मारने के लिए अनेक इलाकों में ऐसे बारूदी सुरंग लगा दिये गये थे।

इन इलाको में बारूदी सुरंग होने के बाद भी वे कहां पर लगे हुए हैं, उसकी कोई सूचना नहीं है। इसी वजह से बिना जानकारी के ऐसे इलाको में जाने वालों की जान अचानक होने वाले विस्फोट में चली जाती थी। यह स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी।




बारूदी सुरंग सूंघकर सैकड़ों जाने बचायी थी

जब जाकर इस चूहे को खास तौर पर बारूदी सुरंग सूंघने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। वैसे उसमें आम चूहों के अलावा भिन्न गुण होने की वजह से ही वह जल्द ही इसमें पारंगत हो गया। उसके बाद से उसे लगातार वैसे इलाको में ले जाया गया, जहां ऐसे लापता बारूदी सुरंग होने का खतरा महसूस किया गया।

मैदान में छोड़ देने के बाद वह धीरे धीरे चलते हुए अपने सूंघने क शक्ति से जमीन के नीचे दबे बारूदी सुरंग का पता लगा लेते था। उसके संकेत पर इलाके से बारूदी सुरंग को सावधानी के साथ खोदकर निकालने के बाद उन्हें निष्क्रिय कर दिया जाता था।

वैसे कंबोडिया में अनुमान के मुताबिक करीब एक हजार वर्ग किलोमीटर का इलाका अब भी है, जहां अनजान स्थानों पर बारूदी सुरंगों का जाल बिछा हुआ है। बारूदी सुरंग सूंघ लेने वाले इस चूहे का नाम मागावा रखा गया था। जिसने देश के बड़ी सेवा की और लोगों को इस किस्म के विस्फोटों से मरने से बचाया। इसी वजह से वर्ष 2020 में उसे एक गोल्ड मेडल देकर भी सम्मानित किया गया था।



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