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मैक्सिकन वेब शब्द की उत्पत्ति ही इस प्राकृतिक आचरण से हुई




  • पानी में लहर पैदा कर पक्षियों से बचती है मछलियां
  • गंधक युक्त पानी में रहती है सल्फर मौलिज
  • अपने शिकार को तब देख नहीं पाती है पक्षी
  • ऐसा आचरणप्रकृति से ही सीखा है मछलियों ने

तियापाः मैक्सिकन वेब शब्द खास तौर पर फुटबॉल के मैदान का एक प्रचलित शब्द और आचरण है। किसी भी वक्त पूरे स्टेडियम में दर्शकों को अपने स्थान पर खड़े होकर यह लहर पैदा करते अनेकों बार देखा जाता है। लेकिन इस शब्द की उत्पत्ति दरअसल मछलियों के आचरण से जुड़ी हुई है।




देखें यह मछलियां कैसे लहर पैदा कर खुद को बचाती हैं

मैक्सिको के गंधक वाले झरनों के पास बने जलागारों में रहने वाली सल्फर मौलिज नामक प्रजाति की मछलियां इस लहर को पैदा करती हैं। आपस में उनका यह आचरण उन्हें शिकारी पक्षियों से बचाता है जो आस पास ही पेड़ की डालियों पर बैठकर मछलियों का बीच बीच में शिकार करते रहते हैं। वैज्ञानिकों ने बड़ी बारिकी से इस आचरण का अध्ययन किया है। मछलियों पर झपट्टा मारने आ रहा पक्षी अचानक से ऐसी लहर देखकर वापस भाग जाता है। इस लहर के असर को भी जांचा गया है।

मैक्सिकन वेब देखकर शिकारी डर जाता है

आसमान से नीचे की तरफ आता पक्षी अचानक उठने वाली लहर को देखकर न सिर्फ चौंक जाता है बल्कि डर भी जाता है। दूसरी तरफ इसी मैक्सिन वेब की वजह से वह पानी के अंदर मछली को देख भी नहीं पाता और उसे खाली हाथ लौटना पड़ता है। ऐसा आचरण सारी मछलियां मिलकर करती हैं, जिससे पानी के भीतर अचानक यह मैक्सिकन वेब पैदा होती है। इस

इलाके में सल्फर मौलिज नामक प्रजाति का शिकार मुख्य तौर पर किंगफिशर और किसकाडेज नामक पक्षी किया करते हैं। गंधक वाले झरनों के पास रहने वाली इन मछलियों ने प्रकृति से ही इसे सीखा है। इसी आचरण को खेल पसंद अमेरिका के इंसानों ने फुटबॉल स्टेडियमों तक पहुंचा दिया है।




फर्क सिर्फ इतना है कि मछलियां जब मैक्सिकन वेब पैदा करती हैं तो वे एक स्थान से दूसरे स्थान तक तैरती हैं जबकि इंसान स्टेडियम के भीतर एक ही स्थान पर रहते हुए सिर्फ अपने स्थान पर एक के बाद एक कतार में खड़े होकर यह लहर पैदा कर मनोरंजन करता है।

लेबिंज इंस्टिट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर इकोलॉजी एंड इनलैंड फिशरीज के जीव विज्ञानी डेविड बियरबाच ने अपने सहयोगियों के साथ इसका अध्ययन किया है। गंधक वाले इस जल में सारी मछलियां नहीं रह पाती हैं। इसलिए खास तौर पर वहां बहुतायत में रहने वाली सल्फर मौलिज ही पक्षियों के निशाने पर होते हैं।

प्रकृति से ही मछलियों ने सीखा है यह गुण

गंधक युक्त यह जल सभी मछलियों के जीवित रहने के लिए ठीक नहीं है। वैज्ञानिकों ने देखा है कि ऊपर किसी पक्षी के हमलावर स्थिति में नजर आते ही सारी मछलियां एक ही दिशा में तैरती हुई एक लहर पैदा कर देती हैं। इस लहर की वजह से हमलावर को खाली हाथ वापस लौट जाना पड़ता है।

पेड़ की डालियों पर बैठी पक्षी कई बार असतर्क मछली के अकेले होने पर उसका शिकार कर लेती है। अनुमान है कि पास की मछली को इस तरह नीचे छलांग लगाते देख पास की मछलियां एक जैसा आचरण कर पानी के ऊपर लहर पैदा कर पक्षियों को भ्रमित कर देती है। लहर उठने की वजह से वे अपने शिकार को देख नहीं पाते हैं और लौट जाते हैं।



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