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डीआरडीए स्थित अपने कक्ष में टिड्डी दल से बचाव एवं रोकथाम के लिए बैठक

  • कीटनाशक के भंडारण तथा रसायनों की उपलब्धि सुनिश्चित करें: सुनील

  • जिले में टिड्डी दल से निपटने के लिए जिला स्तरीय कमिटी बनाई गई

  • जिले में किसानों की खेतों को बचाया जाएगा टिड्डियों के आक्रमण से

संवाददाता

गोड्डा: डीआरडीए स्थित अपने कक्ष में उपविकास आयुक्त सुनील कुमार की अध्यक्षता

में टिड्डी दल से बचाव एवं रोकथाम के लिए बैठक आयोजित की गई । बैठक में महोदय

के द्वारा बताया गया कि जिले में फसलों को बर्बाद होने से बचाने हेतु टिड्डियों पर नजर

रखी जाए ताकि किसानों के फसल को बखूबी बचाया जा सके ।टिड्डी दल की समिति के

द्वारा फसलों पर निगरानी रखी जाए बीच-बीच में ध्वनि यंत्र अथवा कीटनाशक छिड़काव

के जरिए भी फसलों को बचाया जा सकता है । फसल बचाने को लेकर किसानों को निऱंतर

जागरूक किया जाए, जनसेवक , किसान ,व कृषक मित्र को जागरूक करते हुए उप

विकास आयुक्त गोड्डा श्री सुनील कुमार के द्वारा कृषि पदाधिकारी गोड्डा को आवश्यक

दिशा निर्देश दिए गए। जिला कृषि पदाधिकारी गोड्डा के द्वारा बताया गया कि जिले की

फसलों को बर्बाद करने के लिए टिड्डियों का झुंड आता है और फसल को नष्ट कर देते है।

ये दिन भर घूमते हैं लेकिन रात को आराम करने के लिए फसल पर बैठ जाते हैं रात भर में

पूरी फसल बर्बाद कर देते हैं इसलिए कहीं भी टिड्डियों का झुंड दिखाई देता है तो कृषि

विभाग या प्रशासन को इसकी सूचना अवश्य दिया जाए इससे बचाव के लिए फसल के

पास ध्वनि यंत्र का प्रयोग किया जा सकता है यह भी देखा गया है कि फसल को चट करने

के बाद वह जमीन पर अपना अंडा छोड़ देते हैं अंडे से 10 से 12 दिन में फिर से टिड्डी उड़ने

लगते हैं। जिले में टिड्डी दल के हमले की आशंका को देखते हुए उप विकास आयुक्त

गोड्डा श्री सुनील कुमार के द्वारा बताया गया कि जिले में टिड्डियों के आक्रमण से

निपटने के लिए महत्वपूर्ण है कि किसानों को इसके बचाव हेतु जागरूक किया जाए।

डीआरडीए सभागार में टिड्डी के खतरों को विस्तार से बताया गया

कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखंड सरकार (कृषि प्रभाग) के आदेश के

आलोक में डीआरडीए की इसी बैठक में जिले में टिड्डी नियंत्रण हेतु महोदय के समक्ष

जिला स्तरीय टिड्डी नियंत्रण कार्यदल का गठन किया गया । टीम के संयोजक जिला

कृषि पदाधिकारी को बनाया गया है। इस कार्यदल में बतौर सदस्य वन प्रमंडल

पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला उद्यान पदाधिकारी, जिलास्तरीय अग्नि

शमन विभाग के पदाधिकारी, तथा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक को बतौर सदस्य

शामिल किया गया है। उप विकास आयुक्त ने कीटनाशकों के भंडारण पर ध्यान देने को

कहा। डीआरडीए की इस बैठक में महोदय ने पर्याप्त मात्रा में कीटनाशक के भंडारण तथा

इन रसायनों की उपलब्धि सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने टिड्डियों के

नियंत्रण में उपयोगी हाईस्पीड/ लोवॉल्यूम स्प्रेयर, पावर स्प्रेयर, गटोर स्प्रेयर, नैप सैक

स्प्रेयर, वाहन पर प्रतिष्ठापित किए जाने वाले स्प्रेयर आदि की उपलब्धता की जानकारी

ली। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को इन स्प्रेयर के विक्रेताओं एवं किसानों से संपर्क कर

समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया ताकि आवश्यकता पड़ने पर इनकी मदद ली जा

सके। और कीटनाशक दवाइयों का इस्तेमाल कर सकते हैं। महोदय के द्वारा बताया गया

कि पिकअप वैन/छोटे ट्रक/ट्रैक्टर की सूची तथा व्यवस्था करने का निदेश दिया। जिसमें

सिंटेक्स ट्रैंक, प्लास्टिक टैंक, ड्रम आदि को रखकर उससे एक स्थान से दूसरे स्थान तक

ले जाकर कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव किया जा सके।उन्होंने कहा कि फसलों में यदि

टिड्डियों को प्रकोप बढ़ गया तो कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करके भी इनकों मारा

जा सकता है। टिड्डी प्रबंधन हेतु फसलों पर नीम के बीजों का पाउडर बनाकर 40 ग्राम

पाउडर प्रति लीटर पानी में घोल कर उसका छिड़काव किया जाय तो दो-तीन सप्ताह तक

फसल सुरक्षित रहती है। बैठक में खेतों में टिड्डी दल के हमले को रोकने हेतु उपाय पर भी

चर्चा की गई।


 

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