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एजेंसी चयन के संबंध में सरकार के फैसले के खिलाफ महापौर आशा लकड़ा

संवाददाता

रांचीः एजेंसी चयन के संबंध में रांची की महापौर श्रीमती आशा लकड़ा ने विरोध दर्ज करा

दिया है। उन्होंने लिखा है कि सूडा के द्वारा नियम विरूद्ध निविदा आमंत्रित करने व

आमंत्रित निविदा पर गलत तरीके से एजेंसी चयन करने के संबंध में मा0 मुख्यमंत्री,

मुख्य सचिव, नगर विकास विभाग के सचिव व सूडा निदेशक,झारखण्ड सरकार को पत्र

लिखकर कहा है कि नगर विकास विभाग के निर्देश पर सूडा के माध्यम से झारखंड

नगरपालिका अधिनियम 2011 व झारखंड म्युनिस्पिल अकाउंट मैनुअल पार्ट-ए में

उल्लेखित प्रावधानों को दरकिनार कर दिनांक 06 जुलाई 2020 को रांची नगर निगम क्षेत्र

में कर वसूली कार्य के लिए इच्छुक एजेंसियों से आवेदन के लिए निविदा आमंत्रित किया

गया था। आमंत्रित निविदा के तहत गलत तरीके से श्री पब्लिकेशन एंड स्टेशनरी प्राइवेट

लिमिटेड नामक एजेंसी का चयन किया गया है। इस संबंध में निविदा में भाग लेने वाले

एजेंसियों के माध्यम से रांची नगर निगम को पत्र लिखकर जानकारी दी गई है। पत्र में यह

भी जानकारी उपलब्ध करायी गई है कि त्थ्च् के किस कंडिका में प्रावधान के तहत क्या

मांग किया गया है और चयनित एजेंसी ने क्या दस्तावेज जमा किया है। इन सभी बिंदुओं

पर गौर करने से यह प्रतीत होता है कि राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के माध्यम

से एजेंसी के चयन में विसंगतियां बरती गई हैं। जिसकी जानकारी निविदा में भाग लेने

वाले एजेंसियों के द्वारा भी विभागयी सचिव को 25 जुलाई को पत्र लिखकर दिए जाने की

बात कही गई है। परन्तु सचिव के द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं किया गया। इन सभी

मामले पर राज्य सरकार गंभीरता पूर्वक विचार करें और चयनित एजेंसी द्वारा त्थ्च् के

प्रावधानों के तहत जमा किए दस्तावेजों की जांच करायी जाए।

एजेंसी चयन के दस्तावेजों की जांच हो

दस्तावेज के पेज-11 के 1.8 व पेज-12 के 2 समेत अन्य प्रावधानों के तहत चयनित एजेंसी

श्री पब्लिकेशन एंड स्टेशनरी प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा दिए गए दस्तावेजों की जांच कर

काली सुचि में डालने को कही है। साथ चयनित एजेंसी श्री पब्लिकेशन एंड स्टेशनरी

प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा की गई गड़बड़ीयों एवं विसंगतियों को प्रेषित की है। अब सवाल

यह है कि जब चयनित एजेंसी तकनीकी रूप से कर वसूली कार्य में सक्षम नहीं है तो उसे

एल वन कैसे किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि चयनित एजेंसी के पास राजस्व

संग्रह करने करने की क्षमता नहीं है। नगर विकास विभाग के सचिव का यह बयान कि

कमीशन की दर में कमी आने से रांची नगर निगम को आगामी तीन वर्षों में 4.5 करोड़ का

मुनाफा होगा, यह समझ से परे है। सिर्फ कमीशन की दर में कमी का हवाला देकर एजेंसी

का चयन किया जाना उचित नहीं है। जब चयनित एजेंसी तकनीकी रूप से समृद्ध नहीं है

तो ऐसे एजेंसी से वित्तीय मामलों में भारी नुकसान होने की संभावना है।


 

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