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नरसंहार के प्रत्यक्ष प्रमाण मिलने के बाद अब सच से मुंह मोड़ रही सरकार




सीेएनएन की विशेष रिपोर्ट में हुआ है इसका खुलासा
तिगारे से संयुक्त राष्ट्र राहत दल को निकालेगा इथोपिया
भीषण संकट और जबर्दस्त सूखा झेल रहे हैं इस इलाके के लोग

नैरोबीः नरसंहार के प्रत्यक्ष प्रमाण मिलने के बाद इथोपिया की सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के राहत दल को निकालने का फरमान जारी किया है।




तिगारे के इलाके में सरकार विरोधी हथियारबंद समूह का बोलबाला होने की वजह से भी इथोपिया की सरकार का प्रभाव वहां नहीं के बराबर है।

इस इलाके में भीषण भूखमरी की स्थिति के बीच अब तक किसी तरह संयुक्त राष्ट्र का राहत दल लोगों को किसी तरह भोजन उपलब्ध करा रहा था।

अब संयुक्त राष्ट्र के राहत दल के वहां नहीं होने की वजह से वहां के लोगों को भोजन कैसे उपलब्ध होगा, यह पड़ोसी देशों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।

इस बीच सीएनएन ने अपनी तरफ से इस बात का खुलासा कर दिया है कि देश के उत्तरी हिस्से में और पड़ोसी देश सूडान की सीमा के भीतर भी इथोपिया की सेना द्वारा अनेक लोगों को मारा गया है।

देखें सीएनएन का वीडियो का खास हिस्सा

सामूहिक नरसंहार के प्रमाण मिलने के बाद इथोपिया की सरकार सवालों के घेरे में आ गयी है। दूसरी तरफ इथोपिया की सरकार यह आरोप लगा रही है कि संयुक्त राष्ट्र के वरीय अधिकारी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं।




सरकार ने इन अधिकारियों को अगले 72 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है। इथोपिया की सरकार का यह आदेश उस वक्त आया है जबकि तिगारे के इलाके में करीब चार लाख लोग भूखमरी की कगार पर है।

वहां जबर्दस्त सूखा भी पड़ा हुआ है। वहां के हिंसक माहौल की वजह से पिछले जुलाई माह से अब तक सिर्फ 606 ट्रक राहत का वितरण किया जा सका है।

नरसंहार के प्रत्यक्ष प्रमाण के बाद ही सरकार नाराज

तिगारे और आस पास के इलाके की कुल आबादी करीब 5.2 मिलियन है। वहां के बारे में संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि फिलहाल लोगों को जिंदा रहने लायक भोजन उपलब्ध कराने के लिए भी प्रतिदिन एक सौ ट्रक रसद की आपूर्ति जरूरी है।

ऐसी स्थिति में सारे राहत अभियानों को रोकने का इथोपिया सरकार का यह फैसला नई परेशानी पैदा कर सकता है।

पड़ोसी देश मानते हैं कि इससे अन्य देशों में फिर से शरणार्थियों की बाढ़ आयेगी। यह सारे देश पहले से ही अपने नागरिकों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।

दूसरी तरफ इथोपिया की सरकार का आरोप है कि राहत का लाभ दरअसल विद्रोहियों को मिल रहा है। उन्हें रोकने के लिए वहां हर किस्म का राहत अभियान बंद करने की आवश्यकता है।



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