मंगल यान ने भेजी मंगल ग्रह की झील की नई तस्वीर

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झील में बर्फ की ऊंचाई 1.8 किलोमीटर

गर्मी का भी कोई असर नहीं पड़ता

इतनी ठंड की हवा भी जम जाती है

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः मंगल यान ने अपने काम के तहत वहां की परिस्थितियों का आंकड़ा और चित्र भेजना प्रारंभ कर दिया है। इसके तहत वहां मौजूद एक विशाल झील का पता चला है, जिसमें बर्फ जमा हुआ है। अनुमान के मुताबिक यह झील करीब 81 किलोमीटर के व्यास में फैली हुई है। ग्रह के उत्तरी छोर पर इस झील को यान ने देखा है और उसकी तस्वीर भेजी है।

मालूम हो कि मंगल ग्रह पर काफी पहले से ही पानी होने की उम्मीद जतायी जा रही थी। इस यान की खोज के मुताबिक वहां बर्फ मिलने की अब पुष्टि हो गयी है। इस वजह से अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर वहां पानी है भी तो वह सतह के गहरे अंदर में हो सकता है। ऊपर की स्थिति के आधार पर वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि अंदर का पानी भी बर्फ की शक्ल में ही हो सकता है।

जिस इलाके में बर्फ की यह झील दिखी है, उसे मंगल ग्रह का कोरोलोव क्रेटर कहा जाता है। इस गहरे खड्ड नूमा एक इलाका है। इसी के बीच में यह बर्फ की झील नजर आयी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस ग्रह पर भी पृथ्वी के जैसा ही मौसम का बदलाव होता है। गरमी के मौसम में यहां का बर्फ पानी बन जाता है।

मंगल यान के मुताबिक यह ग्रह का सबसे ठंडा इलाका है

लेकिन इस झील का पता चलने के बाद इस बात की पुष्टि हुई है कि दरअसल यह एक अत्यंत ठंडा इलाका है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक यहां जो बर्फ का विशाल खंड नजर आ रहा है वह 60 किलोमीटर चौड़ा और करीब 1.8 किलोमीटर ऊंचा है। इस झील की गहराई भी कमसे कम दो किलोमीटर है। इस आकार के आधार पर ऐसा माना जा रहा है कि यहां करीब 22 सौ घनमीटर बर्फ मौजूद है।

वैज्ञानिकों का यह भी अनुमान है कि इस ठंडे इलाके से जब हवा गुजरती है तो वह भी ठंड में जम जाती है और बर्फ के ऊपर एक पर्त की तरह बिछ जाती है। निरंतर इस प्रक्रिया के जारी रहने की वजह से इस इलाके पर गरमी के मौसम का कोई असर भी नहीं पड़ता है।

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