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जीवन होने के कई निशान अब भी मौजूद हैं वहां के वायुमंडल में




  • मंगल ग्रह पर जीवन के अवशेष उसकी गहराई में

  • कंप्यूटर मॉडल के विश्लेषण से पता चला है

  • सूर्य के महाविस्फोट से बहुत कुछ बदला

  • इस ग्रह की गहराई में मौजूद हैं साक्ष्य

राष्ट्रीय खबर

रांचीः जीवन होने के निशान मंगल ग्रह पर मौजूद हैं। भले ही अभी वहां जीवन नहीं हो

लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि वहां जीवन के लायक सारी परिस्थितियां कभी

मौजूद थीं। लेकिन वहां जीवन था अथवा नहीं यह अब तक वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित

नहीं हो पाया है। कंप्यूटर मॉडल पर वहां के तमाम आंकडों को डालने के बाद जब उनका

कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से विश्लेषण किया गया तो यही नतीजा सामने आया है। वहां

ग्रीन हाउस गैस, कार्बन डॉईऑक्साइड, के अलावा ताप और पानी पैदा करने लायक

परिस्थितियों के होने के संकेत मिले हैं। यदि प्राचीन काल में ऐसा रहा होगा तो वहां जीवन

के लायक सारी परिस्थितियां रही होंगी और हो सकता है तब मंगल ग्रह पर किसी न किसी

रुप में जीवन भी मौजूद रहा हो। लेकिन वर्तमान में अब तक के शोध में वहां जीवन होने

का कोई संकेत नहीं मिला है।

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इस पूरे शोध के बारे में एक शोध प्रबंध साइंस एडवांसेज नामक पत्रिका में प्रकाशित किया

गया है। इसमें विस्तार से वहां के वायुमंडल और धरातल पर हुए बदलावों को भी रेखांकित

किया गया है। इस शोध प्रबंध के मुख लेकर लुजेंद्र ओझा ने इस बारे में विस्तार से

जानकारी दी है। वह रूटजर्स विश्वविद्यालय (ब्रूनविक) में सहायक प्रोफसर हैं। उन्होंने

कहा कि अपने सहकर्मियों की मदद से इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इस ग्रह पर प्राचीन काल

में भूमिगत ताप की सारी परिस्थितियां मौजूद थीं। उनलोगों के अनुमान के मुताबिक यह

सारा कुछ आज से करीब चार बिलियन वर्ष पूर्व की घटना है। उस दौरान सूर्य का ताप भी

अभी के मुकाबले काफी कम था। शायद इसी वजह से मंगल ग्रह के छोरों पर गर्मी कम

होने की वजह से बर्फ थी। शेष इलाकों में गरमी और नमी भी मौजूद थी।

जीवन होने का यह समय 4 बिलियन वर्ष पुराना हो सकता है

उस ग्रह के शोध में जुटे अंतरिक्ष यानों से मिले आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर

वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं। यह शोध जिस समय का उल्लेख कर रहा है, उसे सौर

जगत के कालखंड में नोआचीन काल कहा जाता है। यह काल 4.1 बिलियन वर्ष से लेकर

3.7 बिलियन वर्ष तक चला था। इस दौरान वहां की जमीन के गर्भ में क्या कुछ था, उसमें

वैज्ञानिक झांकने की कोशिश कर रहे हैं।

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खोज में नई उपलब्धियां नासा के लैंडर के वहां उतरने की वजह से मिली हैं। नवंबर 2018

में यह लैंडर वहां उतरा था। तब से यह यान निरंतर खोज करते हुए अपने आंकड़े नियंत्रण

कक्ष को भेज रहा है। वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि मंगल ग्रह पर जीवन के संकेत

कई मील की गहराई में मौजूद हो सकता है। इसे समझने के लिए वैज्ञानिकों ने एक

संभावित मैप भी तैयार किया है, जिसमें मंगल ग्रह की आंतरिक संरचना को दर्शाया गया

है। दरअसल बर्फ जमने की वजह से यह आंतरिक संरचना नीचे दबती चली गयी है। इसी

वजह से ऐसा माना जा रहा है कि जीवन के सारे सबूत वहां गहराइयों में दबे पड़े हैं। वैसे

अगर वहां वाकई जीवन के संकेत दबे पड़े हैं तो पहले का पूरा यह सौरमंडल पहले शायद

किसी दूसरी संरचना वाला था, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।

सूर्य में एक महाविस्फोट भी हुआ था

वैज्ञानिक शोध में पहले ही इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि इस सौरमंडल में सूर्य में एक

महाविस्फोट जैसी परिस्थिति बनी थी। उसी महाविस्फोट का असर पूरे सौर मंडल में फैल

गया था। इस वजह से सौर मंडल में बहुत कुछ बदलाव भी हुए हैं। अब नये शोध में मंगल

ग्रह में पर्याप्त मात्रा में पानी होने की जानकारी सामने आयी है। पानी की वजह से ही वहां

जीवन के लायक परिस्थितियां बनी होंगी। वैसे सूर्य के विकिरण की वजह से हमारे पूरे

सौरमंडल में बहुत कुछ बदलाव हुए थे। कई किस्म की रेडियोएक्टिविटी की वजह से भी

बहुत कुछ बदला था। वैसे इस नये शोध की वजह से ऐसा माना जा रहा है कि शायद अति

प्राचीन काल में इस पूरे सौरमंडल की संरचना और यहां मौजूद ग्रह और उपग्रहों की

परिस्थितियां भी भिन्न रही होंगी। इस पर अभी और आंकड़ों के विश्लेषण का काम जारी

है, जिसके आधार पर आगे के निष्कर्ष निकाले जाएंगे।

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