fbpx Press "Enter" to skip to content

लॉक डाउन में अनेक काम किये गये हैं पर सरकारी राहत अभियान उम्मीदों पर फेल

लॉक डाउन में सरकारी स्तर पर अनेक काम किये गये हैं। इस बात से कोई इंकार भी नहीं

कर सकता कि अगर सरकारी स्तर पर ऐसे इंतजाम नहीं किये गये होते तो हजारों की

संख्या में लोग भूखे मर चुके होते। इन गरीब और असहाय लोगों की मदद के लिए

विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा भोजन का इंतजाम करना एक बहुत बड़ा सहारा साबित

हुआ है। लेकिन इसके बाद भी अब जनजीवन के पटरी पर लौटने के बीच जो समीक्षा हो

रही है, उसका स्पष्ट निष्कर्ष है कि सरकार को अपनी कार्यशैली और सोच में आमूलचूल

परिवर्तन करने की जरूरत है। वरना इस देश में कोरोना संकट के और जारी रहने के दौरान

देश और बड़ी मुसीबत में पड़ सकता है। लॉकडाउन के कड़े प्रावधानों के दौरान सरकार

जिस माध्यम के जरिये गरीबों तक राहत पहुंचाना चाहती थी वह अपेक्षाओं पर खरा नहीं

उतरा। 26 मार्च को सरकार ने कहा था कि जन धन बैंक खाता धारक महिलाओं को तीन

महीने तक हर माह 500 रुपये की राशि दी जाएगी। यह राशि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण

पैकेज का हिस्सा थी और आशा की जा रही थी कि कोविड-19 महामारी का प्रसार रोकने के

लिए लगाए गए लॉकडाउन से ठप पड़ी अर्थव्यवस्था ने वंचित वर्ग के सामने जो दिक्कतें

पैदा की हैं, उन्हें इससे कुछ राहत मिलेगी। बहरहाल 20 मई तक इस राशि की दो किस्तें

जारी होने के बाद भी आधी से भी कम खाताधारक महिलाओं ने यह राशि खाते से 

निकाली। सरकार को इसकी जानकारी तब लगी जब ऐसे 20 करोड़ खातों पर नजर डाली

गई। यह बात चिंतित करने वाली है।

लॉक डाउन में जनधन खाता की निकासी भी संकेत है

इससे यह बात उजागर होती है कि देश की कल्याण व्यवस्था में कमियां हैं जिन्हें जल्द

से जल्द दूर किए जाने की आवश्यकता है। परंतु इससे यह भी स्पष्ट होता है कि बहुचर्चित

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण व्यवस्था शायद अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी। खासकर संकट के

समय वह कारगर नहीं रही। महामारी जैसी आपातकालीन स्थिति में कम समय में

जरूरतमंदों तक पहुंचने का यह तरीका संतोषजनक साबित नहीं हुआ। यह स्पष्ट नहीं है

कि आखिर उक्त खातों का इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ। शायद लोग लॉक डाउन में कड़े

प्रावधान के बीच एटीएम नहीं जा पाए होंगे या शायद पैसा उन लोगों के पास नहीं पहुंचा

जिनको उसकी वाकई अत्यधिक आवश्यकता थी। यह स्पष्ट है कि भारत को आम

परिवारों का बेहतर खाका रखने और उन्हें समझने की आवश्यकता है। ऐसी कल्याण

योजना जो सूचना के अभाव में काम करती है वहां उसे जुड़े लोगों को कभी समुचित तरीके

से नहीं समझा जा सकता। ऐसा नहीं है कि कल्याण व्यवस्था केवल ग्रामीण गरीबों को

देख पाने में नाकाम रही बल्कि शहरी गरीब और आंतरिक प्रवासी भी इसे लेकर बेहद

संवेदनशील हैं क्योंकि उन तक पहुंच के पर्याप्त साधन नहीं हैं। इससे यह स्पष्ट होता है

कि कल्याण योजनाओं पर व्यय बढ़ाने के कई सुविचारित सुझाव भी शायद वास्तव में

मददगार न साबित हों। केवल पैसे डाल देने से समस्या हल नहीं होती है बल्कि उसे

जरूरतमंदों तक पहुंचना भी चाहिए। प्राथमिकताओं में संतुलन कायम करना अहम है।

हम प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की संभावनाओं को शून्य नहीं कर सकते। परंतु यह भी स्पष्ट है

कि मौजूदा हालात जैसे वक्त में राशन और पके खाने जैसी चीजें ज्यादा मददगार हैं। ऐसे

में इस तरह की राहत मुहैया कराने वाली योजनाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना

चाहिए।

जनता को दिये गये लाभ पर नजर भी रखना चाहिए था

यह भी आवश्यक है कि लाभ की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने और उसका

हस्तांतरण संभव बनाने की कोशिश होनी चाहिए। उदाहरण के लिए एक देश, एक राशन

कार्ड की योजना यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है कि प्रवासी श्रमिक अपना

राशन दूर देश में बैठे अपने परिवार के साथ साझा कर सकें। यह सही है कि सरकार ने

महामारी के दौरान योजना से जुड़ी दिक्कतों को उजागर किया था। उदाहरण के लिए

राशन की दुकानों में ऐसी प्वाइंट ऑफ सेल मशीनें ज्यादा नहीं हैं जो चालू हालत में भी हों।

बहरहाल इन समस्याओं को हल किया जा सकता है। सबसे महत्त्वपूर्ण है यह समझना

कि कल्याण योजनाओं के लाभार्थी कौन हैं। ग्रामीण भूमिहीन, महिलाएं, शहरी गरीब और

प्रवासी आदि वंचित वर्गों को उनकी जगह और आंकड़ों के साथ कल्याण योजनाओं में

शामिल करना होगा। साथ ही जो आर्थिक पैकेज लागू करने का एलान किया जा चुका है,

उसका प्रत्यक्ष लाभ आम जनता तक पहुंचे इस बात पर सभी सरकारों को अपना ध्यान

केंद्रित रखना होगा। वरना पहले की तरह ढीलाई दिये जाने की स्थिति में कमाई से वंचित

वर्ग के लिए जो संकट खड़ा होगा वह देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने वाला

साबित हो सकता है। जो कारोबार के बिना किसी तरह परिवार का पेट पाल रहे थे, उनके

पास नकदी की घोर कमी है। इस कमी को दूर करने का त्वरित तरीका यही हो सकता है

कि आर्थिक पैकेज का सीधा लाभ लाक डाउन में जैसे गरीबों तक पहुंचा है, वैसे ही छोटे

कारोबारियों तक यह लाभ पहुंचे।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from रांचीMore posts in रांची »

One Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!