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कोरोना कालखंड में अनेक अनजान लोगों ने रच डाला इतिहास

  • रोजगार छूटा काम नहीं, ऐसे में गरीबों का फरिश्ता बना अविनाश

  • कोरोना कालखंड के नये नायक के तौर पर उभरे कई लोग 

दीपक नौरंगी

भागलपुरः कोरोना कालखंड में हमें अनेक ऐसे लोग मिले, जो अपने पुरुषार्थ से अलग

पहचान बनाने में कामयाब हो गये। पूरे देश की बात करें तो सबसे अधिक चर्चा फिल्म

अभिनेता सोनू सूद की हो रही है। लेकिन देश के हर कोने में लोग इसी तरह अपने अपने

सीमित साधनों में यही काम करते आ रहे हैं। 

भागलपुर के कई गांवो में लगातार चल रहा है अभियान

जहां अविनाश अपनी टीम के साथ शंकरपुर, मोहली और मैय पंचायत के अंतर्गत आने

वाले कई गांवों से आये तकरीबन 200 परिवारों के बीच 7-10 दिन का कच्चा राशन

उपलब्ध करवाया। तौफिर गांव और शंकरपुर में अविनाश ने उस वक्त राहत समाग्री का

वितरण किया जब वाकई लोगों को उसकी जरूरत थी। लॉकडाउन के दौरान ही जब मय-

पंचायत के तौफिर गांव में आग लगी तो गरीबों के कई घर जल कर राख हो गये थे, और

दुर्भाग्यवश सारे पीड़ित परिवार सड़कों पर दाने-दाने को मोहताज हो गये थे। जब खबर

मिली तो गरीबों का यह फरिश्ता वहां भी मौजूद था। उनकी टीम ने शंकरपुर पंचायत के

सरस्वती टोला और पासवान टोला के तकरीबन 55 परिवारों को 7-10 दिन का कच्चा

राशन उपलब्ध करवाया। कुछ ऐसी ही आग निरपुर पंचायत के लाल जी टोला में आग लग

गई। जब तक कि अग्नि शमन विभाग की दमकल गाड़ियां पहुंचती। तब तक 31 घर आग

में राख हो चुके थे। घटना की खबर मिलते ही अविनाश अपने साथियों सुबह-सुबह घटना

स्थल पर पहुंचें। अविनाश बताते हैं कि बड़ा ही हृदयविदारक दृश्य था। एक तो कोरोना

महामारी का कहर और उस पर ये भाग्य का क्रूर मजाक। मैंनें 31 परिवारों के तकरीबन

200 सदस्यों के लिए तत्काल 10 ,10 किलो का खाने-पीने का तत्काल राशन मुहैया

करवाया । बरियारपुर प्रखंड के सीतारामपुर-नजीरा, गांधीपुर, प्रेम टोला, महादलित टोला

एवं घोरघट क्षेत्र में तकरीबन 200 जरूरतमंद परिवारों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का

अनुपालन करते हुये अविनाश और उनकी टीम ने कच्चा राशन वितरित किया। प्रवासी

मजदूरों की वापसी के लिए 10 बसों का इंतजाम हो या गरीबों को राशन पहुंचाने का काम

वे लगातार डटे हुये हैं।

कोरोना कालखंड में मजदूरो के लिए डटे हैं अविनाश

इससे पहले बिहार के मजदूरों के राज्य वापसी के लिए सरकार द्वारा माकूल व्यवस्था

करने की मांग को लेकर अविनाश अपनी साथियों के साथ अनशन पर भी बैठ चुके हैं।

लॉकडाउन में मजदूरों और गरीबों की खाने-पीने की परेशानी को कम करने और इस

मिशन को और मजबूती प्रदान करने के लिए बरियारपुर में काम कर रही सहयोगी संस्था

सद्भावना बिहारसे सामंजस्य स्थापित कर बाजार (हटिया) क्षेत्र में प्रत्येक जरूरतमंदों

चावल एवं दाल उपलब्ध करवाया । अविनाश कहते हैं कि लॉकडाउन के दौरान हमारे

मानव मूल्य की परीक्षा की घड़ी है, ऐसे में हम सबका कर्तव्य है कि लापरवाही बिल्कुल न

बरतें, सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करें और करवायें अपने आस-पास जरूर

ख्याल रखें कि कोई इस विपदा में भूखा न सोने पाये। अविनाश इस बात का जिक्र करना

नहीं भूलते कि बिहार की मौजूदा सरकार और केंद्र की मोदी सरकार ने गरीबों के लिए

कागजी मदद की होगी लेकिन धरातल पर गरीबों को आज भी काफी परेशानियों का

सामना करना पड़ रहा है।


 

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