Press "Enter" to skip to content

दक्षिण अफ्रीका से अनेक लोग पूरी दुनिया के विभिन्न इलाकों में गये हैं




कोरोना का नया वायरस चिंतित होने लायक है

सबसे अधिक आबादी वाले इलाके में पाया गया

इस नये स्वरुप का नाम अब ओमाइक्रॉन रखा गया

अपने में तीस से अधिक बदलाव कर चुका है यह वायरस

राष्ट्रीय खबर

रांचीः दक्षिण अफ्रीका में कोरोना वायरस का नया वेरियंट पाया गया है। वायरस के इस स्वरुप को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन चिंतित है। साथ ही चिकित्सा विज्ञानी इसकी गंभीरता को भांप चुके हैं। यह साफ कर दिया है कि पहले के मुकाबले यह वायरस और अधिक पेचिदा है और कई किस्म के बदलावों की वजह से इसे वैक्सिन भी शायद नहीं रोक पायेगा।




यानी समझा जा रहा है अपनी प्रकृति के मुताबिक वायरस अपने आंतरिक ढांचा में कई बदलाव कर चुका है। दुनिया के लिए यह चिंता का विषय इसलिए भी है कि दक्षिण अफ्रीका में इस वायरस की पहचान होने के पहले वहां से अनेक लोग दुनिया के दूसरे देशों में गये हैं।

अब ऐसे लोगों में से कितने लोग अपने साथ यह वायरस ले गये हैं, यह पता नहीं है। अगर ऐसे किसी व्यक्ति के साथ उसकी जानकारी के बिना ही यह वायरस दूसरे देश में पहुंचा है तो वहां भी चुपके चुपके यह वायरस अपना प्रभाव दिखा रहा होगा, जिसके बारे में बाद में जानकारी मिलेगी।

इसी वजह से वैज्ञानिक दक्षिण अफ्रीका से आने वालों से अतिरिक्त सावधान रहने तथा लोगों से नहीं मिलने की सलाह दे चुके हैं। वहां से लोगों के बेल्जियम, बोत्सवाना, हांगकांग और इजरायल जाने की आधिकारिक जानकारी है।

अब तक जानकारी के मुताबिक वायरस का यह नया स्वरुप दक्षिण अफ्रीका के गाउटेंग इलाके में पाया गया है। यह देश की सबसे अधिक आबादी वाला इलाका है। वैसे इस वायरस से पीड़ित रोगियों की पहचान कर लेने के बाद सबसे पहले कौन इससे पीड़ित हुआ, उसकी पहचान हासिल करने के प्रयास जारी हैं।

दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री ने दी है जानकारी

दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री जो फाला ने कहा है कि पिछले कुछ दिनों से इस नये स्वरुप वाले कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। दक्षिण अफ्रीका में पहले हर सप्ताह दो सौ रोगी पाये जा रहे थे लेकिन अब यह अचानक ऊपर उठकर गुरुवार के दिन 2465 पहुंच गया है।

इससे समझा जा सकता है कि यह संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है जबकि इसकी पहचान होने के पूर्व अनेक लोग यहां से दुनिया के अन्य देशों में भी गये हैं। हो सकता है कि वायरस का यह नया वेरियंट उनके साथ दूसरे देशों तक भी पहुंच गया है। अचानक से देश में कोरोना रोगियों की संख्या बढ़ने की वजह से ही वैज्ञानिकों ने इस वायरस की नये सिरे से जांच की है। इसी नई जांच में यह पता चला है कि दरअसल यह वायरस अपना स्वरुप बदल चुका है और यह संरचना के तौर पर अधिक पेचिदा हो गया है।

इस नये स्वरुप से वैसे लोगों को फिर से संक्रमण होने का खतरा है, जो वैक्सिन के दोनों डोज भी ले चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस नये वायरस स्वरुप का नाम ओमाइक्रॉन रखा है। यह दरअसल ग्रीक भाषा का एक अक्षर भी है। अब दो दिनों के भीतर दक्षिण अफ्रीका के अन्य इलाकों से भी इस नये वेरियंट के रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है।




जो देश के साथ साथ पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय इसलिए बन गया है क्योंकि अनेक लोग दक्षिण अफ्रीका से अन्य देशों में गये हैं। कई सरकारों ने इस नये वेरियंट का पता चलते ही अपने नागरिकों के दक्षिण अफ्रीका जाने पर रोक लगा दी है।

वैज्ञानिकों ने इसका नाम ग्रीक शब्द पर रखा है

वैज्ञानिक अनुसंधान में यह पाया गया है कि नया ओमाइक्रॉन वायरस अपने मूल स्वरुप में तीस से अधिक बदलाव कर चुका है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के जेनेटिक वैज्ञानिक शैरोन पीकॉक कहते हैं कि अब तक जो आंकड़े उपलब्ध हुए हैं उसके मुताबिक यह पहले के मुकाबले अधिक संक्रामक है

और हो सकता है कि इसमें हुए शेष बदलावों के बारे में अब तक पूरी जानकारी नहीं मिल पायी हो। यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के वायरस विशेषज्ञ लॉरेंस यंग कहते हैं कि यह अब तक का सबसे पेचिका कोरोना वायरस है, जो पहले कभी नहीं देखा गया था। अमेरिकी विशेषज्ञ डॉ एंथोनी फॉसी कहते हैं कि अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका की सरकार से सीधा संपर्क बना रखा है।

इससे यह पता चलता है कि वहां से कोई भी ऐसा व्यक्ति इनदिनों अमेरिका नहीं आया है। लेकिन दुनिया के अन्य देशों में गये वहां के लोग किन लोगों के संपर्क में आये हैं और उनमें से कौन कौन अमेरिका आया है, यह जांचना अभी शेष है।

अब शोधकर्ता यह परखने की कोशिश कर रहे हैं कि कोरोना वैक्सिन का इस नये कोरोना वेरियंट पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। प्रारंभिक जांच में इसकी संरचना की वजह से इसे अधिक संक्रामक माना जा चुका है।

 

 



More from HomeMore posts in Home »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from दक्षिण अफ्रीकाMore posts in दक्षिण अफ्रीका »

4 Comments

Leave a Reply

%d bloggers like this: