fbpx Press "Enter" to skip to content

पीएम के एलान के बाद रास्तों पर पसरने लगा है सन्नाटा

  • प्रधानमंत्री ने कही थी जनता कर्फ्यू लगाने की बात

  • इसके तौर तरीकों को लेकर तरह तरह की शंकाएं

  • यात्रीवाही वाहनों में घट गयी है लोगों की भीड़

  • दुकानों से सामान जुटाने में जुटे हैं आम लोग

अमित कुमार वर्मा

रांची : पीएम के एलान के बाद अब भी जनता के बीच प्रस्तावित जनता कर्फ्यू को लेकर

तरह तरह की शंकाएं हैं। अजीब बात यह है कि अब लोग सारा कुछ स्पष्ट होने के बाद भी

अपने घरों में राशन एकत्रित करने के जुगाड़ में लग गये हैं। इस वजह से सड़कों पर

अपेक्षाकृत सन्नाटा पसरा होने के बाद भी दुकानों पर क्रेताओं की भीड़ बढ़ी है। हालांकि यह

भीड़ खाने पीने और दैनंदिन जरूरत की सामानों पर ही अधिक नजर आ रही है। स्थिति

ऐसी हो गई है कि कुछ भी कार्य करने के पहले लोग दस बार सोचने को मजबूर हो जा रहे

है और कोशिश करने से भी परे हो जा रहे है। हालांकि बात मुनाफे या नुकसान का नहीं है,

बल्कि इन बातों की है कि घर से बाहर निकलने या कहीं बेवजह आवाजाही करने से कोई

कोरोना के प्रकोप में ना आ जाएं। बात करें रांची की तो गुरुवार की शाम को पीएम के एलान

लाइव सुनकर लोग ज्यादा ही सकते में आ गए हैं कि कहीं यह कर्फ्यू एक दिन से ज्यादा

या अनिश्चितकालीन ना बन जाए। हालांकि पीएम के एलान में सिर्फ सतर्कता बरतने के साथ सिर्फ

रविवार को जनता कर्फ्यू लगाने की बात की है जो शायद एक प्रक्रिया के रूप में अपनाया

जा रहा है, जिससे कोरोना बीमारी जो चेन सिसटम से आगे बढ़ रही है, उस पर रोक लगे।

पीएम के एलान में सब कुछ है साफ फिर भी

पीएम ने राशन संबंधी बातों पर भी चर्चा करते हुए कहा था कि लोगों को राशन, दूध, फल

इत्यादि बाजारों में उपलब्ध रहेंगे, जिस पर कोई रोक नहीं लगेगी। पर रांची के अधिकतर

दुकानों में यह देखने को मिल रहा है कि लोगों की भीड़ सिर्फ राशन खरीदने को अचानक से

बढ़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि लगातार बढ़ती भीड़ के कारण नाश्ता, खाना तक के

लिए वक्त नहीं मिल पा रहा है। हालांकि भीड़ को देखकर दुकानदारों में उत्साह भी साफ

झलक रहा है। क्योंकि शहर के मॉल आदि पर रोक लगने के कारण नए ग्राहकों का भी

आगमन हो रहा है। वहीं रांची के सड़कों पर दिन में ऐसा सन्नाटा देखने को मिल रहा है

जैसा कोई कर्फ्यू का माहौल हो। कहीं आने-जाने में भी लोगों को रास्तों पर ऑटो का

इंतजार नहीं करना पड़ रहा, क्योंकि सारे आटो लगभग खाली ही चल रहे हैं या अपने स्टैंड

पर खड़े ग्राहकों का इंतजार करते रह जा रहे हैं। वहीं कहीं न कहीं लोग आटो या बसों से भी

सफर करने में कतरा रहे हैं कि कहीं इन पर कोई पीड़ित तो सफर नहीं कर रहा या किया

होगा। अब सभी की निगाहें रविवार को लगने वाली जनता कर्फ्यू पर टिकी है कि क्या कुछ

उपचार या कोरोना पर नियंत्रण हो पाता है, इस एक दिवसीय कर्फ्यू से।

टूट रहा लोगों का आपसी विश्वास

अपने दिलों में लोग कोरोना को लेकर ऐसा डर बैठा रखे है कि आपसी दोस्ती, रिश्तेदारी

सभी से लोग परे होना स्वीकार कर रहे है और एक दुसरे से जितना ज्यादा से ज्यादा दुरी

बना रहे है। साथ खाना से लेकर घूमना फिरना सब परे हो गया है लोगों के जीवन में


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from बयानMore posts in बयान »
More from राज काजMore posts in राज काज »
More from साइबरMore posts in साइबर »
More from स्वास्थ्यMore posts in स्वास्थ्य »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!