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बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी मेरी जिंदगी में हुजूर आप आये

बहुत शुक्रिया जनाव की आपने अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए कुछ तो काम आसान कर दिया।

यहां वी ब्लडी इंडियन तो जब तक लात नहीं पड़ती कुछ समझना भी नहीं चाहते।

कमसे कम सिर्फ बात से ही अमेरिका को लात का एहसास हो गया, यह कोई कम बात है क्या।

वरना वह तो पहले से ही पाकिस्तान की पीठ के पीछे से वार करने से नहीं चूकता था।

यह तो तालिबान वाली चाल उल्टी पड़ गयी तो असलियत उसे भी समझ में आ गयी।

अब और कोई नहीं तो कमसे कम डोनाल्ड ट्रंप को यह नहीं कह सकते कि भारत ने उनका साथ नहीं दिया है।

हाउडी मोदी में साफ साफ भारतवंशियों को संदेश भी दिया जा चुका है कि क्या कुछ करना है वहां के अगले राष्ट्रपति चुनाव में।

लेकिन परेशानी यही खत्म हो नहीं होती।

मैडम ने तो आते ही प्याज की शिकायत कर दी

बांग्लादेश से प्रधानमंत्री शेख हसीना यहां आयीं।

उन्हें भी बहुत शुक्रिया कहते उसके पहले ही मैडम ने प्याज की शिकायत कर दी।

खुलेआम कहा कि प्याज की इतनी अधिक किल्लत है कि वे बिना प्याज के खाना खा रही हैं।

अब पाकिस्तान के साथ तनाव है तो वहां से प्याज आ नहीं रहा है।

देश की मंडियों में प्याज की कमी का पता चलते ही आढ़ती माल दबाकर बैठ गये हैं।

लगता है अब नोटबंदी की तरह पुराने प्याज को भी एक महीने में खत्म करने जैसा कोई आर्डर जारी करना पड़ेगा।

बहुत शुक्रिया कहने के साथ प्याज की भी नोटबंदी करें क्या

इसी बात पर फिर से एक पुरानी फिल्म का गीत याद आने लगा है।

वर्ष 1962 में एक फिल्म बनी थी। नाम था एक मुसाफिर एक हसीना।

उस दौर की रोमांटिक फिल्मों में यह हिट फिल्म थी।

इस गीत को लिखा था राजा मेंहदी अली खान ने और उसे सुरों में ढाला था ओपी नैय्यर ने।

इस गीत को स्वर दिया था मोहम्मद रफी और आशा भोंसले ने। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी इस गीत को यहां सुन भी सकते हैं

https://gaana.com/lyrics/bahut-shukriya-badi-meherbani

मेरी जिंदगी मे हुजूर आप आए
कदम चूम लूँ या, के आँखे बिछा दूं
करूँ क्या ये मेरी, समझ मे ना आए

बहुत शुक्रिया
करूँ पेश तुम को, नज़राना दिल का
नज़राना दिल का
करूँ पेश तुम को, नज़राना दिल का
नज़राना दिल का
के बन जाए कोई अफ़साना दिल का
खुदा जाने ऐसी सुहानी घड़ी फिर
खुदा जाने ऐसी सुहानी घड़ी फिर
मेरी जिंदगी मे पलट के ना आए

बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी
मेरी जिंदगी मे हुजूर आप आए
बहुत शुक्रिया
खुशी तो बहुत है मगर ये भी गम है
मगर ये भी गम है
के ये साथ अपना कदम दो कदम है
मगर ये मुसाफिर दुआ माँगता है
मगर ये मुसाफिर दुआ माँगता है
खुदा आपसे फिर किसी दिन मिलाए
बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी
मेरी जिंदगी मे हुजूर आप आए

बहुत शुक्रिया

मुझे डर है मुझ मे, गुरूर आना जाए
लागू झूमने मे, सुरूर आ ना जाए
सुरूर आ ना जाए
कही दिल ना मेरा, ये तारीफ सुन कर
कही दिल ना मेरा, ये तारीफ सुन कर
तुम्हारे बने और मुझे भूल जाए

बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी
मेरी जिंदगी मे हुजूर आप आए
कदम चूम लूँ या, के आँखे बिछा दूं
करूँ क्या ये मेरी, समझ मे ना आए

बहुत शुक्रिया

अब अमेरिका और बांग्लादेश की बात समाप्त कर अपने खास पड़ोसी पाकिस्तान को देख लेना चाहिए।

बेचारे इमरान खान इनदिनों अच्छी तरह समझ रहे हैं कि राजनीति का मैदान क्रिकेट की पिच के माफिक नहीं होता।

यहां सामान्य गेंद भी अचानक बाउंसर बन जाती है।

इमरान खान समझ नहीं पा रहे कि गेंद फेंके या बल्लेबाजी करें

लिहाजा बेचारे अपने क्रिकेट के अनुभव से समझ भी नहीं पा रहे हैं कि क्या करें।

झल्लाकर कह दिया कि परमाणु बम भी है हमारे पास।

वहां की पब्लिक भी इतनी नाशुक्र है कि इसी बात पर अब इमरान खान को कोसने में भिड़ गये।

हालात बिगड़ते देख फिर से वहां के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी सैन्य शासन की संभावनाओं पर विचार करने लगे हैं।

कुल मिलाकर वहां की स्थिति भी खिचड़ीपरोस जैसी बन चुकी है।

अपने झारखंड में सब कुछ तो ठीक ठाक है लेकिन इ बंदूकधारी नक्सली सब जब तब गड़बड़ कर देता है।

बेचारे अफसरान कितना कुछ हांक रहे थे।

नक्सली को खतम कर दिया, अंतिम सांस गिन रहा है।

अब सीधे राजधानी के पास में हमला कर सारे दावों को झूठा साबित कर दिया।

नक्सली उन्मूलन का दावा करने वालों के पास इसकी सफाई में नया कुछ कहने को नहीं है।

अब तो यहां भी चुनाव आने जा रहा है।

पता नहीं नक्सली गतिविधियों का इस इलेक्शन पर क्या कुछ नक्सली असर पड़ेगा।

लेकिन जाहिर है कि नक्सली अगर हावी हुए तो 81 में से कितने लोगों की किस्मत का फैसला नक्सली करेंगे, यह तय करना जरूरी हो गया है।

उन्हें भी नक्सलियों के पास जाने बहुत शुक्रिया तो कहना ही पड़ेगा ताकि मेहरबानी बनी रहे।

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