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सीएए पर अमित शाह के बहस की चुनौती को कई लोगों ने स्वीकारा

नईदिल्लीः सीएए पर अमित शाह ने विपक्षी नेताओं को बहस की

चुनौती दी थी। विपक्ष के कई नेताओं ने इस चुनौती को स्वीकार करने

का औपचारिक एलान कर दिया है। भाजपा नेता और देश के गृह मंत्री

अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में एक रैली को संबोधित करते हुए विरोधी

दलों पर यह आरोप लगाया था कि वे ही इस मुद्दे पर जनता को भड़का

रहे हैं और दंगा फैला रहे हैं। इसी क्रम में श्री शाह बोल गये थे कि ऐसे

नेता इसी मुद्दे पर पांच मिनट भी बहस कर लें तो बड़ी बात होगी।

अमित शाह द्वारा सीएए पर इस चुनौती को सबसे पहले समाजवादी

पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने

स्वीकार कर लिया। उन्होंने पलटवार करते हुए बयान दिया है कि

भाजपा संविधान का माखौल उड़ा रही है क्योंकि उसे लगता है कि

संसद में पूर्ण बहुमत होने की वजह से वह मनमाने फैसले ले सकती है।

बहस करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह भाजपा को तय करना है

कि वह किस स्थान पर और कब इस बहस में उतरना चाहती है।

अखिलेश ने यह भी कहा कि अगर भाजपा चाहे तो वह अपनी पसंद के

चैनल पर भी यह बहस करा सकती है। सूचना मिलने वह इस बहस में

भाग लेने हाजिर हो जाएंगे।

सीएए पर अखिलेश के अलावा मायावती का बयान

इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने भी सीएए पर

अमित शाह की इस चुनौती स्वीकार करने की बात कही है। सुश्री

मायावती ने कहा कि दरअसल भाजपा को यह भय सता रहा है कि देश

भर में युवा और महिलाएं इसके खिलाफ सामने आ रही हैं। इसलिए

भाजपा के सारे लोग इसे दूसरी दिशा में मोड़ने की साजिशों में जुटे हुए

हैं ताकि जनता जिस तरीके से गोलबंद हो रही है, उसे हर कीमत पर

रोका जा सके। जदयू के बागी नेता प्रशांत किशोर ने भी सीएए के मुद्दे

पर अमित शाह की चुनौती को स्वीकार करने की बात कही है। उन्होंने

ट्विट किया कि जनता के विरोध से अंदर ही अंदर डरे हुए लोग अब

पिछले दरवाजे से अपना फैसला लागू कराने की साजिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जनता जिस तरीके से सड़कों पर उतर रही है, उससे

सरकार को डरना और सबक लेना चाहिए। वरना इस किस्म की

बहुमत से सरकार बनाने का कोई मतलब नहीं रह जाता है।

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