लोकसभा चुनाव के साथ साथ विधानसभा का कांटा भी फंसा

आसन्न लोकसभा चुनाव के साथ साथ विधानसभा का कांटा भी फंसा
Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  • महागंठबंधन नहीं भाजपा में भी लगे हैं कई पेंच

  • कई सीटों पर पहले से ही कायम है जिच

  • रांची और हटिया में फंस गया है पेंच

  • कई दल बदलु भी करेंगे फेरबदल

संवाददाता

रांचीः लोकसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा एक बड़ा पेंच बन चुका है।

ऊपर से नजर आते समीकरणों के अलावा भी पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही है।

प्रस्तावित महागंठबंधन में कांग्रेस और झामुमो के बीच की पेंच सिर्फ लोकसभा की नहीं है

बल्कि इसमें विधानसभा की सीटों का बंटवारा बड़ा मुद्दा है।

यद्यपि यह स्पष्ट है कि झारखंड में सक्रिय किसी भी दल के पास

सभी चौदह लोकसभा सीटों पर अपने बलबूते पर चुनाव जीतने की क्षमता रखने वाले प्रत्याशियों की कमी है।

इसके बाद भी इतना लगभग तय है कि भाजपा सभी 14 सीटों पर अपने उम्मीद्वार खड़े करेगी।

इनमें से कुछ को बदला भी जा सकता है क्योंकि चुनावी सर्वेक्षण में उनके दोबारा जीतने की संभावना नहीं के बराबर है।

यह सर्वेक्षण भाजपा ने खुद कराया है।

तीन चरणों के सर्वेक्षण में फिलवक्त सिर्फ दो सांसद ही दोबारा चुनाव जीतने की स्थिति में नजर आ रहे हैं।

लेकिन सहयोगी दलों के बीच विधानसभा की  सीटों का बंटवारा नहीं होने की स्थिति में

इन दो सीटों पर भी लड़ाई विकट हो सकती है।

इन दोनों ही सीटों पर जदयू का अपना निजी जनाधार होने का दावा है।

इसके अलावा भी कुछ सीटों पर जदयू के जातिगत समीकरण यथावत कायम हैं।

दूसरी तरफ महागंठबंधन के खेमा में असली पेंच कांग्रेस और झामुमो के बीच होने के बाद भी इसका समाधान अकेले लालू प्रसाद के पास है।

इस वजह से बात आगे बढ़ नहीं पा रही है।

लोकसभा के साथ साथ विधानसभा सीट का भी टंटा

सूत्रों की मानें तो हेमंत चाहते हैं कि लोकसभा सीटों के तालमेल के साथ ही विधानसभा की सीटों का फैसला भी हो जाए

ताकि बाद में किसी किस्म की मतभेद की गुंजाइश न रहे।

यह प्रस्ताव कांग्रेस के गले में कांटे जैसा फंसा हुआ है।

आम तौर पर किसी भी सीट पर दावेदारी के लिए पिछले चुनाव में नंबर दो पर होने की एक स्थापित परंपरा है।

इसी वजह से कांग्रेस को अत्यंत बुरा प्रदर्शन करने वाली कुछ सीटों पर से हाथ धोना पड़ सकता है।

यही चिंता कांग्रेस के नेताओं को परेशान कर रही है।

इनमें से रांची सीट सबसे प्रमुख हैं, जहां झामुमो की महुआ माजी ने पिछले चुनाव में दूसरा स्थान प्राप्त किया था।

कांग्रेस का मानना है कि इस बार के कार्यकाल के दौरान वर्तमान विधायक सीपी सिंह की लोकप्रियता में काफी कमी आयी है।

रांची औऱ हटिया विधानसभा सीट सबकी परेशानी

इसलिए इस सीट जीत की संभावना प्रवल है लेकिन तय है कि पिछले चुनाव परिणाम की वजह से झामुमो इस सीट पर से अपनी दावेदारी नहीं छोड़ेगा।

इसी तरह हटिया सीट किसके खाते में जाएगी, यह बड़ा सवाल दोनों खेमों में खड़ा है।

वर्तमान विधायक नवीन जयसवाल झाविमो की टिकट पर चुनाव जीते थे।

इसलिए झाविमो की फिर से इस सीट पर दावेदारी रहेगी।

दूसरी तरफ कांग्रेस और झामुमो ने भी इस विधानसभा पर काफी काम किया है।

इससे ठीक उलट भाजपा खेमा में भी इस बार का टिकट किसे मिलेगा, इस पर बड़ा सवाल है।

पिछले चुनाव में भाजपा ने सीमा शर्मा को यहां से टिकट दिया था। नवीन जयसवाल बाद में भाजपा में शामिल तो हो गये हैं।

लेकिन अगले चुनाव में भाजपा के पुराने गुट की दावेदार को नकारना पार्टी के लिए कोई आसान काम नहीं होगा।

इससे अलग कई स्थानों पर नेताओं के खेमा बदल की संभावना बनी हुई है।

लिहाजा मौका देखकर चौका लगाने की ताक में  बैठे नेताओं की वजह से सभी दलों को चुनावी रणनीति निर्धारित करने में परेशानी हो रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.