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मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष का पद से इस्तीफा, बीजेपी में शामिल होंगे 8 विधायक

मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष का पद से इस्तीफा, बीजेपी में शामिल होंगे 8 विधायक
  • उत्तर पूर्व में कांग्रेस को लगा सबसे बड़ा झटका

  • नागालैंड में अब विपक्ष रहित सरकार चलेगी

  • एनपीएफ का सरकार में शामिल होने का फैसला

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष का इस्तीफा और आठ विधायकों के भाजपा में शामिल

होने से कांग्रेस को पूर्वोत्तर में सबसे बड़ा झटका लगा है। एक के बाद एक पूर्वोत्तर के

राज्यों में कांग्रेस के हालात खराब होते जा रहे हैं। मेघालय, अरुणाचल, मिजोरम और

असम के बाद नागालैंड और मणिपुर में भी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। आज नागालैंड

के सभी विपक्षी विधायकों ने भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में शामिल होने का

फैसला किया है। राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के बाद अब नागालैंड और

मणिपुर में कांग्रेस संकट में आ गई है। मणिपुर में कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए पार्टी

प्रदेश अध्यक्ष गोविंददास कोंथोजम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। गोविंदास

कोंथोजम की गिनती राज्य के दिग्गज नेताओं में होती है। वह पूर्व मंत्री, निर्वाचन क्षेत्र से 6

बार विधायक और राज्य विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक भी हैं। उनका इस्तीफा

मणिपुर कांग्रेस के अंदर खतरे की आहट है। इतना ही नहीं पार्टी के 8 विधायक आज

भारतीय जनता पार्टी में भी शामिल होंगे। सूत्रों से हवाले से जानकारी दी है कि मणिपुर

प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के अध्यक्ष गोविंददास कोंथोजम ने अपने पद से

इस्तीफा दे दिया है। कम से कम 8 कांग्रेस विधायक आज बीजेपी में शामिल होंगे।

गौरतलब है कि पिछले साल उपमुख्यमंत्री समेत 9 विधायकों के समर्थन वापसी के बाद

बीजेपी सरकार संकट में आ गई थी। एन बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार से 17 जून

2020 को डिप्टी सीएम सहित 9 विधायकों ने समर्थन वापस ले लिया था। कांग्रेस के 8

विधायक मुख्यमंत्री द्वारा लाए गए विश्वास प्रस्ताव के खिलाफ पार्टी द्वारा व्हिप जारी

करने के बावजूद विधानसभा की कार्यवाही से दूर रहे।

मणिपुर कांग्रेस की इस हालत से यहां विपक्ष नदारत

सरकार को विधानसभा के पटल पर एनपीपी के 4 विधायकों सहित 28 सदस्यों का

समर्थन मिला हुआ था। वर्तमान में राज्य सरकार के पास एनपीपी और एनपीएफ के 4

विधायकों, लोजपा के इकलौते विधायक और तीन निर्दलीय सहित 36 विधायकों का

समर्थन है। कांग्रेस में और दलबदल की संभावना 2018 के ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ मामले

में भाजपा विधायकों को अयोग्य ठहराने की पार्टी की मांग के बीच आई है। 2017 के बाद

से 12 भाजपा विधायकों को संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था। नागालैंड

प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एनपीसीसी) द्वारा नागालैंड विधानसभा के सभी 60 विधायकों को

नगा समाधान का मार्ग प्रशस्त करने के लिए इस्तीफा देने के एक दिन बाद, विपक्षी नागा

पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) ने वर्तमान नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी पार्टी के नेतृत्व

वाली लोकतांत्रिक गठबंधन सरकार में शामिल होने का फैसला किया। राज्य के सभी 60

विधायकों ने 16 जून, 2021 को नागा राजनीतिक मुद्दे पर कोर कमेटी का गठन किया था,

जिसे कई लोगों ने सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के एक साथ आने के रूप में देखा था। रिपोर्टों

के अनुसार, एनपीएफ, जिसमें कुल 25 विधायक हैं, ने नेफ्यू रियो के नेतृत्व वाली पीडीए

सरकार में शामिल होने का फैसला किया हैं। जहां समिति ने भारत सरकार के साथ

बातचीत करने वाले सभी नागा राजनीतिक समूहों से अपने मतभेदों को दूर करने और

“एक समाधान और एक समझौते” के लिए एक आम दृष्टिकोण बनाने के लिए एक साथ

आने का आग्रह करते हुए एक पांच सूत्री प्रस्ताव अपनाया। एनडीपीपी ने कहा कि नगा

राजनीतिक मुद्दे पर समिति द्वारा पारित प्रस्ताव नागा मुद्दे के लिए एक निश्चित

समाधान लाने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रयासों और प्रतिबद्धता के बारे में स्पष्ट

रूप से बोलता है।

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