मनुष्य का निर्माण मूल रुप से तीन बातों से हुआ है

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  • एक शाम युवाओं के नाम कार्यक्रम आयोजित

  • मन की चंचलता” पर बोले पंडित मेहता

राँचीः मनुष्य तीन बातों से बने है, मन, शरीर और आत्मा।

हर मनुष्य की अपनी क्षमता है, जो अपनी क्षमता की परिधि पार करने की कोशिश करेगा, वो परेशान होगा ये क्षमता ही मनुष्य का मन है, जो निरंतर उसे परेशान करता है।

जब हम अपने मन को नियंत्रित करने में सफल होंगे तो हम शांति की ओर बढ़ेंगे।

हमारा मन तो बिलकुल पेंडुलम के जैसा है, जो निरंतर इधर उधर डोलता रहता है, आज लोगों की परेशिनायों का सबसे बड़ा कारण है।

मन की चंचलता को छोड़ना होगा

हमें इसी चंचल मन का विसर्जन करना है तभी हम शांति की ओर बढ़ेंगे।

उक्त बातें श्री हनुमान सेवा संस्थान के द्वारा आयोजित

”एक शाम युवाओं के नाम” में पंडित विजयशंकर मेहता ने कहा।

उन्होंने कहा कि आज हमारा मन केवल पुरानी बातों को याद करने और चिंता करने में अपना समय बेकार करता है।

श्री मेहता ने मन को एक अघोषित पागल कहते हुए बताया कि मन बिलकुल उस पागल के जैसा है, जो निरंतर अपने आचरण से लोगों को परेशान करता है।

मन को 6 रूपों में वर्गीकृत करते हुए उन्होंने कहा कि, हमारा मन एक संग्रहालय, पुस्तकालय, बैंक, बाजार, घर और मंदिर के जैसा है।

मन की अंतिम परिणति मंदिर के जैसा होना चाहिए,

जिसमें गर्भगृह में बैठे जीवंत प्रतिमा के सामने हम स्वयं को समर्पित कर दे।

श्री मेहता ने कहा कि, आज युवाओं के सामने कोई ऐसा आदर्श नहीं है, जो निर्विवाद हो।

आज हर किसी के साथ कोई न कोई संदेह जुड़ जा रहा है। ये राष्ट्र के लिए अहितकर है।

हमें युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ना है।

आज भारत के समक्ष राष्ट्रीयता के बोध के अभाव से बहुत नुकसान हो रहा है।

राष्ट्र के विकास के लिए अच्छी नीयत का होना जरूरी है।

अपने हरेक लफ्जों का खुद आईना हो जाऊँगा…दूसरों को छोटा कहके कैसे बड़ा हो जाऊँगा….वसीम बरेलवी की इन पंतियों को

आज के संदर्भ से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि आज हमसब ईष्र्या से ग्रसित है, हम दूसरों को छोटा दिखाकर खुद बड़ा नहीं बन सकते।

वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने जोर देते हुए कहा कि शिक्षा उपयोगी होनी चाहिए कागजी नहीं।

स्वामी विवेकानन्द कहते थे भारत की शिक्षा में धार्मिक श्रेष्ठता है।

मनुष्य की शिक्षा ऐसी हो जो मन को साफ कर दे

शिक्षा ऐसी होनी चाहिए कि वो मन को परिष्कृत कर दें।

हमें उपयोगी और सार्थक शिक्षा व्यवस्था का पक्षधर होना चाहिए।

आज की युवा पीढ़ी इन कागजी शिक्षा से मशीन बनते जा रहे है।

वो परिश्रम करते है, लेकिन दिशा नहीं है।

आज की युवावर्ग के लिए परिश्रम एक नशा बन चुका है।

हमें ऐसे नशा से शांति नहीं मिलनेवाला।

इससे हमेशा हमें अशांति ही मिलेगी।

श्री मेहता ने लोगों को योग से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि

हमारा मन जब शांत होगा तभी हम जीवन को एक उद्देश्यपरक बना पाएंगे।

उज्जैन में बन रहे शांतम के बारे में जानकारी देते हुए

उन्होंने लोगों से इससे जुड़ने की अपील भी की।

संस्थान के द्वारा कार्यक्रम की शुरूआत राष्ट्रीय युवा दिवस में स्वामी विवेकानन्द को

स्मरण करते हुए ”एक दौड़ राष्ट्र के नाम” का आयोजन किया गया।

जो सहजानंद चैक से शुरू होकर अरगोड़ा चौक पर समाप्त हुआ।

श्री हनुमान सेवा संस्थान के सदस्यों ने स्वच्छता अभियान चलाकर

लोगों को स्व्च्छ भारत अभियान से जुड़ने का संदेश दिया,

वहीं कार्यक्रम स्थल पर पौधरोपण कर अपने पर्यावरण को संरक्षित करने की अपील की गई।

पंडित मेहता जी का स्वागत राकेश भाष्कर ने किया

पंडित विजयशंकर मेहता जी का स्वागत करते हुए संस्थान के अध्यक्ष

राकेश भास्कर ने कहा कि, आज भारत विश्व का सबसे युवा देश है,

आज पूरा विश्व भारत की ओर टकटकी लगाए देख रहा है।

भारत की ऊर्जा यहाँ का अध्यात्म है, जिसका प्रतिनिधित्व स्वामी विवेकानन्द करते है।

भारत के युवाओं में असीम ऊर्जा का प्रसार हनुमान जी कर रहे है।

उक्त कार्यक्रम में प्रमोद सारस्वत, विमलेश सिंह, विधानसभाध्यक्ष दिनेश उरांव,

अभिषेक छाबड़ा, अरूण कुमार सिंह, धर्मेन्द्र तिवारी, विमलेश सिंह,

नगर विकास मंत्री सीपी सिंह, रामदेव पाण्डेय, इन्द्रजीत यादव

आदि ने पंडित विजयशंकर मेहता जी का मंच में स्वागत किया।

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