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बंगाल में ममता बनर्जी की किलेबंदी मजबूत सर्वेक्षण का यही निष्कर्ष




  • चुनाव पूर्व सर्वेक्षण का दूसरा विश्लेषण सामने आया

  • ग्रामीण इलाकों में ममता की लोकप्रियता कायम

  • असम का समीकरण अब बीपीएफ से बदल गया

  • केरल में फिर से वाम मोर्चा सरकार बनने के आसार

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः बंगाल में ममता बनर्जी को पछाड़ पाना शायद इस बार भी भारतीय जनता

पार्टी के लिए संभव नहीं होगा। शहरी इलाकों से अलग गांव देहात से जो कुछ संकेत मिल

रहे हैं, उसके मुताबिक ग्रामीण मतदाता ममता बनर्जी के पिछले पांच साल के कार्यकाल

को बेहतर मानते हैं। इसलिए भाजपा के जबर्दस्त प्रचार का प्रभाव शहरी और हिंदीभाषी

इलाकों में नजर आने के बाद भी ग्रामीण पश्चिम बंगाल की झूकान अब भी तृणमूल

कांग्रेस की नेत्री ममता बनर्जी की तरफ ही साफ साफ नजर आ रहा है। दूसरी तरफ असम

में भाजपा के लिए अच्छी बढ़त की स्थिति अब बदलती नजर आ रही है क्योंकि बोड़ोलैंड

पीपल्स फ्रंट ने राजग से रिश्ता तोड़कर कांग्रेस वाले महागठबंधन में शामिल होने का

एलान किया है। मतदान के कार्यक्रमों का एलान होते वक्त यह समीकरण ऐसा नहीं था।

बीपीएफ के इलाकों की सभी सीटों पर प्रत्याशी इसी संगठन के समर्थन से चुनाव जीतते

आये हैं। अब इस स्थानीय संगठन का समर्थन कांग्रेस वाले महागठबंधन की तरफ चले

जाने की वजह से उसका नुकसान सीधे तौर पर भाजपा को ही होना है।

बंगाल में ममता की पकड़ ग्रामीण इलाकों में कायम है

बंगाल में अभी जनता का जो मिजाज समझ में आ रहा है, उसके मुताबिक 294 सदस्यों

वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में बहुमत हासिल करने में ममता बनर्जी को अधिक

परेशानी शायद नहीं होगी। लेकिन इसके बीच भाजपा के दिग्गजों के मैदान में डटे होने का

मतदान पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखने लायक बात होगी। अगर चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में

मिल रहे संकेत सही साबित होते हैं तो सुश्री ममता बनर्जी लगातार तीन बार इस राज्य की

मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल करेंगी। वैसे इस लड़ाई में तीसरा कोना कांग्रेस और वाम

दलों के गठबंधन का भी है। इस तीसरी ताकत की सबसे अहम बात यह है कि इस

गठबंधन में शामिल दलों के पास अपने समर्पित कार्यकर्ताओं का एक स्थापित जनाधार

है। कुछ खास इलाकों में इस गठबंधन का जनसमर्थन भी अन्य दलों के मुकाबले अधिक

है।

इसी चुनाव पूर्व सर्वेक्षण का एक निष्कर्ष यह भी है कि तमाम किस्म के आरोप लगने के

बाद भी केरल में पिनरई विजयन की अगुवाई वाली एलडीएफ निश्चित तौर पर बंगाल में

ममता की तरह ही बढ़त की स्थिति में है। दूसरे नंबर पर फिर से कांग्रेस की यूडीएफ रहेगी

जबकि भाजपा का खाता यहां खुल सकता है। पुड्डूचेरी में भाजपा की फिर से जीत पर कोई

संशय नहीं है लेकिन इस बार कांग्रेस के खाते में फिर से 12 सीटें आ सकती हैं।

तमिलनाडू का सर्वेक्षण बंगाल में होने वाले चुनाव की तरह भाजपा के लिए फायदे का सौदा

नहीं होगी क्योंकि वहां एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके को इस बार बहुमत मिलने

के संकेत मिल रहे हैं। डीएमके को इस बार 150 से अधिक सीटों पर जीत हासिल हो सकती

है जो भाजपा के समर्थन वाली एआईडीएमके के लिए पराजय की स्थिति है।



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