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विपक्ष के नये समीकरणों को गढ़ने में जुटी हैं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री




  • सिद्धिविनायक मंदिर में जाकर पूजा की
  • आदित्य ठाकरे और संजय राउत से मिली
  • भाजपा विरोधी मोर्चा को एकजुट करना काम
  • पवार से मिलने के बाद कहा अब कहां यूपीएः ममता
राष्ट्रीय खबर

मुंबईः विपक्ष को नये सिरे से एकजुट करने की तैयारियों में जुटी ममता बनर्जी के बयान से यह साफ हो गया है कि अब वह तथा कुछ अन्य भाजपा विरोधी दल हर बात के लिए कांग्रेस से अनुमति लेने का इंतजार नहीं करेंगे। उससे काफी पहले एनसीपी नेता तथा मराठा क्षत्रप शरद पवार भी कांग्रेस के अंदर की स्थिति पर नाराजगी व्यक्त कर चुके थे। आज शरद पवार से ममता बनर्जी ने यहां मुलाकात की। ममता बनर्जी के समर्थन में श्री पवार ने भी कई तस्वीरों से साथ ट्विट कर यह जता दिया कि वह फिलहाल ममता बनर्जी के प्रयासों को अधिक तरजीह देने जा रहे हैं। कल शाम यहां पहुंचने के बाद ममता बनर्जी ने शिवसेना के आदित्य ठाकरे और संजय राउत से मुलाकात की थी। आज सुबह वह सिद्धि विनायक मंदिर में भी पूजा करने गयी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ उनकी मुलाकात नहीं हो पायी है क्योंकि एक ऑपरेशन के बाद डाक्टरों ने श्री ठाकरे को दूसरों से अलग रहने को कहा है। वैसे मुंबई के दौरे पर ममता बनर्जी निश्चित तौर पर कांग्रेस के साथ साथ भाजपा खेमा में भी हलचल पैदा करने में कामयाब रही है। उनके यहां आने पर प्रदेश कांग्रेस के एक बड़े नेता द्वारा उनकी प्राथमिकताओं की आलोचना किये जाने से भी स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल तो ममता बनर्जी अपनी तरफ से विपक्ष को एकजुट करने की कोशिशों में कांग्रेस को पूछने नहीं जा रही हैं। हाल के दिनों में अन्य दलों के बड़े नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर ममता बनर्जी ने देश के अन्य हिस्सों में भी अपनी पार्टी का विस्तार करने का काम किया है। इसके तहत कांग्रेस के कई नेता तथा मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री भी अब उनके साथ हो गये हैं।







विपक्ष को मजबूत करने में कांग्रेस में सेंधमारी

इससे स्पष्ट होता जा रहा है कि ममता बनर्जी तथा उनसे एक राय रखने वाले तमाम अन्य भाजपा विरोधी दल अब अलग से आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव में मोर्चा बनाने में जुटे हुए हैं। याद दिला दें कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के वक्त भाजपा नेताओं के हमले के उत्तर में ममता बनर्जी ने कहा था कि अब बंगाल में कोई बदलाव नहीं होगा बल्कि इस चुनाव के बाद दिल्ली में बदलाव जरूर होगा। इस एलान के बाद वह नये सिरे से पूरे देश में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा करने के साथ साथ भाजपा के खिलाफ सक्रिय अन्य क्षेत्रीय दलों को जोड़ने की कवायद में जुटी है। इससे स्पष्ट होता जा रहा है कि कांग्रेस भले ही इसमें शामिल ना हो लेकिन वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले तक ममता बनर्जी के प्रयास से एक और नया मोर्चा भाजपा के खिलाफ खड़ा होगा, जो भाजपा विरोधी वोटों के विभाजन को रोकेगा।



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