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ममता बनर्जी ने भवानीपुर से बनायी जीत की हैट्रिक




पहले ही दौर से मिले थे स्पष्ट संकेत
हर दौर में जीत का अंतर लगातार बढ़ा
हकीम ने 2024 के चुनाव का नेता बताया
टीएमसी का पचास हजार का प्रयास सफल रहा
राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट से तीसरी बार चुनाव जीत लिया है। नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी के हाथों पराजित होने के पहले वह दो बार इसी सीट से चुनाव जीत चुकी हैं।




आज के मतदान में प्रारंभ से ही उनकी बढ़त का सिलसिला कायम हो गया था। हर दौर के मतदान के बाद यह बढ़त और ज्यादा होता चला गया।

अंतिम परिणाम के मुताबिक ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट के उपचुनाव में 58,832 मतों से जीत दर्ज की है।

इस अंतर की वजह से तृणमूल खेमा और अधिक उत्साहित है क्योंकि कल से ही जीत का अंतर पचास हजार वोटों से अधिक होगा या कम इस पर अटकलबाजी का दौर चरम पर था।

इसके बीच ही तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल की चार में से तीन सीटों पर जीत दर्ज कर फिर से यह साबित कर दिया है कि फिलहाल पश्चिम बंगाल में भाजपा उसके मुकाबले कहीं नहीं टिक पा रही है।

भवानीपुर के अलावा जंगीपुर सीट के लिए हुए चुनाव में टीएमसी के जाकिर हुसैन ने 92 हजार 613 वोटों से चुनाव जीता है। शमशेरगंज में भी टीएमसी प्रत्याशी अमीरुल इस्लाम 26 हजार 384 मतों से चुनाव जीत गये हैं।

इन जीत का एहसास तो पहले ही दौर से टीएमसी समर्थकों को होने लगा था। इसी वजह से इलाके में हर जगह उसके समर्थक जीत का जश्न मनाने में जुट गये थे।

चुनाव परिणाम समाप्त होते ही ममता बनर्जी के विश्वासपात्र सेनापति फिरहाद हकीम ने अपने ट्विट में यह संकेत दिया कि तृणमूल कांग्रेस का अगला राजनीतिक लक्ष्य क्या है। उन्होंने लिखा कि आज का यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ममता बनर्जी ने अन्य सीटों पर भी जीत दिलायी

इस एक जनादेश से भवानीपुर की जनता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने वर्ष 2024 के लिए देश की नेत्री के प्रति अभी ही विश्वास व्यक्त किया है।

इस बात से स्पष्ट है कि भाजपा को अगले लोकसभा में जोरदार टक्कर देने की ममता बनर्जी के एलान को लेकर पार्टी गंभीर है और उस दिशा में निरंतर प्रयासरत भी है।

बता दें कि पांच जनवरी 1955 को जन्मी सुश्री बनर्जी 1970 के दशक के दौरान छात्र राजनीति करती हुई कांग्रेस में शामिल हुईं और 1984 में जादवपुर संसदीय क्षेत्र से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सोमनाथ चटर्जी को पराजित कर अपना पहला आम चुनाव जीता था।

वर्ष 1989 में इस सीट पर वह माकपा की मालिनी भट्टाचार्य से चुनाव हार गयी लेकिन 1991 में नवगठित कलकत्ता दक्षिण संसदीय क्षेत्र के रूप में इस सीट को फिर से अपने कब्जे में लिया।




इसके बाद 1996, 1998, 1999, 2004 और 2009 के आम चुनावों में कोलकाता दक्षिण सीट पर अपनी जीत का सफर जारी रखा। सुश्री बनर्जी से कुछ राजनीतिक विरोधाभाषों के परिप्रेक्ष्य में 1997 में कांग्रेस छोड़ दी और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की।

कुछ ही समय में उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी। वर्ष 2011 में भवानीपुर उपचुनाव में माकपा की नंदिनी मुखर्जी को 54,213 मतों से हराया और राज्य मुख्यमंत्री चुनी गयी।

उन्होंने 2016 में भवानीपुर से कांग्रेस की दीपा दासमुंशी को 25,301 मतों के अंतर से हराकर दूसरी बार जीत हासिल की। इसी वर्ष मार्च-अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में एक बार फिर जबरदस्त जीत हासिल की , लेकिन सुश्री बनर्जी नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के शुभेंदु अधिकारी से महज 1736 मतों से हार गईं।

नंदीग्राम में चुनाव हार गयी थी वह

उन्होंने गत पांच मई को तीसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। एक अनिवार्य प्रक्रिया के तहत उन्हें छह महीने यानी पांच नवंबर के भीतर किसी भी विधानसभा सीट पर जीत हासिल करनी थी और भवानीपुर से निर्वाचित विधायक शोवनदेव चट्टोपाध्याय ने उनके मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए यह सीट छोड़ दी थी।

इसके तुरंत बाद ही पार्टी सूत्रों ने बताया कि आगामी 30 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में ब्रजकिशोर गोस्वामी जहां शांतिपुर से चुनाव लड़ेंगे, वहीं उदयन गुहा दिनहाटा से और सोवनदेव चट्टोपाध्याय जिन्होंने अपनी भवानीपुर सीट छोड़ दी थी, वह खरदाहा से चुनाव लड़ेंगे।

ममता बनर्जी ने कहा गोसबा विधानसभा सीट के लिए उम्मीदवार की घोषणा पार्थ चटर्जी और सुब्रत बक्शी से परामर्श लेने के बाद की जाएगी। संभावित उम्मीदवार बप्पादित्य नस्कार या फिर सुब्रत मंडल होंगे।

पिपिली विधानसभा सीट बीजद उम्मीदवारी महारथी आगे

भुवनेश्वर : ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) उम्मीदवार रुद्र प्रताप महारथी विधानसभा उपचुनाव में पिपिली सीट पर दूसरे दौर की मतमणना के बाद अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार अश्रित पटनायक से 3317 मतों से आगे चल रहे हैं।

श्री महारथी को अभी तक 9030 वोट मिले है, श्री पटनायक को 5713 और कांग्रेस उम्मीदवार बोसवोकेशन हरिचन्दन को 981 वोट मिले हैं। वहीं अन्य सात उम्मीदवारों में से कोई भी 100 वोट हासिल करने में कामयाब नहीं रहा है।

उल्लेखनीय है कि गत वर्ष चार अक्टूबर को बीजद विधायक प्रदीप महारथी के निधन के बाद यह सीट रिक्त हुई थी और इस सीट पर 30 सितंबर को मतदान हुआ था। इस विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव विभिन्न कारणों से तीन बार स्थगित करना पड़ा था।

बीजद के दिवंगत प्रदीप महारथी ने छह बार यहां से चुनाव जीता था। उन्होंने 1985 में दुबारा और जनता दल के उम्मीदवार के रूप में 1990 में और वर्ष 2000, 2004, 2009 और 2014 में चार बार बीजद उम्मीदवार के रूप में इस सीट से विजयी हुए थे।

बीजद ने इस बार पीपिली क्षेत्र के उपचुनाव में श्री महारथी के पुत्र रुद्र प्रताप महारथी को चुनावी मैदान में उतारा है।



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