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महाराष्ट्र का सियासी ड्रामा मसाला फिल्म के तर्ज पर

  • रहस्य और रोमांच से भरपूर फिल्म समाप्ति की ओर
  • मजाक में कहा गया अब सिर्फ फाइट बाकी है
  • कुछ को उम्मीद है कि इस पर फिल्म बनेगी
  • कई लोगों को अपहरण का आभास नहीं था
विशेष प्रतिनिधि

मुंबईः महाराष्ट्र का सियासी ड्रामा किसी मसाला हिन्दी फिल्म के
कतई कम नहीं है। अब जबकि सारे राज लगभग खुल चुके हैं, इसके
हर घटना की जानकारी सार्वजनिक हो रही है।

लापता हुए विधायकों के वापस लौटने के बाद पूरे घटनाक्रम के बारे में
क्रमवार तरीके से जानकारी मिल रही है। इसलिए माना जा सकता है
कि महाराष्ट्र का सियासी ड्रामा हिन्दी सस्पेंस फिल्मों के सारी
विशिष्टताओं को समेटे हुए हैं, जो फिल्म को हिट बनाती है।

लोग मजाक में इस बात की भी चर्चा कर रहे हैं कि शीघ्र ही इस पूरी
पटकथा पर कोई और नई फिल्म भी आ सकती है।

हर दृश्य रहस्य और रोमांच से भरपूर रहा

मिली जानकारी के मुताबिक इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में रहस्य,
रोमांच, अपराध, टकराव जैसा सब कुछ है। वैसे मजाक के तौर पर कुछ
लोगों का मानना है कि सिर्फ इस महाराष्ट्र के सियासी ड्रामा में अब
तक फाइट देखने को नहीं मिली है। वैसे उम्मीद है कि सदन के भीतर
बहुमत का परीक्षण होने के दौरान यह सीन भी देखने को मिल सकता
था।

ऐसा इसलिए माना जा रहा है क्योंकि महाराष्ट्र का चुनावी परिणाम पूरे
देश की राजनीति पर असर डालने वाला साबित हो सकता है।

जिन विधायकों के लापता हो जाने की जानकारी मिली थी, उनके
वापस लौटने के बाद उनलोगों ने ही अपनी तरफ से पूरे घटनाक्रम की
जानकारी दी है, जो किसी मसाला फिल्म से कम नहीं है।

कुछ विधायकों को फ्लाइट से गुड़गांव ले जाया गया था तो कुछ अज्ञात
स्थानों पर थे। कई विधायक हालांकि लौट आए थे, लेकिन कई लोगों
के लिए एनसीपी ने सर्च ऐंड रेस्क्यू ऑपरेशन ही छेड़ दिया था।

महाराष्ट्र का सियासी ड्रामा में सस्पेंस भी

एनसीपी के जिन विधायकों ने दिल्ली की फ्लाइट पकड़ी थी, उनमें से
एक दौलत दरोडा भी थे। कहा जा रहा है कि उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट से
गुरुग्राम ले जाया गया था और वहां बीजेपी के लोगों की निगरानी में
एक होटल में रखा गया था।

एनसीपी के होटल में वापस लौटने पर दरोडा ने कहा, ‘हमें जब दिल्ली
ले जाया जा रहा था तो कहा गया कि एनसीपी ने बीजेपी का
आधिकारिक तौर पर समर्थन किया है। लेकिन बाद में हमें पता चला
कि एनसीपी बीजेपी का समर्थन नहीं कर रही।’

गुरुग्राम पहुंचने के बाद पता चला कि मामला उल्टा है

उन्होंने कहा कि गुरुग्राम के होटल में हमारा फोन भी छीन लिया गया
था, लेकिन किसी तरह से शरद पवार से हम संपर्क कर सके।

इसके बाद उन्होंने हमें वहां से निकालने के लिए प्रयास शुरू किए।

एनसीपी के संजय बंसोडे उन विधायकों में से थे, जिन्हें शिवसैनिक
एयरपोर्ट से पकड़कर रविवार को वाईबी चौहान सेंटर लाए थे। यहां
शिवेसना और एनसीपी की मीटिंग चल रही थी।

शिवसेना के एक नेता ने बंसोडे को पकड़कर लाने की दिलचस्प कहानी
बताते हुए कहा कि शरद पवार ने उद्धव ठाकरे के पीए मिलिंद नार्वेकर
को फोन किया था। उन्होंने कहा कि बंसोडे को सहारा स्टार में रखा
गया है और वह वापस लौटना चाहते हैं।

इसके बाद मिलिंद और शिवसेना के लीडर एकनाथ शिंदे होटल पहुंचे।
पहले अकेले मिलिंद ही गए और वहां देखा कि 40 पुलिसवाले खड़े हैं
और बीजेपी नेता मोहित कांबोज भी मौजूद थे। कुछ ही देर में अपने
कई समर्थकों के साथ एकनाथ शिंदे भी मौके पर पहुंचे।

बंसोडे से संपर्क किया गया और वह लॉबी में आए। इसी दौरान मिलिंद
और शिंदे से पुलिस और बीजेपी के कार्यकर्ता बहस करने लगे। इसी
दौरान शिवसैनिक बंसोडे को लेकर निकल गए।

पूरी घेराबंदी के बीच धावा बोला शिवसेना और कांग्रेस ने

गुरुग्राम के ओबेरॉय होटल में रखे गए अनिल पाटील ने बताया कि वह
अजित पवार की शपथ में गए थे। शपथ ग्रहण के दौरान हमलोगों ने
सोचा कि एनसीपी बीजेपी के साथ सरकार बना रही है और अजित
पवार का नेता के तौर पर हमने साथ दिया।

इसके बाद हमें कहा गया कि सरकार गठन तक हमें कहीं और जाना
होगा। लेकिन, जब हम गुरुग्राम पहुंचे और टीवी देखा तो सच पता
चला।

बाबासाहेब पाटील ने कहा कि उन्हें पहले राजभवन ले जाया गया था
और उसके बाद तीन अन्य विधायकों के साथ दिल्ली लाया गया।

अजित पवार क्या कर रहे हैं, इसका पता मुझे तब चला जब हम
दिल्ली पहुंचे और अपना फोन ऑन किया। इसके बाद किसी तरह
हमने शरद पवार से संपर्क किया और उन्होंने हमें निकाला।

खुद को संभाला तब शरद पवार से संपर्क कियामुंबई के होटल हयात में जुटे तीन दलों के 162 विधायक

राजेंद्र सिंगणे ने बताया कि उन्हें गुरुवार रात को अजित पवार ने कॉल
किया था। उन्होंने अगले दिन धनंजय मुंडे के बंगले पर पहुंचने को
कहा है और कहा कि जरूरी मसले पर बात करनी है।

मैं शनिवार को सुबह 7 बजे वहां पहुंचा और वहां 8 से 10 विधायक
पहले से थे। इसके बाद हमें गवर्नर हाउस ले जाया गया, लेकिन कुछ
नहीं बताया गया। जब तक हम कोई फैसला ले पाते, देवेंद्र फडणवीस
और अजित पवार शपथ ले चुके थे।

शनिवार को राजभवन में हुई शपथ में मौजूद रहे माणिकराव कोकाटे
कई घंटों तक गायब रहे। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर मेसेज
जारी किया और रविवार को होटल रेनेसां में पहुंचे, जहां एनसीपी के
लोग ठहरे हुए थे।

उन्होंने कहा कि अजित पवार विधायक दल के नेता थे और मैंने उनकी
बात मानी। मुझे कुछ भी अंदाजा नहीं था कि वह क्या करने जा रहे हैं।

वापस लौटे विधायकों ने दी पूरे घटनाक्रम की जानकारी

संदीप क्षीरसागर ने कहा, ‘अजित पवार ने मुझे धनंजय मुंडे के बंगले
पर बुलाया था, जिस दिन शपथ समारोह था। मैं वहां गया, लेकिन
अजित पवार और मुंडे नहीं थे।

मुझे कार में बैठने को कहा गया और राजभवन ले जाया गया।’ शपथ
ग्रहण समारोह देखने के बाद मैंने महसूस किया कि कुछ गलत हो गया
है। लेकिन, मुझे जाने नहीं दिया गया। किसी तरह मैं वहां से निकला
और फिर वाईबी चौहान सेंटर पहुंचा, जहां शरद पवार और अन्य
सीनियर लीडर मौजूद थे।

मजलगांव के विधायक प्रकाश सोलंकी ने हालांकि अलग ही कहानी
बताई। उन्होंने कहा कि मैं शपथ में गया था, लेकिन फिर रेनेसां होटल
आया और शरद पवार का सपॉर्ट किया।

समर्थन की अफवाह भी फैलायी गयी थी

वह अजित पवार के साथ जाने की बात से इनकार करते हुए कहते हैं
कि मेरी ओर से उनको समर्थन की सिर्फ अफवाह फैलाई गई थी। शपथ
ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने वालों में तीन विधायकों में वह थे।

ये थे सुनील शेलके, सुनील टिंगरे और सुनील भुसारा। तीनों नेताओं ने
कहा  कि हम बागी नहीं थे, हमें अजित पवार ने बुलाया था और उन्हें
अपना नेता मानते हुए पहुंचे थे। हम अब भी एनसीपी में ही हैं और
शरद पवार जी के नेतृत्व पर भरोसा रखते हैं।

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