fbpx Press "Enter" to skip to content

महाराष्ट्र की राजनीतिक लड़ाई शरद पवार और अमित शाह के बीच

  • मराठा नेता ने संकेत दिया कि शाह की अग्निपरीक्षा
  • फिर दोहराया विपक्ष में बैठने का जनादेश
  • शिवसेना ने नहीं दिया है कोई ऐसा प्रस्ताव
  • संघ ने कहा खरीद फरोख्त से दूर रहे भाजपा
रासबिहारी

नईदिल्लीः महाराष्ट्र की राजनीतिक लड़ाई दरअसल क्या है, इसका खुलासा

होने लगा है। अपने पत्ते काफी दिनों तक छिपाकर रखने के बाद पहली बार

शरद पवार ने इस बारे में संकेत दिये हैं। उन्होंने विपक्ष में बैठने का अपने

फैसला को दोहराते हुए कहा है कि अब भाजपा के असली सेनापति यानी

अमित शाह की यह अग्निपरीक्षा की घड़ी है। यह देखना रोचक होगा कि श्री

शाह इस चुनौती का कैसे सामना करते हैं। ऐसा कहकर मराठा क्षत्रप ने स्पष्ट

कर दिया है कि वह निश्चित तौर पर किसी वैकल्पिक राजनीति पर कोई राय

बना चुके हैं। लिहाजा यह दो धाकड़ राजनीतिज्ञों के बीच शह मात का खेल बन

चुका है। इसी वजह से अब नीतीन गडकरी को भागे भागे नागपुर जाना पड़ा है

क्योंकि सरकार गठन की समय सीमा अब समाप्त होती जा रही है।

बयान से सीधे अमित शाह को चुनौती दी मराठा नेता ने

पवार के बयान से यह भी स्पष्ट है कि शायद शिवसेना के राजग गठबंधन से

बाहर आने का इंतजार किया जा रहा है। श्री पवार पहले ही यह साफ कर चुके

हैं कि वह अकेले इस पर कोई फैसला नहीं लेंगे। उनके मुताबिक महाराष्ट्र की

राजनीतिक लड़ाई उन्होंने कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ी है। इसलिए अब जो

भी फैसला होगा दोनों दल आपसी सहमति से ही लेंगे।

शिवसेना के नेता संजय राउत से कई बार मिलने के सवाल पर भी एनसीपी

नेता ने कहा है कि मित्रता वश वह हाल के दिनों में कई बार मिले हैं। लेकिन

सच्चाई यही है कि शिवसेना की तरफ से एनसीपी को सरकार गठन के बारे

में कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है।

शिवसेना नेता संजय राउत द्वारा 175 विधायकों का समर्थन प्राप्त होने के

प्रश्न पर भी श्री पवार ने कहा कि वह खुद नहीं जानते कि श्री राउत ऐसा

किस आधार पर कह रहे हैं। लेकिन महाराष्ट्र की राजनीतिक लडाई में उनके

गठबंधन को विपक्ष में बैठने का जनादेश प्राप्त हुआ है। वह इसी जनादेश का

सम्मान कर रहे हैं।

महाराष्ट्र की स्थिति हमारे पक्ष का नहींः शरद पवार

श्री पवार ने कहा है कि 288 विधायकों के इस सदन में बहुमत के लिए 144 का

आंकड़ा चाहिए। एनसीपी के पास मात्र 54 विधायक हैं। इसलिए हमारे लिए

जनता का फैसला विपक्ष में बैठने का है। हम इसी फैसले पर अडिग है। लेकिन

इस बीच संघ के सूत्रों से छनकर आयी सूचनाओं के मुताबिक संघ प्रमुख

मोहन भागवत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को किसी किस्म के खरीद

फरोख्त से परहेज करने का साफ संकेत दिया है। अपुष्ट जानकारी के

मुताबिक संघ प्रमुख ने कहा है कि अगर जरूरत हो तो भाजपा विपक्ष में बैठे

लेकिन बिना शिवसेना के सरकार गठन की दिशा में अन्य विधायकों को

खऱीदने की गलती कतई नही करे।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from महाराष्ट्रMore posts in महाराष्ट्र »

3 Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!
Open chat