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महाराष्ट्र के लातूर के विधानसभा चुनाव में फिर से साबित हुआ नोटा का जलवा







नईदिल्लीः महाराष्ट्र के लातूर का चुनाव परिणाम देश की राजनीतिक दलों के लिए भी एक स्पष्ट जनादेश जैसा है।

वहां के चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के पुत्र धीरज विलासराव देशमुख विजयी हुए हैं।

उन्हें इस सीट पर 75.10 प्रतिशत वोट मिले हैं। लेकिन असली ताकत नोटा की शक्ति के प्रदर्शन का है।

इस चुनाव में दूसरे नंबर पर नोटा ही है, जिसे 13.06 फीसद वोट मिले हैं।

नोटा को प्राप्त वोट वहां चुनावी मैदान में उतरने तीन दलों के संयुक्त वोट प्रतिशत से अधिक है।

इस चुनाव में शिवसेना (4.7), वंचित बहुजन अगाड़ी (4.9) महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कुल वोट से यह अधिक है।

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के इस सीट पर कुल 3.22.061 मतदाता था। इनमें 1,69,724 पुरुष और 1,52,336 महिला

मतदाता था। इस सीट की विशेषता यह भी है कि यहां अनुसूचित जाति की आबादी 18.8 और अनुसूचित जनजाति की

आबादी 1.71 प्रतिशत है।

पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय विलासराव देशमुख के पूर्व धीरज के लिए विधानसभा चुनाव लड़ने का यह पहला अनुभव था।

इससे पूर्व राजनीति में कदम रखने के बाद उन्होंने इससे पहले वर्ष 2017 में लातूर के एकुर्गा के जिला परिषद का

चुनाव जीता था।

महाराष्ट्र के लातूर से दलों को अब सबक लेना ही चाहिेए

महाराष्ट्र के लातूर के इस चुनाव परिणाम ने फिर से सभी राजनीतिक दलों को नये सिरे से आत्मविश्लेषण करने का

साफ जनादेश सुनाया है। इससे पहले छत्तीसगढ़ के चुनाव में भी इस नोटा का प्रभाव देखने को मिला था।

जहां कई प्रत्याशी सिर्फ नोटा को मिले अधिक वोट की वजह से चुनाव हार गये थे।

नोटा का सीधा अर्थ है कि चुनाव में लड़ने वाला कोई भी प्रत्याशी उन्हें पसंद नहीं है।

वर्तमान में इसका अधिक प्रभाव नहीं देखने को मिल रहा है।

लेकिन जिस तरीके से महाराष्ट्र के लातूर का चुनाव परिणाम आया है, वह सभी दलों को प्रत्याशियों के

चयन में सावधानी के साथ साथ जनता के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने की हिदायत देने वाला है।



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