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दिल्ली दरबार तक शिफ्ट हुई महाराष्ट्र की राजनीति




  • पवार के पावर प्ले में हांफने लगी भाजपा
  • मुंबई में अब भी शिवसेना अपनी बात पर अड़ी
  • संजय राउत ने किया 175 समर्थन का दावा
  • सरकार को बाहर से समर्थन देने का विकल्प खुला
रासबिहारी

नईदिल्लीः दिल्ली दरबार में महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर सरगर्मी बढ़

गयी है। मुंबई में तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच मुख्यमंत्री

देवेंद्र फडणवीस और एनसीपी नेता शरद पवार दिल्ली पहुंचे हैं। दोनों के

दिल्ली पहुंचने के निष्कर्ष निकालने का क्रम प्रारंभ हो चुका है। घोषित

कार्यक्रम के मुताबिक श्री फडणवीस पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री

अमित शाह के अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मिलने वाले हैं। दूसरी

तरफ शरद पवार  का दिल्ली आना श्रीमती सोनिया गांधी से मिलने के

कार्यक्रम की वजह से हैं। इन दोनों ही खेमों से मिली जानकारी का एक ही

निष्कर्ष निकल रहा है कि अब महाराष्ट्र में सरकार गठन की राजनीति

दिल्ली दरबार तक पहुंच चुकी है।

पहले ऐसा समझा गया था कि कांग्रेस और एनसीपी द्वारा इंकार किये जाने

के बाद राजग खेमा में भाजपा और शिवसेना के बीच कोई बीच का रास्ता

निकल आयेगा। दिल्ली से मिली जानकारी के मुताबिक भाजपा ने इस

समस्या को सुलझाने के लिए पहले ही देवेंद्र फडणवीस को पूरी छूट दे

रखी थी। लेकिन शिवसेना के अड़ जाने की वजह से इस बात में कोई

प्रगति नहीं हो पायी। दूसरी तरफ सरकार नहीं बनते देख एनसीपी और

कांग्रेस के नेताओं ने भी पार्टी अध्यक्ष से अपने फैसलों पर दोबारा विचार

करने का आग्रह कर दिया।

संजय राउत के बयानों से सहमी है भाजपा

मामले पेचिदा इसलिए भी होता जा रहा है क्योंकि शिवसेना की तरफ से

राज्यसभा सांसद संजय राउत ने यह दावा किया है कि इस विधानसभा में

उनके पास 175 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। श्री राउत ने कहा कि शिवसेना

और भाजपा के बीच 50-50 के फार्मूले को लेकर मतभेद है, जिसे सुलझाना

भाजपा की जिम्मेदारी है। चूंकि इस चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर

आयी है, इसलिए सरकार का गठन कैसे हो, यह सोचना उसकी जिम्मेदारी है।

इस बार के चुनाव में महाराष्ट्र में भाजपा को 105 और शिवसेना को 56 सीटें

मिली हैं। 288 सदस्यों वाली इस विधानसभा में एनसीपी तीसरे नंबर पर है,

जिसके पास 54 और कांग्रेस के पास 44 सीटें हैं। इन दोनों दलों ने पहले ही

सरकार गठन के दांव-पेंच से खुद को अलग रखने का एलान कर दिया था।

लेकिन भाजपा और शिवसेना के बीच बात नहीं बनने की वजह से नये सिरे से

संभावनाओं की तलाश हो रही है।

दिल्ली दरबार तक कांग्रेस ने पहुंचायी है अपनी बात

खबर है कि दिल्ली आने से पहले शरद पवार के अपने नजदीकी लोगों के साथ

एक बैठक की है। इस बैठक में भी विकल्प की संभावनाओं पर चर्चा की गयी

है। अंदरखाने से जो सूचनाएं बाहर आयी हैं, उसके मुताबिक शिवसेना और

भाजपा के इस गतिरोध के बीच शरद पवार शिवसेना को बाहर से समर्थन देने

के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं। समझा जा रहा है कि दिल्ली में वह श्रीमती

सोनिया गांधी से इसी मुद्दे पर चर्चा करने आ रहे हैं। कुल मिलाकर इसी वजह

से माना जा रहा है कि शरद पवार के पावर प्ले में पूरी भाजपा महाराष्ट्र की

टीम हांफने लगी है। इसी वजह से उन्हें अब दिल्ली दरबार का रुख करना पड़ा

है।



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