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भूत के आतंक से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय यज्ञ का आयोजन

  •  इलाके के चार युवकों की मौत 15 अगस्त को

  •  हर व्यक्ति को पता है कि पूजा क्यों हो रही है

  •  रथखोला स्पोर्टिंग क्लब के द्वारा आयोजन

प्रतिनिधि

शिलिगुड़ीः भूत का आतंक यहां हर बार दुर्गा पूजा के वक्त क्यों होता है, यह भी बहस का

विषय है। लेकिन इस आतंक से लोगों को निजात दिलाने के लिए स्थानीय स्तर पर कई

प्रयास किये जा रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा आयोजन शिलिगुड़ी के रथखोला में हो रहा है। वहां

रविवार को बड़े पैमाने पर महामृत्युंजय यज्ञ के साथ साथ गीता पाठ का समारोह होने जा

रहा है। सार्वजनिक समारोह के मकसद के बारे में औपचारिक तौर पर कोई एलान तो नहीं

किया गया है लेकिन स्थानीय लोगों को यह पता है कि ऐसा आयोजन दरअसल भूत के

आतंक से मुक्ति के लिए है।

औपचारिक तौर पर भूत के भय को दूर करने की बात कोई नहीं कहता। लेकिन आयोजक

इतना अवश्य स्वीकार करते हैं कि स्थानीय लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाने के मकसद से

ऐसा किया जा रहा है। ऐसा आयोजन रथखोला स्पोर्टिंग क्लब द्वारा किया गया है। इसके

बैनर भी चारों तरफ लगाये गये हैं।

दरअसल पिछले कुछ दिनों से लगातार अकाल मौत की वजह से दुर्गा पूजा के करीब आने

के दौरान भूत के आतंक की कहानी प्रचलित हो चली थी। कुछ वर्षों से लगभग इसी समय

अनेक लोगों की मौत का सिलसिला चला आ रहा है। गत 15 अगस्त को भी कार्सियांग से

लौटते वक्त रथखोला के चार युवकों की मौत हुई है। उसके बाद अचानक एक अन्य युवक

की भी मौत हुई, जिसके बारे में डाक्टरों का कहना है कि उसका हार्ट अटैक हुआ था। इसी

वजह से पूरे इलाके में अचानक ही फिर से भूत का आतंक सर चढ़कर बोल रहा है।

आयोजकों के मुताबिक रथखोला ही नहीं पूरे शिलिगुड़ी के नागरिकों के लिए यहां प्रार्थना

सभा का भी आयोजन किया जाएगा।

भूत के आतंक की बात औपचारिक तौर पर कोई नहीं स्वीकारता

सुबह दस बजे से प्रारंभ होने वाले कार्यकम की समाप्ति शाम पांच बजे होगी। उसके बाद

प्रसाद वितरण का कार्यक्रम रखा गया है। क्लब के प्रमुख सदस्य सोना चक्रवर्ती ने बताया

कि चार युवकों की मौत के बाद किसी ने भूत के आतंक की अफवाह फैलायी है। इससे

इलाके के लोग प्रभावित हैं। ऐसे लोगों में आत्मविश्वास जगाने के लिए ही पूजा का

आयोजन किया गया है। इस यज्ञ के पुरोहित मानस देवशर्मा ने इस बारे में कहा कि बहुत

कुछ विधि का विधान होता है, जो हमारे हाथ में नहीं होता। ऐसी परिस्थिति में ईश्वर को

याद करने से कमसे कम मानसिक शांति हासिल होती है।


 

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