fbpx Press "Enter" to skip to content

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा ‘पानी’ के कारण ही चुनावी राजनीति में आया

भोपालः मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज कहा कि उनके चुनावी राजनीति में

आने का मूल कारण ‘पानी’ है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने यहां राष्ट्रीय जल

सम्मेलन में बताया की 1979 में जब वे छिंदवाड़ा जिले के सौंसर से पांढुर्णा जा रहे थे, तब

रास्ते में कुछ गांव के लोग सड़क पर खड़े होकर उनका 3 घंटे से इंतजार कर रहे थे। उस

समय रात के 10 बज रहे थे। श्री कमलनाथ के अनुसार उन्होंने अपनी गाड़ी रोकी और

उनसे खड़े होने का कारण पूछा, तो गांव वालों ने बताया कि सड़क से आधा किलोमीटर दूर

उनका गांव है। उन्हें पानी लेने के लिए 12 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इसके कारण

हमारे गांव के लड़कों के विवाह नहीं हो रहे हैं। क्योंकि लड़की वाले कहते है कि उनकी बेटी

इतने दूर से पानी नहीं लाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उसी दिन उन्होंने तय किया था कि

चुनावी राजनीति के जरिए लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाएंगे। श्री कमलनाथ

ने कहा कि छिंदवाड़ा में आज जो स्थिति है, वह सबके सामने है। समारोह में जल पुरुष के

नाम से विख्यात और मेगसेसे पुरस्कार प्राप्त प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह ने बताया कि वर्ष

1990 से उनके श्री कमलनाथ ने संबंध हैं। उन्होंने कहा कि श्री कमलनाथ का पर्यावरण के

प्रति कितना गहरा जुड़ाव है, इसका एक उदाहरण है गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और

दिल्ली राज्य में फैली हुयीं अरावली पर्वत श्रंखलाएं। उन्होंने कहा कि आज यह पर्वत

सुरक्षित हैं, तो इसका श्रेय मुख्यमंत्री कमलनाथ को जाता है। श्री सिंह ने बताया कि 7 मई

1992 को अरावली पर्वत में हो रहे अवैध उत्खनन और अतिक्रमण को लेकर वे श्री

कमलनाथ से मिले थे, तब वे केन्द्र में वन एवं पर्यावरण मंत्री थे।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने केंद्र में भी त्वरित कार्रवाई की थी

जब उनके समक्ष यह मुद्दा रखा गया, उन्होंने तत्काल अरावली पर्वत को बचाने के लिए

अधिसूचना जारी करायी। उसके कारण ही वे आज तक सुरक्षित हैं और वहां चारों तरफ

हरियाली है। इसी आयोजन में मुख्यमंत्री का तरुण भारत संघ की ओर से ‘राइट टू वॉटर’

कानून बनाने की पहल करने और मध्यप्रदेश को देश का पहला राज्य बनाने के लिए

अभिनंदन पत्र भेंट किया गया। अभिनंदन पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ की

दूरदर्शी सोच के कारण 2020 में जल सुरक्षा अधिनियम बनाने की पहल की गयी है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पर्यावरण संरक्षण को लेकर उनके विचारों पर अमल की दिशा

में एक अद्भुत कदम है। इस अभिनंदन पत्र में यह भी जिक्र है कि देश के वन एवं पर्यावरण

मंत्री के रूप में श्री कमलनाथ ने अरावली पर्वत को अवैध अतिक्रमण और खनन से रोकने

के लिए, जो अधिसूचना जारी की थी, वह पर्यावरण के प्रति उनकी गहरी निष्ठा को

अभिव्यक्त करता है

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Be First to Comment

Leave a Reply