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अंधेरे में क्यों नहीं बढ़ पाते हैं पेड़ पौधों के जड़




फोटो संश्लेषण के अलावा भी इसकी भूमिका है
जड़ों के विकास से पेड़ पौधों का विकास जुड़ा है
सिर्फ पत्तों पर सूर्य की रोशनी पड़ना ही काफी नहीं
फोटो संश्लेषण के गहरे प्रभाव की जानकारी मिली
राष्ट्रीय खबर

रांचीः अंधेरे से पेड़ पौधों के बचाने की बात हम सामाजिक तौर पर सुनते आये हैं। अक्सर ही घर के छोटे गमलों में लगने वाले पौधों के बारे में भी यह पता होता है कि उन्हें सूर्य की रोशनी में रखना जरूरी होता है।




घरों के अंदर रखे गये वैसे पौधों को भी दिन में एक बार सूर्य की रोशनी में रखने की सीख हमें मिली होती है। लेकिन क्या कभी सोचा है कि आखिर इस सामाजिक सीख के पीछे की कहानी क्या है।

सामान्य विज्ञान के मुताबिक सूर्य की रोशनी से पेड़ पौधों के पत्तों में फोटो संश्लेषण यानी फोटो सिंथेंसिक की प्रक्रिया से ही उनका विकास होता है।

लेकिन अब नया शोध बताता है कि रोशनी और फोटो संश्लेषण के अलावा भी अंधेरे में पेड़ पौधों की जड़ों का सही विकास नहीं हो पाता है। इन जड़ों के विकास के लिए भी सूर्य की रोशनी का विकास होता है।

शोध वैज्ञानिकों ने इस स्थिति का आकलन बड़े जंगलों में भी किया है, जहां घने और बड़े पेड़ों के नीचे उगने वाले पेड़ पौधों की स्थिति को देखा गया है, जिनपर सूर्य की किरणें या तो नहीं पड़ती हैं या बहुत कम पड़ती है।

इनके जड़ भी अंधेर में सही तरीके से विकसित नहीं हो पाते हैं। जिन पेड़ पौधों की जड़ों का विकास अधिक होता है, वे सूर्य की रोशनी में होते हैं जबकि अंधेर में रहने वाले पेड़ पौधों का तुलनात्मक विकास कम होता है।

शोध दल का निष्कर्ष है कि सिर्फ पेड़ पौधे की नहीं बल्कि फसलों पर भी इसका लगभग एक जैसा ही प्रभाव पड़ता है। यह किसानों के लिए भी एक बड़ी समस्या है।

अंधेरे की इस समस्या को झेल रहे हैं किसान भी

इस अंतर को हम खुद भी अपनी खुली आंखों से महसूस कर सकते हैं। आस पास लगे एक ही प्रजाति के दो पौधों में से सूर्य की रोशनी का अंतर दोनों के विकास को स्पष्ट कर देता है।

दरअसल इस वजह से जब जड़ों का विकास प्रभावित होता है तो आस पास होने के बाद भी एक ही प्रजाति के दो पौधों में यह अंतर देखा जा सकता है।

इस बारे में कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लैब (सीएसएचएल) के सहायक प्रोफसर उलास पेडमेल कहते हैं कि अंधेरे से पेड़ पौधों के जड़ों का विकास बाधित हो जाता है।




दरअसल इसकी वजह से विकास में जड़ों की भूमिका को देखा गया है, जो अंधेरे की वजह से कम घनत्व वाले बन जाते हैं। घनत्व कम होने की वजह से वे तुलनात्मक तौर पर कम बढ़ते हैं।

इसका असर फसलों पर यह होता है कि फसलों का उत्पादन भी कम होता है। उनके मुताबिक जब एक दूसरे के करीब फसलें लगी होती हैं तो उनमें भी अधिक सूर्य की रोशनी पाने की एक प्रतियोगिता होती है।

जो इस दौड़ में आगे निकलता है, वह तेजी से विकसित होता है। उनके मुताबिक जमीन से उगने के बाद पेड़ पौधों की प्राथमिकता भी तेजी से विकास करने की होती है।

उनका विकास उनकी जड़ों पर आधारित होता है। अंधेरे में रहने वाले पेड़ पौधे इस प्रतियोगिता में पिछड़ने लगते हैं। जब जड़ों का सही विकास नहीं होता है तो वैसे पेड़ पौधे आगे बढ़ने मे पिछड़ने लगते हैं। इस शोध के तहत शोध दल ने हर किस्म के पेड़ पौधों पर इसे आजमाया है।

अलग अलग क्षेत्रों में असर को जांचा गया है

यह भी बताया गया है कि वर्तमान में मौसम के बदलाव के दौर में पेड़ पौधों में मजबूत जड़ों का नहीं होना भी समस्या को और बढ़ाता है। जिन इलाकों में इसका अधिक प्रभाव है, वहां के पेड़ पौधों के जड़ों में कमजोरी साफ देखी जा रही है।

यह कमजोरी इसी मौसम के बदलाव की समस्या को और बढ़ा रही है। पेडमेल की टीम में शामिल वैज्ञानिक डेनियेला रोसाडो और अन्य का मानना है कि सैकड़ों पेड़ पौधों पर इसकी जांच की गयी है।

जड़ों के महत्व को समझने के लिए यह जांच वैसे पौधों पर भी की गयी है, जिनपर सूर्य की रोशनी पड़ती थी लेकिन उनकी जड़े अंधेरे में थी। यह पाताय गया है कि इस फोटो संश्लेषण की प्रक्रिया के अलावा भी वहां एक प्रोटिन पैदा होता है।

डब्ल्यूआरकेवाई नामक यह प्रोटिन पेड़ पौधों के जेनेटिक प्रक्रिया को निर्देशित करता है। जड़ों में अंधेरा होने पर यह प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है।

मौसम के बदलाव से जुड़ी इस बात के साथ साथ वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि ऐसी स्थिति में अंधेरे में मौजूद जड़ों वाले पेड़ पौधे दूसरों के मुकाबले कम कॉर्बन डॉईऑक्साइड सोखते हैं। इससे माहौल में इस प्रदूषण की मात्रा बढ़ती चली जाती है।

दूसरी तरफ पेड़ पौधों में उगने वाले फलों के बारे में भी पाया गया है कि इसके अंदर पैदा होने वाले हॉरमोन इथिलीन की प्रक्रिया भी इससे प्रभावित होती है, जिससे फलों का पकना प्रभावित हो जाता है।



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