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कमल फूल तो खूब खिला है पर भाजपा के फायदे में नहीं

  • इस बार की पैदावार से कृषकों में उम्मीद बढ़ी

  • कुछ खास प्रजातियों का सिर्फ निर्यात ही होता है

  • चुनाव अपनी जगह है लेकिन यह रोजगार का मुद्दा है

  • कमल की खेती करने वाले किसान पैदावार से गदगद

एस दासगुप्ता

कोलकाताः कमल फूल खिलने की बात होती है तो अभी लोग यही समझ लेते हैं कि

भाजपा के पक्ष में माहौल है। लेकिन अभी बंगाल के कुछ खास इलाको में जो कमल फूल

खिल रहा है वह भाजपा के नहीं किसानों की पैदावार का है। इस पैदावार की वजह से कमल

फूल की खेती करने वाले किसान प्रसन्न है। इसकी निरंतर बढ़ती मांग के बीच निर्यात भी

बढ़ने की वजह से किसानों को विदेशी मुद्रा की भी आमदनी होती है। इस बार का आकलन

है कि किसानों को कोरोना काल में जो घाटा हुआ है उसकी बहुत हद तक भरपाई इस बार

की उपज से हो जाएगी। नीचे के इलाकों मे बने छोटे बड़े तालाबों में इसकी खेती अब एक

लाभदायक कृषि कारोबार है। इससे जुड़े किसान इस बार फायदे की उम्मीद में हैं। कमल

फूल के उल्लेख से भाजपा का पलड़ा भारी समझने वालों को यह समझ लेना चाहिए कि

उस कमल फूल का क्या हश्र हुआ है, यह तो मतों की गिनती के दिन पता चल पायेगा।

लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा के कमल फूल को तृणमूल के जोड़ा फूल से

जोरदार टक्कर हर सीट पर मिल रही है। इन दोनों की टक्कर के बीच कुछ इलाकों में

कांग्रेस और माकपा गठबंधन भी मजबूती के साथ उभरा है क्योंकि दोनों के पास अपने

पुराने कैडर वोट रहे हैं।

कमल फूल की खेती इनदिनों मुनाफा दे सकता है

खैर इस कमल फूल की बात करें तो इनदिनों हावड़ा, बागनान, उलुबेड़िया कुलगाछिया

जैसे इलाको में तालाबों में यह फूल खिला हुआ है। पिछले कई सालों के मुकाबले इस बार

उनकी तादादत बहुत अधिक है। हरे पत्तियो के बीच इन फूलों के खिलने का दौर प्रारंभ हो

चुका है। मजेदार बात यह है कि इस कमल फूल की खेती से अधिकतर मुस्लिम कृषक जुड़े

हुए हैं। उन्हें कोरोना संकट के मिट जाने अथवा नियंत्रित हो जाने के बाद अगले दिनों में

आने वाले त्योहारों की बेसब्री से प्रतीक्षा है। पूर्वी मेदिनीपुर भी इसका बहुत बड़ा उत्पादक

क्षेत्र है। इसकी खोज खबर लेने के क्रम में पहली बार यह पता चला है कि इसकी कई

प्रजातियों की खेती सिर्फ विदेशों में निर्यात करने के लिए ही की जाती है। चुनाव में हिंदू

मुसलमान ध्रुवीकरण की चर्चाओं के बीच दोनों समुदायों के कमल फूल की खेती करने

वाले किसान यह मानते हैं कि चुनाव अपनी जगह पर है लेकिन यह तो उनके रोजगार से

जुड़ा हुआ मामला है। इसलिए जो एकता सदियों से चली आ रही है वह छोटी मोटी

राजनीति से बाधित नहीं होने जा रही है क्योंकि दोनों समुदायों का व्यापारिक हित इस

कमल फूल की खेती से एक दूसरे से जुड़ा हुआ है।

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