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बाबा विश्वनाथ बेड़ा पार करेंगे भाजपा का इस बार यूपी में ?




चुनावी चकल्लस

  • विकास कार्यों के समय को लेकर उठ रहे हैं सवाल

  • दो दिनों का काशी प्रवास है मोदी का

  • भाजपा छोड़ रहे हैं पार्टी के नेता

  • अखिलेश ने इस पर भी चुटकी ली

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः बाबा विश्वनाथ की शरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंच गये हैं। वैसे यह कोई गलत बात भी नहीं है क्योंकि वह बनारस के सांसद भी हैं। फिर भी गदौलिया चौक से लेकर मणिकर्णिका घाट तक के मुंहफट बनारसी यह कहने से नहीं चूकते कि मोदी जी को बाबा विश्वनाथ या अन्य धार्मिक प्रतीकों की याद सिर्फ चुनाव के मौके पर ही क्यों आती है। इधर दिल्ली के दरबारियों ने यह कहना प्रारंभ कर दिया है कि बाबा विश्वनाथ तो क्या अन्य सारे कार्यक्रमों के निपट जाने के बाद ही चुनाव आयोग उत्तरप्रदेश के लिए चुनाव की घोषणा करेगा क्योंकि आदर्श आचार संहिता लागू हो जाने के बाद श्री मोदी ऐसा नहीं कर सकते है। गनीमत है कि बाबा विश्वनाथ के दरबार में जाने से पहले मोदी जी ने किसान आंदोलन वाला झंझट निपटा लिया है वरना दिल्ली की सीमा पर एक साल से अधिक समय से बैठे बाबा के चेले पता नहीं और क्या गुल खिला देते। बनारस में श्री मोदी के प्रवास को लेकर सपा नेता अखिलेश यादव ने चुटकी कुछ ऐसी ली है कि भाजपा के लोग चिढ़ गये हैं। श्री मोदी के काशी प्रवास पर पूछे गये सवाल के उत्तर में अखिलेश यादव ने कहा है कि अंतिम समय में काशी प्रवास की पुरानी परंपरा है, यह ठीक भी है। यानी इशारों ही इशारों में बाबा विश्वनाथ के यहां पहुंचे श्री मोदी के चुनावी प्रयासों को इस बार सफलता नहीं मिलने की बात वह कह गये हैं।




बाबा विश्वनाथ के कार्यक्रमों से चुनावी शंखनाद भी

पूर्वांचल में भी एक्सप्रेस वे के उदघाटन सहित कई विकास कार्यों का उदघाटन और शिलान्यास करने के बाद भी पश्चिमी उत्तरप्रदेश की तरफ भाजपा के बड़े नेताओं का अधिक नहीं जाना, यह साबित करता है कि भाजपा अब तक किसानों के वर्चस्व वाले इन इलाकों में बाबा विश्वनाथ की कृपा होने के बाद भी जाने का साहस नहीं जुटा पा रही है। इसकी वजह किसान ही हैं, जो अपने अपने घरों की तरफ लौट चुके हैं। यूं तो किसान नेता राकेश टिकैत चुनावी अधिसूचना जारी होने के बाद फैसला लेने की बात कह रहे हैं लेकिन दूसरे लोगों के तेवर भाजपा की सेहत के लिए अच्छे तो कतई नजर नहीं आ रहे हैं। पूरे किसान आंदोलन के दौरान भाजपा और उनके कुछ खास चहेते चैनलों की धज्जी उड़ाने वाले हरेंद्र ताऊ को फिर से भाजपा के खिलाफ बोलते हुए साफ साफ सुना जा रहा है। इस अकेले व्यक्ति ने पूरे किसान आंदोलन के दौरान भाजपा के तमाम तर्कों और मोदी समर्थक मीडिया वालों की बैंड बजाकर रख दी थी। इसलिए बाबा विश्वनाथ के दरबार से मिली कृपा पश्चिमी उत्तरप्रदेश में श्री मोदी के कितने काम आयेगी, इस पर संदेह लाजिमी है। जिस तरीके से अपने अपने घरों की तरफ लौटते किसानों का फूल से स्वागत किया जा रहा है, उससे यह भी स्पष्ट है कि किसानों ने अपने आंदोलन से जीता के दिलों में जगह बनाने में कामयाबी पा ली है। लिहाजा अब गांव की जनता उनके तेवर के मुताबिक ही अपने मताधिकार का फैसला करेगी। इन इलाकों मे अब भी भाजपा की सक्रियता गति नही पकड़ पायी है।




पश्चिमी उत्तरप्रदेश में भाजपा अब भी सुस्त

कुल मिलाकर यह स्पष्ट होता जा रहा है कि उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव की असली लड़ाई को मोदी वनाम अखिलेश ही करने की तैयारी चल रही है। पहले इसे मोदी के बदले योगी आदित्यनाथ रखने की रणनीति थी। बाद में भाजपा के सेनापतियों को ऐसा लगा कि शायद योगी को आगे रखने से इस लड़ाई में नुकसान हो सकता है। इसलिए मूल सेनापति की भूमिका में खुद श्री मोदी ही आ गये हैं। फिर भी इशारों ही इशारों में जनता भी यह संदेश भाजपा तक देने में कामयाब हो रही है कि अखिलेश का चुनावी कद अब बढ़ रहा है। भाजपा के विधायकों के अब सपा में शामिल होने से भी इस बदलाव को महसूस किया जा सकता है। वैसे भी पश्चिमी उत्तरप्रदेश में सपा और आरएलडी के गठबंधन की वजह से उनकी सम्मिलित ताकत बढ़ी है। वैसे श्री मोदी उधर बाबा विश्वनाथ की शरण में हैं तो प्रदेश का यह इलाका चूंकि अमित शाह के जिम्मे है। इसलिए उसका असर भाजपा के आगामी लोकसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। इतना कुछ होने के बाद भी चुनावी सर्वेक्षण भाजपा की सरकार के बनने के संकेत दिये जा रहे हैं। वैसे इन सर्वेक्षणों का नतीजे दिल्ली और पश्चिम बंगाल में गलत साबित हुए हैं। लिहाजा बाबा विश्वनाथ अंततः अपने भक्त बने मोदी पर कितनी कृपा लुटायेंगे, यह तो चुनाव परिणाम ही साफ कर देगा।



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