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कोरोना और चीन के बीच टिड्डियों का हमला बढ़ा खतरा बरकरार

  • झारखंड की सीमा की आ सकता है यह विशाल झूंड

  • बनारस में रात भर चला मारने का अभियान

  • पाकिस्तान से राजस्थान होते हुए आये हैं

  • छह माह में बीस गुणा बढ़ती है आबादी

संवाददाता

रांचीः कोरोना और चीन के साथ उत्तरी सीमा पर चीन के साथ तनाव के बीच जिस खतरे

को हम नजर अंदाज कर रहे थे वह अब शीघ्र ही झारखंड के दरवाजे पर भी दस्तक दे

सकता है। जी हां यह टिड्डी संकट है। पाकिस्तान की सीमा से राजस्थान के अंदर प्रवेश

करने के बाद टिड्डियों का यह दल लगातार इधर उधर फैलता चला जा रहा है।

इस वीडियो फिल्म को ध्यान से देखकर समझिये

अब जानकारी मिल रही है कि बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में भी टिड्डियों का

हमला हो चुका है। वहां इस झूंड के पहुंचते ही उन्हें रात से ही मारने का अभियान भी चालू

हो गयी था। बनारस के पिंडरा और हरहुआ ब्लॉक के सात गावों में रात 10 से सुबह सात

बजे तक अधिकारियों की उपस्थिति में खेतों में दवा का छिड़काव किया गया। आठ से 10

बाइकों का दस्ता भी क्षेत्रों मंं दिनभर घूमकर टिड्डियों का मूवमेंट देख रहा है। इस

अभियान की देख रेख करने वाले अधिकारियों के अनुसार 40 फीसदी टिड्डियों को मारा

गया है। बची टिड्डियां हवा का रुख जौनपुर की ओर होने से उधर उड़ गई हैं। हवा के रुख

पर भी यह टिड्डी एक दिन में अस्सी मील तक का सफर तय कर लेती हैं। इसके पहले

राजस्थान और मध्यप्रदेश की खेतों को भी यह दल काफी नुकसान पहुंचाकर आगे बढ़ा है।

वैसे भारतीय विशेषज्ञों के मुताबिक खतरा सिर्फ इसलिए थोड़ा कम हुआ है क्योंकि

प्रतिकूल हवा क रुख की वजह से टिड्डियों का एक बड़ा दल वापस पाकिस्तान की तरफ

चला गया है।

कोरोना और चीन के तनाव के बीच खेती को खतरा

लेकिन बनारस तक आ पहुंची टिड्डी कभी भी अनुकूल हवा के आसरे गढ़वा के इलाके से

होते हुए झारखंड में भी दस्तक दे सकती हैं। याद रहे कि यह टिड्डी वजन में मात्र बीस

ग्राम का प्राणी होने के बाद भी अपने वजन के बराबर का भोजन हर रोज करता है। करोड़ों

की संख्या में होने की वजह से ही जिस इलाके में यह उतर जाते हैं, वहां की पूरी हरियाली

ही नष्ट हो जाती है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने पहले से ही चेतावनी दे रखी है कि सुदूर के

जंगलों में जहां टिड्डियों ने ठिकाना बना रखा है, उन्हें भी नष्ट किया जाना जरूरी है।

वरना अगले छह महीने के बाद टिड्डी अपनी ताकत को बीस गुणा अधिक बढ़ा लेती है।

वैसी स्थिति में अन्य इलाकों तक फैल जाने पर उन्हें रोक पाना मुश्किल हो जाएगा।


 

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