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पूर्वोत्तर भारत का सबसे विशाल रांची का महावीरी जुलूस चढ़ा लॉकडाउन की भेंट

  • घरों में कैद बच्चे, महिला, बुजुर्गों का संबल बना सहअस्तित्व की भावना
  • सड़कों पर निकलना कोरोना को दावत देने के बराबर
  • आम लोगों ने घरों में की महानवमी की पूजा-अर्चना

उदय चौहान

रांची : किसी शायर ने सच ही कहा है कि शहर की हवा हो गयी है कातिल, बेवजह घर से

निकलने की जरूरत क्या है। कोरोना के दहशत भरे इस दौर में शायर का यह कथन मौजूं

है। घरों से बाहर निकलने वालों के लिये कोरोना का खतरा बढ़ गया है। हिंदपीढ़ी इलाके से

एक विदेशी मूल की महिला का कोरोना पॉजिटीव पाये जाने के बाद रांची में खतरा बढ़

गया है। वहीं एक दूसरा केस हजारीबाग में भी मिला है जिसकी पुष्टि रिम्स प्रबंधन में

गुरुवार की शाम को की है जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन गया है। बता दें कि

तबलीगी जमात के संदिग्धों के कारण भी पूरे झारखंड में कोरोना अलर्ट है। ऐसे में, बेवजह

घरों से निकलना हर आम वो खास के लिये जोखिम भरा साबित हो रहा है। 22 मार्च से

जारी लॉक डाउन को शुरू में लोगों ने गंभीरता से नहीं लिया था। लेकिन, लॉक डाउन के 11

दिन बितने के बाद स्थिति भयावह दिखने लगी है। पूरी दुनियां की तरह झारखंड में भी

सार्वजनिक गैदरिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध है। सोशल डिस्टेसिंग के तहत दुकानों से

सामानों की खरीद-बिक्री हो रही है। विपदा की इस घड़ी में जरूरतमंदों के बीच भोजन व

अनाज बांटने वाले कर्मवीरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्य सरकार ने भी लॉक

डाउन का पालन करने व घरों में सुरक्षित रहने की अपील लगातार कर रही है। आम जनता

को कोरोना के खतरों से जागरूकता करने के लिये लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। सड़कों

पर निकल कर जान आफत में डालने से खुद को और अपने परिवार को बचायें। सरकार व

समाज के लोगों की भावना के विपरीत सड़कों पर निकलना कोरोना को दावत देने के

बराबर है। फिर भी लोग नहीं दें रहे सरकार के निर्देशों पर ध्यान और घूम रहे बाहर।

तपोवन मंदिर में इक्का-दुक्का ही पहुंचे श्रद्धालु, घरों में ही की गयी नवमी पूजा

रांची के प्रसिद्ध तपोवन मंदिर में रामनवमी के दिन भी कोरोना का खौफ साफ नजर

आया। अमूमन रामनवमी पर विशाल शोभायात्रा का गवाह बनने वाला तपोवन मंदिर

परिसर सुनसान रहा। इक्का-दुक्का श्रद्धालु ही महानवमी की पूजा के लिये निवारणपुर

स्थित तपोवन मंदिर पहुंचे थे। इस प्राचीन मंदिर की महत्ता इसी से लगाया जाता है कि

यहां आजादी से पहले से श्रीराम की आराधना की जाती है। रांची का महावीरी जुलूस को

पूर्वाेत्तर भारत के विशाल व भव्य माना जाता है। लॉक डाउन के बीच आम लोगों ने घरों में

ही महानवमी की पूजा-अर्चना कर सुरक्षित रहने का संदेश दिया। कोरोना के खतरों के बीच

लेकिन, इस बार कोरोना की भेंट चढ़ गया महावीरी जुलूस। इस दौर में महिला, बजुर्ग व

बच्चों के लिये सामाजिक सहअस्त्वि ही संबल बना है। विभिन्न संगठनों व

जनप्रतिनिधियों की पहल पर आम लोगों एवं जरूरतमंदों के बीच आवश्यक सामग्री का

वितरण सामाजिक ताने-बाने की मजबूती को ही बयां करता है जो जरूरी भी है।

कोरोना से जंग जीतने की भावना हो प्रबल

बाहर से झारखंड पहुंचने वाले डरे हुये हैं। वहीं, बाहरी व्यक्ति के शहर में पहुंचने से यहां के

लोग घबराये हुये हैं। लेकिन, सरकार लगातार आश्वस्त कर रही है कि किसी भी व्यक्ति

को डरने व घबराने की जरूरत नहीं है। कोरोना से लड़ने व इस जंग को जीतने के लिये

जरूरी है कि बाहर से आये लोगों को कोरेंटाइन में रहना होगा। सरकार ने अपील की है कि

लॉक डाउन के दौरान घरों में रहना ही सुरक्षित है। सरकार कोरोना को हराने के लिये हर

ऐहतियाती उपाय कर रही है। जनता के बीच कोरोना से जंग जीतने की भावना को प्रबल

बनाने की ही जरूरत है। प्रशासन को सहयोग कर आम जनता कोरोना को हराने में

महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। और नहीं तो ये जंजाल पूरे देश को ले डूबेगा।

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