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ललचायी आंखों और लपलपाती जीभ लगी है शराब दुकानों पर

  • सफेद घेराबंदी से नजर आया कि दुकानें खुलेंगी
  • दुकान के सामने से गुजरते हुए नजर आती है तैयारी
  • खुदरा कीमत पर कितना टैक्स इस पर चर्चा अब भी जारी
  • शराब से नकद पैसे के राजस्व की प्राप्त से होगी सीधी आमदनी
संवाददाता

रांचीः ललचायी आंखों से इन घेराबंदियों को देखने वालों की संख्या कोई कम नहीं है। शहर

की शराब दुकानों के बाहर से गुजरते पैदल यात्रियों की नजरों को पढ़ना भी कोई कठिन

नहीं है। सिर्फ आंखों से पढ़कर ही यह समझा जा सकता है कि उनकी जीभ भी लपालपा

रही हैं। दरअसल कोरोना वायरस की वजह से लॉक डाउन की वजह से शराब की दुकानों को

भी संक्रमण से बचने के लिए बंद किया गया था। इस दौरान चोरी छिपे शराब की बिक्री तो

होती रही। लेकिन इस अवैध कारोबार में नकली और जाली शराब का कारोबार भी खूब

पनपा। अब शराब के दुकानदारों को अपनी अपनी दुकान के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग के

लिए घेरा बनाने का आदेश आते ही दुकानदारों ने इसकी औपचारिकता को पूरा कर लिया

हैं। दुकानें अब भी बंद हैं लेकिन वहां से गुजरते शौकीन अपनी आंखों से अपनी चाहत बयां

कर रहे हैं। ऐसे चेहरों को अब पढ़ पाना आसान है। लोगों के बीच इन दुकानों से होने वाली

बिक्री के तौर तरीकों पर भी चर्चा होने लगी है। टोकन पहले जारी होने के बाद शराब की

बिक्री और इन दुकानों के खुले रहने की समय सीमा के बारे में उनलोगों को ज्यादा

जानकारी है जो शायद दुकान खुलते ही सबसे पहले कतारों में खड़े नजर आयेंगे। कुछ

लोगों का मानना है कि पहले कुछ दिनों तक यहां की हालत भी दिल्ली में लगी लंबी लाइनों

के जैसी ही होगी। लेकिन दूसरी तरफ कुछ अनुभवी मान रहे हैं कि इतने दिनों के लॉक

डाउन और संक्रमण का हाल देखकर अनेक लोग अभी भीड़ में जाने से परहेज करेंगे।

ललचायी आंखों के बाद भी संक्रमण का भय भी है

इस बीच शराब की कीमतों में कितना कोरोना टैक्स जुड़ेगा, इस पर भी चर्चा का बाजार

गर्म है। कुछ लोगों के मुताबिक सरकार इस पर तीस प्रतिशत अधिक टैक्स लेने जा रही है

जबकि कुछ लोगों की जानकारी के मुताबिक पहले यह तीस प्रतिशत का प्रस्ताव था, जिसे

अब बढ़ाकर 45 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके बाद भी नकद के कारोबार में क्रेताओं को

इससे कोई तकलीफ नहीं होने जा रही है। लेकिन सभी इस बात पर सहमत हैं कि सरकार

के राजस्व में शराब के नकद के कारोबार का क्या योगदान है, यह भी कोरोना की वजह

पहली बार समझ में आया है। वरना इससे पहले तक सरकार कोई भी हो, वह शराबियों से

मिलने वाली धनराशि के प्रति इतना लालायित कभी नजर नहीं आया था। अब कोरोना से

इस पर्दे को भी समाप्त कर दिया है क्योंकि सरकार के पास कमाई का कोई दूसरा जरिया

भी फिलहाल नहीं बचा है। जानकार मानते हैं कि चूंकि यह नकद का कारोबार है, इसलिए

इसके चालू होते ही सरकार के खजाने में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा। यह देखने लायक बात

होगी कि पहले सप्ताह में सरकार को शराब के कितने राजस्व की प्राप्ति होती है।


 

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