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कोरोना की लड़ाई में शहीद हुए आईजी विनोद कुमार को याद कर लें

  • अधिकारियों की एक लॉबी की प्रताड़ना भी झेलते रहे थे

  • 18 अक्टूबर 2020 को उनकी पटना में मौत हुई थी

  • भागलपुर में भी पदस्थापित रहे थे विनोद कुमार

  • विभागीय राजनीति में भी उपेक्षा के शिकार बने

दीपक नौरंगी

भागलपुरः कोरोना की लड़ाई में जान गंवाने वाले बिहार के पुलिस अधिकारी विनोद कुमार

को भूला देना आसान नहीं होगा। अपने व्यवहार और मृदुभाषी इस अधिकारी को अपनी

पदस्थापना के अंतिम दिनों में कई किस्म का विभागीय अपमान भी झेलना पड़ा था। 16

अक्टूबर को गंभीर रुप से बीमार होने के बाद उन्हें पटना के एम्स में भर्ती कराया गया था।

जहां 18 को उनकी मौत हो गयी। साल की अंतिम रात भागलपुर में उनकी भी याद आयी।

इसकी पूरी वीडियो रिपोर्ट यहां देखें

बताते चलें कि पहले भागलपुर में आईजी का पद हुआ करता था। बाद में सरकार के एक

आदेश से यहां आईजी का पद समाप्त कर इसे डीआईजी का कार्यक्षेत्र बना दिया गया।

वर्तमान में आईजी कार्यालय का पुराना और टूट चुका साइनबोर्ड भी कहीं न कहीं उस

अधिकारी की याद दिलाता है, जो यहां पदस्थापित होने के दौरान अपने मृदुभाषी होने की

वजह से सबके दिलों में स्थान बनाने में कामयाब रहा। भागलपुर से स्थानांतरित होकर

पूर्णिया जाने के बाद भी उनसे एक पत्रकार के तौर पर संपर्क बना रहा और वह समाचार के

सिलसिले में सहज उपलब्ध अधिकारियों में से एक माने जाते रहे।

पूर्णिया में पदस्थापित होने के दौरान ही एक अत्यंत विवादास्पद मामले की जांच के क्रम

में वह कई अधिकारियों की नजर में खटक गये थे। उन्होंने कहा था कि वह ऐसे पचड़ों में

पड़ना नहीं चाहते हैं लेकिन सीआईडी और डीजीपी मुख्यालय से निर्देश प्राप्त होने की

वजह से उन्हें इसकी जांच करनी पड़ी थी। जांच के दौरान उन्होंने पाया था कि वहां के

एसपी द्वारा उस मामले में भारी गड़बड़ी की गयी थी।

कोरोना की लड़ाई में जान गंवाने के पहले रिपोर्ट चर्चा में थी

उनका एसपी के खिलाफ रिपोर्ट देना ही अधिकारियों की एक प्रभावशाली लॉबी को नाराज

कर गया था। बता दें कि बिहार पुलिस सेवा में डीएसपी के तौर पर सेवा में आने के बाद

अपनी कुशलता की वजह से वह प्रोन्नत होकर पहले आईपीएस बने और आईजी के पद

तक जा पहुंचे थे। मूल रुप से नालंदा जिला के रहने वाले विनोद कुमार का मामला इसलिए

भी अब तक चर्चा में बना हुआ है क्योंकि यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी सवालों के

घेरे में खड़ा करता है। बिहार का एक बहुत बड़ा वर्ग आज भी दिवंगत आईजी विनोद कुमार

की प्रताड़ना के मामले में दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है, उस पर नजर बनाये

हुए हैं। बिहार का जातिगत समीकरण भी इस पर नजर गड़ाये हुए है।

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3 Comments

  1. […] कोरोना की लड़ाई में शहीद हुए आईजी विनो… अधिकारियों की एक लॉबी की प्रताड़ना भी झेलते रहे थे 18 अक्टूबर 2020 को उनकी पटना … […]

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