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नोटबंदी के पांच साल पूरे होने के बाद क्या हुआ है उस पर विचार करें




  • मोदी ने क्या कहा था और मनमोहन ने क्या चेतावनी दी थी
  • मनमोहन ने कहा कि 90 फीसद मजदूर कष्ट में होंगे
  • मनमोहन ने कहा था काला धन नहीं आयेगा
  • मोदी ने कहा था हरेक को लाभ होगा
  • मोदी ने कहा था काला धन आयेगा
राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः नोटबंदी के पांच साल पूरे हो चुके हैं। जिन्हें याद नहीं हैं उन्हें बता दें कि गत आठ नवंबर 2016 की रात आठ बजे राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का एलान किया था।




उस वक्त उन्होंने देश की जनता को यह भरोसा दिलाया था कि यह फैसला थोड़ा कष्टकारी होने के बाद भी आम भारतीयों का जीवन बदल देगा।

उस भाषण के बाद पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने इसे बेहद खतरनाक और देश के लिए नुकसानदायक फैसला बताया था।

अब नोटबंद के पांच साल बीत चुके हैं इसलिए दोनों ने क्या कुछ कहा था और अब देश क्या कुछ महसूस कर रहा है, इस पर विचार करना समय की मांग है।

उस वक्त श्री मोदी ने कहा था कि इस फैसला का असली मकसद सबका साथ सबका विकास है। यह देश और देश की सरकार गरीबों के प्रति समर्पित है।

हम सभी चाहते हैं कि देश की तरक्की हो। देश के विकास के रास्ते में काला धन और भ्रष्टाचार एक बाधा है। काला धन और भ्रष्टाचार रोकने के लिए पहले भी कई उपाय किये गये हैं।

कड़े कानूनों की वजह से सरकार को सवा लाख करोड़ का काला धन प्राप्त हो सका है। देश का हर ईमानदार नागरिक यह चाहता है कि भ्रष्टाचार खत्म हो और कालाधन भी समाप्त हो।

भ्रष्टाचार का यह धन लोगों के पास पांच सौ और एक हजार के नोट में ही मौजूद है। इसी लिए सरकार इसी क्षण से पांच सौ और एक हजार रुपय के नोटों का प्रचलन बंद करने जा रहा है।

इसके बाद लोगों को इन नोटों को बदलने का मौका दिया जाएगा लेकिन उन्हें एक खास सीमा के ऊपर के नोट बदलने के लिए यह प्रमाणित करना होगा कि यह नोट उनकी ईमानदारी की कमाई के हैं।

नोटबंदी के परिणाम क्या रहे हैं यह सबके सामने है

नोटबंदी के जरिए सिर्फ कालाधन ही नहीं बंद होगा बल्कि इसके माध्यम से होने वाले हवाला कारोबार और हथियारों की तस्करी के जरिए बढ़ रहे आतंकवाद पर भी रोक लगेगी।

इससे आम आदमी का हाथ मजबूत होगा और काला धन मूल प्रवाह में आने से देश की अर्थनीति और मजबूत होगी।

इसमें आम नागरिकों को थोड़ी कठिनाई हो सकती है लेकिन देश की भलाई के लिए यह कष्ट उठाना गलत नहीं होगा।




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले के कुछ दिनों बाद पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने इसे बहुत बड़ी गलती करार देते हुए कहा था कि यह दरअसल संगठित भ्रष्टाचार का एक जीता जागता नमूना है।

उन्होंने राज्यसभा में कहा था कि इससे जो कठिनाइयां पैदा हुई हैं उसका असर बहुत लंबे समय तक रहेगा।

डॉ सिंह ने कहा था कि वर्तमान प्रधानमंत्री ने देश को जो बातें बतायी हैं, उसका सभी समर्थन करते हैं लेकिन उसका वास्तव में कोई सार्थक परिणाम आयेगा, इसकी कोई उम्मीद नहीं है।

प्रधानमंत्री ने देश की जनता से पचास दिन का कष्ट उठाने की बात कही थी। इस बीच करीब पैसठ लोगों की जान चली गयी।

अब देखना होगा कि देश की जनता के मन में वित्तीय संस्थानों के बारे में जो भय डाल दिया गया है, उसका आखिर क्या असर होगा।

आम आदमी अब बैंक में पैसा रखने से डरने लगेगा क्योंकि उसे यह भय सताता रहेगा कि कभी भी यह कहा जा सकता है कि वह अपना पैसा भी बैंक से नहीं निकाल सकता है।

डॉ सिंह ने कई उद्योगों को होने वाले नुकसान की बात कही थी

डॉ सिंह ने कहा कि इस नोटबंदी के फैसले से देश का कृषि उद्योग मार खायेगा। साथ ही छोटे और अनौपचारिक उद्योग में काम करने वाले भी इसकी चपेट मे आयेंगे।

यानी देश का 90 प्रतिशत मजदूर इसकी चपेट मे आयेगा। दरअसल यह एक संगठित लूट का तरीका है।

जिसकी कीमत पूरे देश को चुकाना पड़ेगा क्योंकि ऐसे तरीकों से काला धन वापस नही आ सकता है। दूसरी तरफ इसकी वजह से देश में जो आर्थिक अस्थिरता आयेगा उसको संभालने में दशकों लग जाएंगे।

क्योंकि छोटे कारोबार और कृषि का आर्थिक ढांचा बिगड़ने के बाद उन्हें दोबारा रातों रात नहीं सुधारा जा सकता है।

वर्तमान में इनका जो ढांचा था वह वर्षों नहीं बल्कि सैकड़ो वर्षों की मेहनत का फल था, जिसे एक फैसले से ध्वस्त कर दिया गया है। इसलिए आगे जो कुछ भी नुकसान होगा, उसकी जिम्मेदारी भी प्रधानमंत्री को लेनी पड़ेगी।



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