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हम अपने आप से ही अब सवाल कर लें

हम अपने आप से सवाल करें। हमने कोरोना संकट के बाद

बड़ी बेसब्री से इस बात का इंतजार किया है कि यह साल

किसी तरह बीत जाए। मुझे नहीं पता कि कैसे यह सोच

हमारे अंदर पनपती चली गयी है कि मानों 31 दिसंबर के

रात के बारह बजे की सूई आगे खिसकेगी और सब कुछ ठीक हो जाएगा। किसी भ्रम अथवा

सपनों की दुनिया में मत रहियेगा कि घड़ी का कांटा आगे बढ़ा और कोरोना वायरस वर्ष

2020 की तरह खुद ब खुद गायब हो जाएगा। साल का बदलना सिर्फ अंकों के आगे बढ़ने

का प्राकृतिक क्रम है। साल का अंतिम अंक यानी शून्य अगर बढ़कर एक में तब्दील हो

जाए तो इससे खतरा कतई कम नहीं होने जा रहा है। किसी भ्रम में मत रहिए।

संपूर्ण मानव जाति अभी एक जैविक आतंकवादी से लंबी लड़ाई में उतर चुकी है। इस

जैविक आतंकवादी को ही हम सार्स कोव 2 कहते हैं। बेझिझक मान लें कि वैक्सिन का

काम एक वार्षिक कार्यक्रम बनने जा रहा है और इसकी बदौलत कुछ लोग काफी अमीर

बनने वाले हैं।

लिहाजा उम्मीद करें कि यह नया साल हमें और अधिक समझदार बनायें , हमे बेहतर

जानकारी उपलब्ध कराये और हमें वह चिकित्सा पद्धति दें, जिसकी बदौलत हर इंसान इस

अद्भूत मानव जीवन का आनंद उठा सके। हमेशा ही हर घने काले बादलों के बीच रोशनी की

एक सरल रेखा अवश्य दिखती है। अब भी असलियत यही है कि अनेक लोग ऐसे हैं, जिन्हें

यह उम्मीद है कि कोई दूसरा उनकी मदद कर देगा। मैं अपने दायरे में यह कर पाया हूं,

इसका मुझे संतोष है।

हम अपने अपने दायरे में भी सक्रिय रहे तो बड़ी बात है

एक परिवार के तीन लोग तीन अलग अलग अस्पतालों में भर्ती हुए थे क्योंकि एक

अस्पताल में तीनों के लिए बेड उपलब्ध नहीं था। यह बताना भी जरूरी है कि यह एक

गरीब परिवार था। हर दिन तीनों अस्पताल के लोगों से बात कर इस परिवार के मरीजों के

बारे में जानकारी लेना भी उनदिनों मेरी डियूटी रही। अस्पतालों से जानकारी लेने के बाद

उस परिवार के अन्य रिश्तेदारों को उसकी जानकारी उपलब्ध कराने की यह जिम्मेदारी ने

मुझे काफी संतोष प्रदान किया है।

जब कोरोना संकट प्रकट हुआ तो एक डाक्टर होने की वजह से मैं इसके खतरे को जानता

था। इसलिए मैंने मरीजों के सीधे संपर्क में जाने से खुद को रोके रखा। दरअसल मैं अपने

ही परिवार के अंदर उन सवालिया चेहरों को पढ़ पा रहा था जो बिना कुछ कहें भी बहुत कुछ

कह रहे थे। मेरी उम्र सत्तर साल और कई किस्म के कारणों की वजह से उनकी चिंता भी

जायज थी

वह वक्त ऐसा था जब इस बीमारी से मरने वाले महज एक नाम बनकर थे। लेकिन ऐसा

हुआ। मेरे एक परिचित परिवार के दस लोग कोरोना से पीड़ित हो गये। मेरे दोस्त की पत्नी

और उनके छोटे भाई को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। शेष लोगों का ईलाज उनके घर पर

मैंने ही किया। अस्पताल में भर्ती महिला की मौत अगस्त में हुई। उनके छोटे भाई को

अस्पताल से रिहा कर दिया गया है लेकिन अब भी उन्हें कृत्रिम ऑक्सीजन की जरूरत

पड़ती है। मैरे दिमाग में एक बात तो स्पष्ट हो ग‌ई कि इस कठिन समय में मुझसे क्या

अपेक्षित था। और मुझे प्रसन्नता है कि मैं अपनी जिम्मेदारी भली भांति निभा सकता।

देश के विभिन्न इलाकों में पदस्थापित मेरे मित्रों के बीच मैं उनके लिए पूरी दुनिया में

अकेला डाक्टर था।

दुनिया भर के दोस्तों केलिए उस वक्त मैं अकेला डाक्टर था

हमें आगे भी इस बात को गांठ बांधकर रखना होगा कि जब तक किसी एक पर भी संकट है

तो यह हरेक के लिए संकट ही है। इसलिए मित्रों हम एक दूसरे की मदद के संकल्प के साथ

यह नया साल प्रारंभ करें। किसी के चेहरे पर एक मुस्कुराहट ही असली सफलता है। वर्ष

2020 हमें यह सबक सीखा गया है। मैं अपने परिवार और मित्रों के साथ साथ सभी को

सुरक्षित और शांतिपूर्ण वर्ष 2021 की शुभकामनाएं देता हूं।

अर्ज किया है

खूब खुश रहो, मस्त रहो।

घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो ये कर लें

किसी रोते हुए आदम को हंसाया जाये।

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