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पीपी तटबंध के शून्य से 8 किमी तक है 145 स्थानों पर हुआ रिसाव

पिपरासी, बगहाः पीपी तटबंध में क्या कुछ काम हुआ है, उसका खुलासा निरीक्षण में हो

गया है। पिपरा-पिपरासी (पीपी) तटबंध के शून्य किमी से 8 किमी के बीच 145 स्थानों पर

इस बार रिसाव हो रहा है। इससे संबंधित विभाग की उदाशीनता व लापरवाही सामने आ

रही है। कारण की बरसात बाद बंधे की मरम्मति व देख रेख इस लिया होता है कि बरसात

के दौरान बंधे पर कोई खतरा न रहे, लेकिन पीपी तटबंध पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च होने

के बावजूद भी खतरा बना रहता वही इसका फायदा उठा खतरा की समाप्ति के नाम पर

दुबारा दूसरे वर्ष भी विभागीय मिली भगत से टेंडर निकाला जाता है फिर भी सुधार नही

होता है। विभागीय जानकारों की माने तो अक्सर बंधे पर खतरा रैट होल व पानी के रिसाव

के कारण ही होता है। इसी लिए बाढ़ पूर्व तैयारी के दौरान मरम्मत व नए बिंदुओं पर कार्य

कराने के साथ ही अधिकारी लगातार इन होल को चिन्हित करने व बन्द करने के लिए

निरीक्षण करते है। लेकिन इस बंधे पर केवल निरीक्षण में ही जिम्मेदार रह जाते है लेकिन

निदान पर ध्यान नही देते है। नतीजन खतरा हमेशा बना ही रहता है। वर्तमान में पीपी

तटबंध के केवन शून्य से आठ किमी की दूरी के अंदर ही 145 स्थानों पर रिसाव हो रहा है।

इन रिसाव को रोकने के लिए विभाग के तरफ के कार्य भी कराए गए है लेकिन वह भी

केवल खानापूर्ति ही हुई है। कारण की अभी भी जिस स्थान पर रिसाव को बंद करने के

लिए कार्य कराए गए है उस स्थान पर दर्जनों जगह रिसाव हो रहा है। शुक्र है कि गंडक नदी

के जलस्तर में कमी हो जाने के कारण बंधे से खतरा हट गया है वरना बहुत बड़ी समस्या

हो जाती।

पीपी तटबंध का काम काज यूपी के पड़रौना से संचालित होता है

तटबंध के किनारे बसे ग्रामीणों ने बताया कि सिचाई विभाग में कर्मियों की नौकरी बारहों

माह होती है लेकिन ये केवल बरसात में ही दिखते है। इसका मुख्य कारण यह है कि

सिचाई विभाग का कार्यालय यूपी के कुशीनगर जिले के पड़रौना में संचालित होता है।

सबसे बड़ी चौकाने वाली बात यह है कि बिहार सरकार ने खुद यूपी में जमीन खरीद कर

करोड़ो की लागत से भवन का निर्माण कराया है। इस लिए संबंधित विभाग के कर्मी यूपी

में ही रहते है। ग्रामीणों ने बताया कि सबसे पहले सरकार को कार्यालय हस्तांतरित करके

बंधे पर निर्माण हुए भवनों में शिप्ट कर देना चाहिए।

मानक से कम भरा गया सेंट

बाढ़ पूर्व तैयारी के रूप में पीपी तटबंध के शून्य से आठ किमी की दूरी में बरसात के दौरान

मरम्मत के लिए 14 हजार बालू भरी बोरियों का स्टॉक किया था। इसमें अभी बरसात पूरा

बाकी है लेकिन 7044 बोरियों को मरम्मत के नाम पर प्रयोग कर दिया गया है। इसमें

सबसे बड़ी अनियमितता तो यह है कि इन बोरियों की सिलाई मशीन के स्थान पर हाथ से

किया गया है साथ ही इन बोरियों में मानक से कम बालू की भराई की गई है। वही

अधिकांश बोरियों में बालू के स्थान पर मिट्टी की भराई कर दी गई है। इसमें विभागीय

मिलीभगत से संवेदक मनमानी कर रहे है।

कर्मियों की कमी के कारण बचाव कार्य मे हो रही परेशानी

पिपरासी प्रखंड स्थित तटबंध की सुरक्षा व्यवस्था की देख रेख करने के लिए दो एसडीओ

व चार जेई की आवश्यकता है लेकिन पिपरासी में इस समय एक भी अभियंता की

नियुक्ति नही है, सभी पद खाली पड़े हुए है केवल बरसात के लिए मधुबनी क्षेत्र से एक

एसडीओ व एक जेई की प्रतिनियुक्ति कर दी गई। इससे भी सरकार की उदाशीनता

परिलक्षित होती है।

अप्रशिक्षित करेंगे कटाव की मापी

विभाग के तरफ से तटबंध की सुरक्षा में पूर्व में होम गार्ड जवानों को लगाया जाता था

लेकिन इस बार स्थानीय ग्रामीण को लगाया जा रहा है। वही इन ग्रामीणों से वे कार्य लिए

जाएंगे जो एक अभियंता को करना चाहिए। एसडीओ गौतम कुमार ने बताया कि बंधे से

नदी की दूरी प्रत्येक रोज हर एक किमी पर मापी करनी है और इसमें होने वाले परिवर्तनों

की जानकारी देनी है। वही रैट होल, असामाजिक तत्वों द्वारा बंधे को नुकसान पहुचाने

आदि की जानकारी भी देनी है।

बाढ़ संघर्षरात्मक बल के अध्यक्ष ने किया निरीक्षण

बाढ़ संघर्षरात्मक बल के अध्यक्ष मो अब्दुल हमीद ने पीपी तटबंध के शून्य प्वाइट से 35

किमी तक का निरीक्षण सोमवार को किया। निरीक्षण के संबंध में उन्होंने बताया कि नदी

में आये बाढ़ से बंधे पर किस किस स्थान पर कितना दबाव हुआ है और उससे क्या क्षति

हो सकती है उसको चिन्हित किया गया है। वही उपस्थित अभियंताओं को मरम्मत कराने

का निर्देश दिया गया है। मौके पर कार्यपालक अभियंता महेश्वर शर्मा, प्रमुख यशवंत

नारायण यादव, जेई व अन्य उपस्थित थे।

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