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नेताओं की अजीब सलाह सुनकर हैरान हो रहे हैं पर्यावरण वैज्ञानिक




सुझाव दिया कि ज्वालामुखी के ऊपर बम गिरा दें
छह सौ मीटर तक ऊंची आग की लपटों को देखा गया
लोगों और आबादी को बचाने के लिए दिया गया सुझाव
अमेरिकी सेना ने भी 1935 में ऐसा ही प्रयोग किया था

ला पाल्माः नेताओं के सुझाव से ला पाल्मा में लगातार काम कर रहे पर्यावरण वैज्ञानिक हैरान है। इन नेताओं का सुझाव है कि गत 38 दिनों से जारी ज्वालामुखी विस्फोट को समाप्त करने के लिए ऊपर से ज्वालामुखी पर बम गिरा दिये जाएं।




पड़ोसी द्वीप के एक नेता के बयान के बाद कई अन्य नेताओं की सलाह सार्वजनिक हुई है। यह सुझाव लावा प्रवाह को दूसरी तरफ मोड़कर आम नागरिकों और आबादी को बचाने के लिहाज से दी गयी है।

इस बीच कुंबरे वियेजा ज्वालामुखी से छह सौ मीटर ऊंची आग की लपटों को देखकर भी वैज्ञानिक आश्चर्यचकित हो गये हैं। हाल के दिनों में इतने लंबे समय तक ज्वालामुखी का विस्फोट जारी नहीं देखा गया है। वैसे नेताओं के सुझाव को लोगों का भी समर्थन थोड़ा थोड़ा हासिल है।

दरअसल लावा प्रवाह की वजह से नये नये इलाकों से लोगों को हटाना पड़ रहा है। ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा अब रास्ता बनाकर सीधे समुद्र तक पहुंच रहा है।

वहां समुद्री जल से ठंडा होने की वजह से समुद्री तट पर नये इलाके का निर्माण भी होता जा रहा है। नेताओं के सुझाव में यह कहा गया है कि लावा प्रवाह की दिशा दूसरी तरफ मोड़ देने के लिए भी बम गिराये जा सकते हैं।

इससे कमसे कम उन आबादी वाले इलाकों को बचाया जा सकेगा, जो अब आगे के दिनों में ज्वालामुखी लावा के प्रवाह के रास्ते में आ सकते हैं। गत 19 सितंबर से ज्वालामुखी विस्फोट प्रारंभ होने के बाद से अब तक करीब सात हजार लोगों को अपने अपने घरों से हटाया जा सका है।




नेताओँ के सुझाव से भूकंप पर असर की चर्चा

लावा के रास्ते में आने वाले अनेक घर ध्वस्त हो चुके हैं जबकि वहां की खेती का मूल आधार केली के खेती भी जलकर राख हो चुकी है। अक्सर ही वहां के हवाई अड्डे को भी राख और धुआं की वजह से बंद करना पड़ रहा है।

इस बीच ज्वालामुखी पहाड़ का एक हिस्सा ढह जाने की वजह से नये इलाकों में लावा का प्रवाह होने लगा है। पता चला है कि अब नेताओं के सुझाव के बाद पड़ोसी द्वीप ला गोमेरा की नगर परिषद ने भी प्रस्ताव पारित कर वहां बम गिराने के प्रस्ताव का समर्थन किया है।

इसका मकसद लावा के प्रवाह को दूसरी तरफ मोड़कर समुद्र तक ले जाना है। ऐसे सुझाव तब दिये जा रहे हैं जबकि इस द्वीप पर भूकंप के झटके लगातार महसूस किये जा रहे है।

कई अवसरों पर लावा का प्रवाह इतना तेज हो रहा है कि उसे लावा सूनामी की संज्ञा दी गयी है। वैसे ज्वालामुखी पर बम गिराने का प्रयोग पहले भई अमेरिकी सेना द्वारा किया गया है।

वर्ष 1935 में अमेरिकी सेना ने हवाई द्वीप के माउना लोवा ज्वालामुखी के प्रवाह से नजदीकी शहर हिलो को बचाने के लिए ऐसा किया था।

लेकिन पर्यावरण वैज्ञानिक मान रहे हैं कि जमीन के नीचे से आ रहे भूकंप के झटकों के बीच ऊपर से बम गिराकर बड़ा धमाका करने के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।



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