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सात सप्ताह बाद अब लावा प्रवाह के सुरंग बन गये हैं




कुंबरे वियेजा में अब भी आग उगल रही ज्वालामुखी
सत्तर मिलियन यूरो की सहायता देगी स्पेन सरकार
लगातार आ रहे हैं भूकंप और खतरा अब भी बरकरार
द्वीप के पूरे इलाके में राख की मोटी पर्त जम गयी है

ला पाल्माः सात सप्ताह बाद भी ज्वालामुखी के शांत होने का कोई साफ लक्षण नहीं दिख रहा है। इस बीच लावा की वजह से वहां के करीब 26 सौ मकानों का नुकसान पहुंचा है।




वीडियो में देखिये कैसे अंदर के सुरंग से बह रहा है लावा

साथ ही लोगों को अन्यत्र हटाने तथा केला की खेती को जबर्दस्त नुकसान होने की वजह से स्पेन की सरकार न वहां के लिए सत्तर मिलियन यूरो के राहत का काम प्रारंभ कर दिया है।

अच्छी बात यह है कि जीवित ज्वालामुखी को देखने अपने विदेशी पर्यटक भी वहां पहुंच रहे हैं। इससे पर्यटन उद्योग की वजह से ला पाल्मा द्वीप को आर्थिक संबल मिल रहा है।

इस ज्वालामुखी और लावा प्रवाह पर लगातार नजर रखने वाले वैज्ञानिकों ने पाया है कि लगातार लावा बहने की वजह से कई इलाकों में इसके सुरंग बन गये हैं।

दरअसल ऊपर का लावा जमकर ठोस होने के बाद भी उसके अंदर से लावा प्रवाह होते हुए देखा जा रहा है।

इसके बीच पिछले सात सप्ताह में वहां करीब 35 हजार भूकंप के झटके आये हैं, जो किसी भी समय बड़े खतरे का संकेत भी साबित हो सकता है।

सात सप्ताह में 35 हजार से अधिक भूकंप के झटके

This aerial view shows debris engulfing buildings in Bushara village, Nyiragongo area, near Goma, on May 23, 2021, after a volcanic eruption of Mount Nyiragongo, that sent thousands fleeing during the night in eastern Democratic Republic of Congo. – A river of boiling lava from the eruption of Mount Nyiragongo has came to a halt outside Goma, sparing the city in the east of the Democratic Republic of Congo, the military governor of the region said on May 23, 2021. Five people were killed in related accidents. (Photo by Justin KATUMWA / AFP) (Photo by JUSTIN KATUMWA/AFP via Getty Images)

कुंबरे वियेजा ज्वालामुखी से निकलने वाली धुआं और राख ने कई बार विमान सेवा को बाधित किया है।

यह समझा जा रहा है कि समुद्र तक लावा के पहुंचने की वजह से जो जहरीली गैस बन रही है, उससे यहां के हवा की गुणवत्ता को भी दूषित कर दिया है।

दूसरी तरफ लगातार राख गिरने से औसतन बीस सेंटीमीटर राख की पर्त जम गयी है। यह राख भी आम राख की तरह नहीं होता और कहीं गिरने के बाद अपनी रासायनिक संरचना की वजह से जमकर ठोस हो जाता है।

मकान की छतों पर भी राख की पर्त मोटी होने की वजह से उन छतों के टूटने का नया खतरा भी मंडरा रहा है।




वहां के स्थानीय निवासी सुरक्षित स्थानों से अपने घर और पूरी संपत्ति को धीरे धीरे लावा की वजह से तबाह होते देख चुके हैं। इसमें अनेक लोगों के केले की खेती का बहुत बड़ा इलाका पूरी तरह तबाह हो चुका है।

वहां के एक स्थानीय निवासी एंटोनियो अलवारेज पूरे घटनाक्रम को याद करते हुए सिहर जाते हैं। उन्होंने बताया कि ज्वालामुखी विस्फोट के बाद जब लावा बहना प्रारंभ हुआ तो वे लोग सुरक्षित इलाकों में चले आये। यहां से उनके अपने मकान को वे देख सकते थे।

उन्होंने देखा कि लावा की चपेट में सबसे पहले उनका अपना घर आया। उसके बाद उसके बाद उनकी दुकानें लावा में जलकर रखा होने क बाद उसमें दफन हो गयी।

वह कहते हैं कि उनके पिता शुरु से ही यह कहा करते थे कि बड़ा घर मत बनाओ क्योंकि वह पैसा नहीं पैदा करता। पैसा लगाना है तो केले की खेती में लगाओ जो पैसा देता है।

केला की खेती को हुआ है जबर्दस्त नुकसान

सुरक्षित स्थान से वह इस केला की खेती को भी नष्ट होते हुए देखते रहे। अलबारेज जैसे हजारों किसान हैं, जिनकी केले की खेती पूरी तरह तबाह हो चुकी है।

लोगों के मानना है कि लावा के जमकर ठोस हो जाने के बाद वहां अब खेती करना भी संभव नहीं रह गया है।

एक सामान्य अनुमान के मुताबिक इस ज्वालामुखी विस्फोट से ला पाल्मा द्वीप के केला की खेती को करीब एक सौ मिलियन यूरो का नुकसान अब तक हो चुका है।

पिघले हुए लावा की पर्त करीब 390 एकड़ जमीन पर है जबकि करीब सात सौ एकड़ जमीन चारों तरफ से लावा के जमे हुए हिस्से से घिरी हुई है। वहां पहुंचना भी अभी संभव नहीं है।

केला की खेती क साथ ही उसके निर्यात का उद्योग भी बंद हो चुका है। पहले इस केला को पैक कर अन्यत्र भेजने का कारोबार भी यहां था। यह सब खत्म हो चुका है।

अटलांटिक समुद्र तक पहुंच रहा लावा नये नये इलाकों में भी फैल रहा है। वैसे इसी लावा प्रवाह की वजह स महासागर में नई जमीन पैदा हो रही है।

यह जमीन नहीं है बल्कि लावा के पानी से संपर्क में आने की वजह से ठोस हुआ सतह भर है।



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