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यूंही तुम मुझसे बात करते हो.. .. ..

यूंही तुम मुझसे बात करते हो तो वाकई सब कुछ फिर से ग्रीन ग्रीन दिखने लगता है। 

वरना कोरोना ने तो सब कुछ बेरंग कर रखा है। लेकिन फिलहाल तो मॉनसून लौट जाने के

बाद सिर्फ वादों की बारिश हो रही है। दस लाख सरकारी नौकरी सबसे हॉट मुद्दा है। पता

नहीं यह भी खाते में पंद्रह लाख आने जैसा न हो जाए। लेकिन इतना तय है कि तेजस्वी

बाबू ने बड़ी कमजोर नब्ज पर हाथ धर दिया है। दूसरी तरफ चिराग जल रहा है और इस

जलने से किसे फायदा और किसे नुकसान हो रहा है, यह देखने वाली बात रहेगी। खैर

बिहार में एक राउंड का दंगल तो हो चुका है और इस राउंड की बाजी से बाकी का मैदान

कैसा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। किसी झांसे में मत रहिये कि सर्वेक्षण

क्या कह रहा है। एक कहावत है ना कि दूसरे के कहे पर मत जाओ अपनी अकल लगाओ।

सो लगाते रहिये। जोड़, घटाव, गुणा, भाग करने में कोई पइसा थोड़े ना लगता है। बस

दिमागी जुगाली है, करते रहिये। अब जो ईवीएम मशीन से निकलेगा, उ तो पता चलिए ना

जाएगा। लेकिन मुंगेर की एक घटना ने इतना तो इंडिकेशन दे दिया है कि एनडीए की गाड़ी

इस बार आसानी से बेड़ा पार शायद नहीं कर पायेगी। खुद सुशासन बाबू झल्ला रहे हैं।

यूंही तुम चुनावी वादे कर रहे हो या होम वर्क भी किया है

लेकिन इस भी साफ हो गया कि मुंगेर की हिंसा का मोकामा कनेक्शन है और यह

राजनीतिक लड़ाई बहुत दूर तक उलझी और फैली हुई है। 

मध्यप्रदेश में बेचारे कमलनाथ जी के स्टार प्रचारक का दर्जा चुनाव आयोग ने छीन लिया

है। भाई साहब ने इमरती देवी के खिलाफ बोलते हुए आइटम शब्द का इस्तेमाल क्या

किया, बखेड़ा खड़ा हो गया। दूसरी तरफ कांग्रेस से भाजपा में गये विधायक भी दूसरे

कार्यकर्ताओं के पैर पड़ते दिख रहे हैं। यानी दोनों की नाव फिलहाल तो डगमगा रही है।

अगर मामला टेढ़ा हुआ तो शायद भाजपा अपने ही दांव से फिर से संकट में आ जाएगा

क्योंकि सारे चूहे एक जैसे हैं और मौका मिलते ही छलांग लगाकर दूसरे नाव की सवारी

करने से परहेज तो नहीं करेंगे। वहां भी वादों की बाढ़ आयी हुई है। इन्हीं वादों से एक पुरानी

फिल्म का गीत याद आता है। फिल्म का नाम था सच्चा झूठा। इस गीत को लिखा था

इंदीवर ने और संगीत में ढाला था कल्याणजी आनंदजी ने। इसे बड़े ही रोचक अंदाज में

गाया है लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी ने। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

यूं ही तुम मुझसे बात करती हो, या कोई प्यार का इरादा है

अदाएं दिल की जानता ही नहीं, मेरा हमदम भी कितना सादा है

रोज़ आती हो तुम ख़यालों में, रोज़ आती हो तुम ख़यालों में,

ज़िंदगी में भी मेरी आ जाओ, बीत जाए न ये सवालों में

इस जवानी पे कुछ तरस खाओ

हाल-ए-दिल समझो सनम, हाल-ए-दिल समझो सनम

मुँह से न कहेंगे हम

हमारी भी कोई मर्यादा है, यूं ही तुम मुझसे बात करती हो

बन गई हो मेरी सदा के लिये, या मुझे यूं ही तुम बनाती हो

कहीं बाहों में न भर लूँ तुमको, क्यों मेरे हौसले बढ़ाती हो

हौसले और करो, फ़ासले दूर करो, पास आते न डरो

दिल न तोड़ेंगे अपना वादा है, यूं ही तुम मुझसे बात करती हो

भोलेपन में है वफ़ा की खुशबू, इसपे सब कुछ न क्यूँ लुटाऊँ मैं

मेरा बेताब दिल ये कहता है, तेरे साए से लिपट जाऊँ मैं

मुझसे ये मेल तेरा, मुझसे ये मेल तेरा

न हो इक खेल तेरा

ये करम मुझपे कुछ ज़ियादा है, यूं ही तुम मुझसे बात करती हो

अमेरिका में ट्रंप भइया और बिडेन भइया आपस में उलझे हुए हैं्

तो भइया पूरे इंडिया के साथ साथ चलिए जरा अमेरिका झांक आते हैं। वहां भी अपने ट्रंप

भइया बिहार के सुशासन बाबू की तरह ही झल्ला रहे हैं। लेकिन अमेरिकन वोटर का

मिजाज पहले से पता चल जाता है। हुआ कोई बिहारी पॉलिटिक्स थोड़े ना है कि जात और

गांव के समीकरण चुनाव के पहले की रात को भी बदल सकते हैं। इसलिए सही माने तो

ट्रंप भइया भी संकट में है।

अब झारखंड भी लास्ट में झांक लेते हैं। दोनों मोर्चा फूल स्पीड में है। देखने में मजा आ रहा

है। हर रोज नया आरोप, नई बात। लेकिन इतना तो तय है कि अब अपने हेमंत भइया भी

पॉलिटिक्स सीख गये हैं। इसलिए उन्हें भाजपा की अंदर का कमजोरियों का पता है।

कमजोरी क्या है, इसे तो मैं भाजपा का कांग्रेसीकरण मानता हूं। जहां चार ठो नेता रहेगा,

गुटबाजी से पार्टी का बंटाधार होगा। यही हाल है और यह साफ साफ दिखता भी है। बेरमो

में मामा और भांजा प्रचार में लगा है तो मजबूती आयी है। क्या पता यह बात सही हो कि

मामा जी को सेंटर में मिनिस्टर बनना है। यानी कुल मिलाकर दोनों गुट आपस में फिफटी

फिफटी का खेल तो नहीं खेल रहे हैं। इसी लिए पूछ रहा हूं कि यूही तुम मुझसे बात तो नहीं

कर रहे हो।

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