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लातेहार में टाना भगतों का आंदोलन : 19 घंटों से चंदवा में रेल ट्रैक पर धरना जारी

  • जमीन के अपने अधिकार के लिए रेल ट्रैक पर बैठे

  • आंदोलन की वजह जमीन से संबंधित मामले

  •  फर्जी मामलों में फंसाने की साजिश का विरोध

  •  प्रदेश कांग्रेस ने तीन सदस्यीय टीम वहां भेजी

प्रतिनिधि

लातेहारः लातेहार में टाना भगतों का आंदोलन पिछले 19 घंटे से चल रहा है। महात्मा

गांधी के असली अनुयायी टाना भगत वहां के रेलवे ट्रैक पर अपनी मांगों के समर्थन में

धरना दे रहे हैं। इस वजह से वहां से रेलवे की आवाजाही बंद हो गयी है। दूसरी तरफ

आंदोलन से टाना भगतों के जुड़े होने की सूचना पाते ही कांग्रेस सक्रिय हो गयी है। कांग्रेस

के अनेक पूर्व नेताओं के लिए टाना भगत महत्वपूर्ण रहे हैं। स्वर्गीय इंदिरा गांधी के जमाने

में किसी भी टाना भगत को सीधे प्रधानमंत्री आवास तक में प्रवेश की अनुमति होती थी।

लातेहार के इस आंदोलन के बारे में बताया गया है कि आजादी के इतने सालों के बाद भी

टाना भगत अधिकारों से वंचित हैं। आंदोलनकारियों के मुताबिक

द्वापर, त्रेता, सतयुग और कलियुग चारों युगों में टाना भगतों के पूर्वजों ने लड़ाई लड़ी।

देश की आजादी के बाद कितनी सरकारें आई और गईं मगर टाना भगतों के विकास के

लिए कुछ नही किया गया। अब भी अपने हक व अधिकार से वंचित हैं।

अखिल भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता सेनानी नीति टाना भगत समुदाय द्वारा छोटानागपुर

काश्तकारी अधिनियम 1947 (धारा 145) टेनेन्सी एक्ट दफा 81, पारा ए के मुताबिक

छोटानागपुर भूमि का मालिक एवं लगान पाने वाला टाना भगत खंड 1, 2, 3 उरांव मुंडा,

खड़िया है को लेकर आंदोलन निर्धारित किया गया था। जानकारी के अनुसार उच्च स्तरीय

टाना भगत नेताओं द्वारा संबंधित विभाग के वरीय पदाधिकारियों को संबंधित सूचना

प्रदान की गई थी। दी गई सूचना के अनुसार छोटानागपुर के राष्ट्रीय धरोहर टाना भगत

आजादी के 73 वर्ष बीतने के बावजूद अपने हक और अधिकार के लिए आंदोलनरत रहे हैं।

लातेहार में टाना भगतों की सूचना पर कांग्रेस सतर्क

केन्द्र एवं राज्य सरकार से अपनी मांगों को अवगत करा चुके हैं बावजूद उनकी मांग को

गंभीरता से नहीं लिया गया अपितु कई जगहों पर उनके साथ जमीन संबंधी धोखाघड़ी,

खनन संबंधी मामले, झूठा मुकदमा कर उनकी जमीन से उन्हें बेदखल करने की साजिश

चलती रही। इ्रन्हीं मांगों को लेकर टोरी जंक्शन में छोटानागपुर की सारी खनिज संपदाओं,

खनन कार्य, रेल मालगाड़ी पूर्ण रूपेण स्थगित करने को लेकर आंदोलन आहूत था। टाना

भगतों के किसी तरह की क्षति होने पर जिम्मेवारी संबंधित विभाग और अधिकारी की

होगी।

इस बीच इस आंदोलन की सूचना पाते ही झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ.

रामेश्वर उरांव ने लातेहार जिले के टोरी रेलवे स्टेशन के निकट धरना पर बैठे टाना भगतों

से बातचीत कर उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल करते हुए पार्टी की ओर

से तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा रामेश्वर उराँव ने

कहा कि भूमि पट्टा,टाना पेंशन,सीएनटी एक्ट में मिले अधिकारों को लेकर एवं अन्य मांगों

को लेकर आन्दोलनरत टाना भगतों की आवाज पार्टी एवं सरकार के संज्ञान में आया है।

कांग्रेस नेता सुखेर भगत की अध्यक्षता में गठित समिति में लातेहार के पार्टी जिलाध्यक्ष

मुनेश्वर उरांव और शिवशंकर टाना भगत को भी शामिल किया गया है एवं अविलम्ब

रिपोर्ट देने को कहा है और ये तीनों समिति के सदस्य टाना भगतों से बातचीत के लिए

टोरी पहुंच चुके हैं। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मूल रूप से जनजातीय समाज के

टाना भगत समुदाय के लोगों ने आजादी की लड़ाई में गांधीजी के साथ कंधे से कंधे

मिलाकर लड़ाई लड़ी थी और आज भी वे गांधीजी की विचाराधारा को लेकर अहिंसा के

रास्ते पर चलते आ रहे है।

टाना भगतों के लिए कांग्रेस की तीन सदस्यी कमेटी रवाना

उन्होंने कहा कि टाना भगतों की समस्या को राज्य सरकार

द्वारा अलग नजरिये से देखना चाहिए और उनकी मांगों को पूरा करने की दिशा में उचित

कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्षों से तिरंगा और गांधीजी की पूजा करते आ रहे

टाना भगतों को यह उम्मीद है कि अब राज्य में उनकी ही सरकार बनी है, इसलिए वर्षां

पुरानी मांग पर तेजी से कार्रवाई नहीं होने से नाराज होकर उन्होंने आंदोलन का रूख

अख्तियार किया है, लेकिन कांग्रेस पार्टी उनसे यह आग्रह करती है कि वे जिस तरह से

संयम बरतते आये है, थोड़ा और इंतजार करें। उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस गठबंधन

सरकार के गठन के साथ ही कोरोना संक्रमण की वैश्विक परिस्थिति के कारण उनकी

समस्याओं को पूरा करने में थोड़ा विलंब जरूरत है, लेकिन पार्टी यह भरोसा दिलाती है कि

जल्द ही उनकी सभी मांगें पूरी होगी।


 

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