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पिछले साल इसी दिन से आंतक फैलना प्रारंभ हुआ था

पिछले साल के 21 मार्च की बात करें तो कोरोना संक्रमण के देश में तेजी से फैलने की

सूचनाए सार्वजनिक होने लगी थी। उससे पहले निजी कंपनियों और चार्टर्ड फ्लाइट से

कितने लोग विदेशों से लौटे और चुपचाप ही कोरोना संक्रमण फैलाते रहे, इस बारे में एक

साल के भीतर कोई सरकारी घोषणा नहीं आयी। सिर्फ चर्चा में ग्लैमर की दुनिया से जुड़े

उन हस्तियां का नाम आया तो कार्यक्रम देने विदेश गये थे और कोरोना संक्रमण लेकर

वापस लौटे। खैर पिछले वर्ष की इस तिथि और इस वर्ष की इस तिथि का अंतर देखें तो यह

पता चलता है कि अनेक स्तरों पर जागरुकता आने की जह से अब अतिरिक्त सावधानी

बरती जा रही है। कोरोना की दूसरी लहर की आशंका के बीच ही पिछले लॉकडाउन में

लगभग तबाही के कगार पर पहुंच चुके अधिकांश लोग सावधान हैं और दोबारा लॉकडाउन

नहीं लगे, इसकी चिंता कर रहे हैं। पिछले साल की गर्मियों में कोरोना महामारी के फैलने

तथा उसकी वजह से लगाए गए लॉकडाउन के कारण कारोबार में खलल पडऩे के बाद से

आभूषण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी तनिष्क अब अपनी बिक्री को एक बार फिर पटरी पर ले

आई है। पहले के विपरीत अब तकनीकी पहलों को शामिल करते हुए कंपनी अब ग्राहकों के

दरवाजे पर अपनी सुविधाओं के साथ प्रस्तुत है। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में

उछाल के बावजूद कंपनियां भी कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के लिए पहले की तुलना

में काफी अधिक आश्वस्त हैं। कोविड-19 संक्रमण के मामलों की संख्या में एक बार फिर

वृद्धि हो सकती है और देश अब दूसरी लहर के शुरुआती चरणों में है। लेकिन पिछले साल

के घाटे के बाद भारतीय कंपनियां इस समय चुनौती से लडऩे के लिए कुशलता के साथ

तैयार हैं।

पिछले साल जिन्हें घाटा उठाना पड़ा था इस पर वे तैयार हैं

जिन कंपनियों को पिछले साल के लॉक डाउन की वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ा था,

वे इस बार वैसी स्थिति दोबारा न आये, उसके लिए पहले से ही तैयार हैं। खास तौर पर

उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियां गर्मियों के समय के उत्पादों के साथ तैयार हैं।

पिछले साल के अनुभवों से इन कारखानों के मालिकों का मानना है कि वे अपने कार्यालयों,

खुदरा स्टोर और विनिर्माण इकाइयों में सभी सावधानियां रखना जारी रखेंगे। विनिर्माण

या बिक्री में किसी व्यवधान के आने पर उपचारात्मक उपायों का आकलन कर रहे हैं। हम

आगामी स्थिति पर सरकार के निर्देश का पालन करना जारी रखेंगे। घरेलू सामान अति-

आवश्यक सामान की सूची में नहीं आते, जिसके चलते पिछले साल लॉकडाउन के दौरान

यह श्रेणी गंभीर रूप से प्रभावित होने वाले कारोबारों में शामिल थी। तेजी से आगे बढऩे

वाले उपभोक्ता सामान की श्रेणी के अग्रणी निर्माताओं का एक समूह अपने उत्पादन को

तेजी दे रहे हैं, जिससे उनकी उत्पादन सुविधाओं के आसपास किसी भी तरह के अवरोध से

उनकी आपूर्ति प्रभावित न हो। अधिकांश कंपनियां बड़े पैक के साथ उत्पादन कर रही हैं

ताकि यदि उपभोक्ता पिछली गर्मियों की तरह सामान के भंडारण का विकल्प चुनते हैं, तो

उन्हें ये आसानी से मिल जाएं। महामारी के शुरुआती दिनों में आपूर्ति की कमी ने हमारे

व्यवसाय को नुकसान पहुंचाया था। पिछले एक साल में नई कारोबारी योजनाओं का

सृजन एवं परीक्षण किया जा चुका है। इस प्रकार, संचालन प्रबंधन में कोई बड़ा व्यवधान

देखने को नहीं मिलेगा। ऐसी कंपनियां अपने परिचालन के दौरान अपने कठोर कोविड-19

प्रोटोकॉल का पालन करना जारी रखेंगे और मास्क, सामाजिक दूरी, तापमान स्क्रीनिंग

और सैनिटाइजिंग जैसे सभी एहतियाती उपायों का पालन कर रहे हैं।

ऑनलाइन कारोबार की नींव मजबूत कर रही कंपनियां

कई ऐसी कंपनियों ने इस बीच ही सुविधाजनक ऑनलाइन शॉपिंग के लिए एक ई-कॉमर्स

ऐप्लिकेशन विकसित किया है। भारत में ऐप पर उपस्थित लगभग 70 प्रतिशत ग्राहक

पहले से ही खरीदारी के हाइब्रिड मॉडल (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) का प्रदर्शन कर रहे हैं।

कंपनियां छोटे स्टोर के साथ मिलकर अपनी पहुंच बढ़ा रही है। पिछले साल में इन

कंपनियों ने भी काफी अधिक सीखा है। अपने ग्राहकों के लिए पर्याप्त भंडार उपलब्धता

सुनिश्चित करने के लिए बेहतर विकसित किए हैं। इसलिए यह माना जा रहा है कि आम

नागरिक कोरोना की दूसरी लहर से भले ही प्रभावित हों लेकिन यह कंपनियां अब महामारी

की नई लहर के प्रभाव से काफी अछूता रहेगी। बड़ी संख्या में कंपनियों ने टीकाकरण के

दायरे का विस्तार करने के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ के माध्यम से सरकार से अपील

की है ताकि वे अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों का टीकाकरण करा सकें। इन तमाम

उपायों के जरिए निजी कंपनियां देश में अर्थव्यवस्था की गाड़ी की रफ्तार को बनाये रखने

की तैयारियां कर चुकी हैं। अब टीकाकरण की गति और तेज होने तथा जनता में कोरोना

गाइड लाइनों का सख्ती से पालन करने की आदत से अगर संकट जल्दी दूर किया जा

सका तो निश्चित तौर पर देश की अर्थव्यवस्था की गाड़ी दोबारा से गड्डे में जाने के बचायी

जा सकेगी।

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