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शहीद अभिषेक पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ ईश्वर में विलीन हो गया

  • लद्दाख में आतंकवादियों के बारूदी सुरंग में गंवायी जान

  • खराब मौसम की वजह से अब तक नहीं आया था शव

  • अंतिम सम्मान देने में सेना के अलावा हजारों लोग थे

राष्ट्रीय खबर

चान्हो : शहीद अभिषेक कुमार साहू का पैतृक गांव चोरेया में बुधवार को राजकीय सम्मान

के साथ अंतिम संस्कार हुवा।अभिषेक चौबीस अक्टूबर को लद्दाख में ड्यूटी के दौरान

आतंकवादियों द्वारा लगाए गए लैंड माइंस का शिकार हो गए थे, गंभीर रूप से जख्मी

अभिषेक की ईलाज के दौरान उसी दिन मौत हो गयी थी। खराब मौसम के कारण शहीद

का शव बुधवार की सुबह यहां पहुंच पाया। सूत्रों के अनुसार शहीद का शव मंगलवार रात

को ही इंडिगो विमान से रांची लाया गया, जहां से राजकीय सम्मान के साथ बुधवार सुबह

उनके पैतृक गांव चोरेया लाया गया। इससे पूर्व रातू, मुड़मा, केन्द्री मोड़, मांडर थाना चौंक

पर हाँथ में फूल और तिरंगा लिए पुरजोर स्वागत किया। जैसे ही सोसाई आश्रम कॉलेज

गेट पहुंचा वहाँ लोगो का जन सैलाब देखते बनता था। भारत माता की जय, वीर अभिषेक

कुमार अमर रहे, हिंदुस्तान आर्मी जिंदाबाद जैसे नारो से पूरा माहौल गूँजायमान था।

हजारों की संख्या में शहीद के पीछे पीछे उनके घर तक पहुंचे।पहुंचने के बाद सेना द्वारा

अंतिम सलामी देने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। संजोग की बात यह रही कि

वही चोरिया ग्राम के ही मेजर राकेश कुमार (सेना मैडल) को सेना के अधिकारी के रूप मे

भेजा गया था ताकि सुचारू रूप से उसकी अंतिम यात्रा को पुर्ण किया जाये।

शहीद अभिषेक को श्रद्धांजलि देने पूरी सड़क पर लोग इकट्ठा थे

शहीद के लिए आम लोगों के दिलों में कितनी जगह है उसकी बानगी का नजारा बुधवार की

सुबह उस समय देखने को मिली जब विभिन्न क्षेत्रों से होकर शहीद का शव गुजरा। रांची

से लेकर शहीद के पैतृक गांव चोरेया तक कोई ऐसा चौक-चौराहा नहीं था जहां लोगों ने

शहीद के सम्मान में खड़े नहीं थे। बच्चों से लेकर महिलाओं तक ने शहीद के शव पर श्रद्धा

सुमन अर्पित किए। गांव पहुंचने से पूर्व लगभग दो किमी दूर तक मानव श्रृंखला बनाकर

लोगों ने शहीद का स्वागत किया। शहीद ने चार दिन पूर्व ही अपने बड़े भाई से बात की थी।

बड़े भाई से उसने कहा था कि इस बार थोड़े अधिक दिनों के लिए आऊंगा तब जमकर बुलेट

चलाऊंगा। पिछली छुट्टी में ही उसने अपनी मनपसंद बाइक बुलेट खरीदी थी।

शादी ठीक होने वाली थी

अभिषेक के बड़े भाई परमानंद की शादी ठीक हो चुकी थी, केवल दिन रखना बाकी था। वहीं

अभिषेक की भी शादी की बात की बात चल रही थी, इस बार जब वह छुट्टी में आता तो उसे

लड़की देखने जाना था, और अगर लड़की पसंद होता तो दोनों भाई की एक साथ शादी

होती।पर होनी को शायद कुछ और ही मंजूर था।

मुख्यमंत्री के नाम सांसद को मांगपत्र

शहीद के अंतिम संस्कार के बाद घाट पहुंचे सांसद सुदर्शन भगत को एक मांगपत्र सौंपा

गया। मांगपत्र में बिजुपाड़ा-खेलारी मुख्य पथ पर चोरेयामोड़ के निकट एक तोरण द्वार,

शहीद के नाम से एक स्मारक और परिजन को एक सरकारी नौकरी की मांग रखी गयी है।

सांसद ने लोगों को आश्वस्त किया कि उनकी मांग पूरी करवाने की उनकी पूरी कोशिश

होगी।

चोरेया वासी को गर्व है:

अभिषेक को शहीद होने पर चोरेया को लोगो का कहना हैं हम लोगो को गर्व है हमारे बीच

का लाल देश की सुरक्षा में अपनी जान दी। हमे अपनी सभी बेटों की देश के लिए कुर्बानी

देना पड़े तो हमे गर्व होगा।

मां और दादी अभिषेक की मौत की सूचना नहीं थी

चौबीस अक्टूबर को सेना की अधिकारियों द्वारा अभिषेक की शहीद होने की खबर

परिजनों को देने के बावजूद उनके मां कुंती देवी और दादी चंदो देवी को इस बात से बेखबर

रखा गया था। इस बात की जानकारी मंगलवार देर रात को दी गई जब शव रांची आ चुका

था।

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