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सबसे बड़े आकार के डायनासोर का पता चला ऑस्ट्रेलिया में

  • आकार में तीस मीटर लंबा हुआ करता था

  • उसके ऊपर उसकी बहुत लंबी गरदन होती थी

  • इतना बड़ा प्राणी भी पूरी तरह शाकाहारी ही था

  • दक्षिण पूर्व क्वींसलैंड के इलाके में मिला अवशेष

राष्ट्रीय खबर

रांचीः सबसे बड़े आकार के डायनासोर का नया अवशेष प्राप्त हुआ है। इस फॉसिल के

आधार पर इसका नाम टाइटानोसोर रखा गया है। अनुमान के मुताबिक यह आकार में

करीब तीस मीटर लंबा हुआ करता था। इस लंबाई की वजह से इसे दुनिया के सबसे बड़े

आकार का डायनासोर माना गया है। फॉसिल के मुताबिक यह प्रजाति इस धरती पर आज

से करीब 90 मिलियन वर्ष पूर्व रहा करती थी। वैसे इतने बड़े आकार के इस डॉयनासोर के

बारे में यह भी बताया गया है कि यह मांसाहारी जानवर नहीं था। सिर्फ पेड़ पौधों के पत्तों

से यह गुजारा करता था। आकार और अन्य वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर इसे दुनिया के

अब तक के सबसे बड़े आकार का डायनासोर माना गया है, जो धरती के क्रेटासियस काल

में रहा करता था। लंबाई के साथ साथ वैज्ञानिक मानते हैं कि इसकी ऊंचाई भी करीब पांच

मीटर से साढ़े छह मीटर तक की थी। यह ऊंचाई सिर्फ उसके जंघा तक की थी। उसके ऊपर

उसके पास एक बहुत लंबी गरदन हुआ करती थी। इसी लंबे गरदन की वजह से वह ऊंचे

पेड़ों के पत्ते भी तोड़ लिया गया था। इस किस्म के एक जानवर को प्रसिद्ध साइंस फिक्शन

फिल्म जुरासिक पार्क में भी दिखाया गया है।

देखें जुरासिक पार्क का वह वीडियो

वर्ष 2007 में इसके बारे में शोधकर्ताओं को जानकारी मिली थी। उस वक्त एक विशाल पैर

का निशान भी वहां पाया गया था। एरोमांगा घाटी के पास मिले इस डॉयनासोर का नाम

वैज्ञानिकों ने कूपर रखा है क्योंकि यह कूपर के इलाके में ही पाया गया है। वैज्ञानिक शोध

के मुताबिक यह उस काल के ब्राचिओसोरस और एपाटोसोरस के जैसा ही था। इसके कई

अवशेष टुकड़ों में मिले थे। इसी वजह से उसका निष्कर्ष निकालने में शोधकर्ताओं को वक्त

लगा है।

सबसे बड़े आकार का यह अवशेष निर्जन इलाके में पाया गया था

सुनसान इलाके में मिले इस अवशेष के टुकड़ों के आधार पर एक एक कर कड़ियों को

जोड़कर यह निष्कर्ष निकाला गया है। इसकी खोज में कुछ और फॉसिल्स भी मिले थे

लेकिन जांच में पता चला कि वे इस प्राणी के नहीं हैं। सारे अवशेषों को सुरक्षित निकालने

और साफ करने में बहुत सावधानी बरतनी पड़ी है। उसके बाद ही एक एक कड़ी को जोड़कर

इस विश्व के सबसे बड़े डायनासोर के बारे में इतनी जानकारी मिल पायी है। इस बारे में

शोध कर्ता रोबिन मैकेंजी कहते हैं कि जो अन्य अवशेष मिले हैं, वे किस प्राणी के हैं, उसका

पता अब तक नहीं चल पाया है। इस डायनासोर के कंधे की हड्डी के अलावा रीढ़ का हिस्सा

तथा कई अन्य अंग की हड्डिया सुरक्षित अवस्था में पायी गयी हैं। निर्जन इलाके में होने

की वजह से इसकी खुदाई के काम मे काफी वक्त लगा है क्योंकि अवशेषों को सुरक्षित

निकालने में भी काफी समय लगता है। रोबिन ने अपने पति के साथ मिलकर एरोमांगा

नेचुरल हिस्ट्री म्युजियम की स्थापना की थी। उनकी पारिवारिक जमीन पर एक एक कर

करीब पंद्रह डायनासोर के अवशेष पाये गये हैं। फॉसिल के आधार पर अनुमान लगाया

गया है कि यह जानवर शायद 67 टन के आस पास का वजन वाला होगा। वैसे एरोमांगा के

इलाके में एक और अवशेष भी मिला है, जिस डायनासोर का नाम जॉर्ज रखा गया है।

तुलनात्मक अध्ययन से यह पाया गया है कि इस जॉर्ज प्रजाति के डायनासोर के पैर के

निचले हिस्से की हड्डी, जिसे फेमूर बोन कहते हैं करीब 2.2 मीटर लंबी है। यह लंबाई कूपर

की फेमूर बोन से अधिक है क्योंकि कूपर की यह हड्डी मात्र 1.9 मीटर लंबी है।

एक और अवशेष मिला है, जिसके पैर की हड्डी इससे अधिक लंबी है

उसके पैर का आकार इतना बड़ा था यानी किसी इंसान से भी बड़ा

जॉर्ज के अन्य अवशेष काफी टुकड़ों में बंटे होने की वजह से उसके बारे में यकीनी तौर पर

अब तक कोई जानकारी नहीं दी गयी है। इस बारे में क्वींसलैंड म्युजियम के वैज्ञानिक डॉ

स्कॉट हॉकनल कहते हैं कि इस प्रजाति के चार डायनासोर पृथ्वी के अलग अलग इलाकों

में पाये गये हैं। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इन चारों प्रजातियों का विकास एक ही मूल

से हुआ था। बाद में किसी अन्य कारण से अथवा टेक्नोनिक प्लेटों की स्थिति बदलने की

वजह से वे अलग अलग हिस्सों में चले गये थे। अवशेषों में कीचड़ के अंश होने की वजह से

ऐसा भी माना जा रहा है कि उस प्राचीन काल में शायद यह ऐसे जानवरों के पानी पीने का

स्थान था। बाद में भौगोलिक उथलपुथल की वजह से इस इलाके में पहाड़ जैसी संरचनाएं

विकसित हो गयीं। इनके नीचे ही ऐसे अवशेष दबे पड़े हुए हैं। काफी निर्जन और आबादी से

दूर वाला इलाका होने की वजह से इस इलाके में अधिक खोज बीन भी नहीं की गयी है।

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