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पानी का जहाज तैरने लगा है सूयेज नहर के फिर से चालू होने की उम्मीद

  • दिन रात परिश्रम का बेहतर नतीजा सामने आया है

  • बालू में धंस गया था जापान का यह विशाल जहाज

  • जरूरी सामान लदे दो सौ और जहाज भी रास्ते में

कायरोः पानी का जहाज अब तैरने लगा है। वहां के सूयेज नहर के अधिकारियों और

इंजीनियरों की मदद से जापान के इस विशाल जहाज को बालू से निकाला जा सका है।

वीडियो में जान लीजिए क्या है हालत और कैसे हो रहा काम

इसके बाद वहां बड़े अन्य जहाजों और ड्रेजरों के अलावा टग बोट की मदद से उसे थोड़ा सा

घूमाने में भी मदद मिली है। यदि यह काम सही तरीके से चलता रहा तो हो सकता हैकि

आज ही यह जहाज वहांसे आगे बढ़ जाए। एक बार पानी का जहाज आगे बढ़ गया तो

उम्मीद की जा सकती है कि इस सूयेज नहर जल मार्ग से फिर से नौ परिवहन धीरे धीरे

सामान्य हो जाएगा। पिछले पांच दिनों से पूरी स्थिति का अध्ययन करने वाले इंजीनियरों

का मानना है कि यह पानी का जहाज इस नहर से निर्धारित सीमा से अधिक गति से गुजर

रहा था। हाल के दिनों में आये तूफान और तेज हवाओं की वजह से नहर के इस हिस्से में

बालू का जमाव अधिक हो गया था। तेज गति के वजह से पानी का जहाज नीचे के बालू में

गति पैदा करता चला गया। इसी वजह से एक खास स्थान पर आने के बाद वह बालू के

अंदर धंस गया। जिससे पूरे नहर का मार्ग ही बंद हो चुका है। पूरी दुनिया का ध्यान

आकृष्ट करने वाले इस सूयेज नहर के बारे मे यह जान लें कि यह एक कृत्रिम समुद्री

जलमार्ग है जो यूरोप और एशिया के बीच से गुजरता है। मिस्र यानी इजिप्ट ने इसे तैयार

किया है। यह मेडिटेरियन समुद्र ओर रेड सी से जोड़ता है। इससे यूरोप और एशिया के बीच

जल मार्ग का एक नया और कम दूरी वाला रास्ता बन गया है।

पानी का जहाज जाने का यह रास्ता 1869 में तैयार हुआ था

इसे वर्ष 1859 से लेकर 1869 के बीच पहली बार तैयार किया गया था। समय के साथ साथ

इस नहर मे काफी कुछ सुधार किया गया है। उसकी चौड़ाई और गहराई को भी बढ़ाया गया

है। इस नहर के बन जाने की वजह से अरब सागर के रास्ते लंदन की दूरी करीब 8900

किलोमीटर कम हो गयी है। साथ ही पहल के मुकाबले समुद्री यात्रा का समय भी 8 से दस

दिन कम हो गया है। इसी वजह से इस नहर का महत्वपूर्ण पूरी दुनिया के लिए है। 193.3

किलोमीटर लंबी इस नहर से हर दिन औसतन पचास से अधिक पानी के जहाज सामान

लेकर गुजरते हैं। इस नहर के बंद होने का अर्थ है कि अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर

काटकर आना। जिससे पांच हजार मील की दूरी बढ़ती है। इस दूरी को तय करने में भी

अधिक समय लगता है तथा उस रास्ते से गुजरने के वक्त जहाजों को अतिरिक्त सुरक्षा

का प्रबंध करना पड़ता है क्योंकि वहां जहाजों पर अक्सर ही समुद्री डाकुओं का हमला होता

रहता है।

इस सूयेज नहर को इजिप्ट ने वर्ष 1967 में युद्ध के दौरान बंद कर दिया था। उसके आठ

वर्षों के बाद 5 जून 1975 को इसे फिर से खोला गया था। वर्ष 2014 में इसके चौड़ीकरण का

काम किया गया था ताकि कम समय में और तेज गति से जहाज इससे गुजर सके। इसी

नहर मे पानी का जहाज न सिर्फ बालू में धंसा बल्कि कुछ ऐसा टेढ़ा हो गया कि किसी दूसरे

जहाज के गुजरने का रास्ता भी नहीं बचा था। मिली जानकारी के मुताबिक लगातार

प्रयास से इंजीनियरों ने वहां से करीब 27 हजार घन मीटर बालू हटाया है।

लगातार प्रयास से करीब 27 हजार घन मीटर बालू हटाया गया

नहर के दोनों छोरों से भी बालू को हटाया गया है ताकि पानी का जहाज मुड़ सके। उसके

बाद ही टग बोट की मदद से लगातार खींचने की वजह से पानी का जहाज फिर से पानी में

तैरने लगा है। इससे उम्मीद की जा रही है कि शीघ्र ही यह जहाज आगे निकल जाएगा।

एक बार यह जहाज वहां से निकल गया तो नहर के नौ परिवहन की व्यवस्था फिर से

सामान्य होने लगेगी। इस संकट के छठे दिन तक दोनों तरफ करीब साढ़े चार सौ जहाज

जहां तहां रुके पड़े हैं। इनमें से अनेक में नष्ट होने वाले फल और सब्जियां भी हैं। इस नहर

से दुनिया का करीब 12 प्रतिशत माल परिवहन होता है। लिहाजा इस नहर के बंद होने के

पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है क्योंकि पानी मे रूके पड़े

जहाजों में पेट्रोलियम पदार्थों से लदे अनेक जहाज भी हैं, जिनके समय पर अपने बंदरगाह

पर नहीं पहुंच पाने की वजह से संबंधित इलाकों में ईंधन की भी कमी होने लगी है।

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