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लापुंग के सबसे बड़े और प्रसिद्ध डुरू खटंगा सोहराई जतरा के दौरान उमड़ा जनसैलाब

  • पड़हा व्यवस्था और सांस्कृतिक खोड़हा दल आकर्षण का केंद्र रहे

  • पूर्वजों की अनमोल धरोहर है आदिवासियों की जतरा परंपरा

संवाददाता

लापुंग: लापुंग के सबसे बड़े और प्रसिद्ध डुरु सोहराई जतरा के दौरान मंगलवार को पड़हा

व्यवस्था, संस्कृति, परंपरा और रीति रिवाज जीवंत हो उठी । डुरु खटंगा के बगीचा में सात

पड़हा और 12 पड़हा के संयुक्त तत्वाधान में डुरु सोहराई जतरा के दौरान सोशल

डिस्टेंसिंग बनाकर तथा मास्क लगाकर अलग-अलग गांवों के सांस्कृतिक खोड़हा नृत्य

दल और सांस्कृतिक टीम की घोल गाजा बाजा, ढोल नगाड़ा, टेंगरा छाता, रंपा चंपा, गांव

के झंडे के साथ साथ जतरा स्थल पर जब शोभायात्रा के रूप में उतरी तो सभी के आकर्षण

का केंद्र बन गई । मांदर की थाप पर युवतियों का दल धान की बालियों से सजी कलसा

और उसमें जलते दीयों के साथ खोड़हा नृत्य दल की अगुवाई करते हुए थिरक उठी । गांव

की घोल ने जतरा स्थल का पारंपरिक रूप से तीन बार परिक्रमा किया । इस मौके पर

बतौर मुख्य अतिथि देवेंद्र वर्मा ने कहा कि आदिवासियों की जतरा और पड़हा व्यवस्था

पूर्वजों का अनमोल धरोहर है । जतरा हमारी सामूहिक संस्कृति परंपरा और रीति रिवाज

का अद्भुत सम्मिश्रण है । समारोह की अध्यक्षता करते हुए डुरु जतरा आयोजन समिति के

अध्यक्ष प्रकाश खलखो ने कहा कि आदिवासियों के पड़हा परंपरा और जतरा की संस्कृति

हमारे पूर्वजों का अनमोल धरोहर है । इसे हमेशा बचा कर रखना होगा । वहीं लापुंग के

थाना प्रभारी जगलाल मुंडा ने कहा आदिवासियों की यह परंपरा अपने आप में अनूठा है।

लापुंग के सबसे बड़े जतरा में विवाह की परंपरा

उन्होंने कहा कि आदिवासियों में विवाह की परंपरा इसी जतरा के साथ शुरू हो जाती है ।

संरक्षक रुपेश पाठक ने कहा कि आने वाले दिनों में डुरू जतरा को और अधिक विस्तृत

किया जाएगा और इसकी ऐतिहासिकता कायम रखी जाएगी । जतरा में केतारी – ईख,

मिठाइयां और खिलौने की दुकानें आकर्षण का केंद्र रही । इस दौरान ककरिया पिकेट के

प्रभारी मधु सोरेंग, एएसआई छोटन उरांव, डुरू सोहराई जतरा अध्यक्ष प्रकाश खलखो,

उपाध्यक्ष प्यारा खलखो सचिव सुरंजन केरकेट्टा, संरक्षक देवेंद्र वर्मा, रूपेश पाठक, जिला

परिषद सदस्य बांदे हेरेंज, भाजपा नेता सुमन साहु, कार्यकारिणी सदस्य कमल खलखो

पुसा उरांव, किशोर धान, रामा उरांव, हेमंत खलखो जेम्स खलखो, दिलीप खाखा, मंगल

कुजूर महात्मा राम, सुकरा उरांव, संजीव कुमार खलखो, समाजसेवी प्रकाश राम, टुना

उरांव, पाहन संतोष उरांव, गोयो उरांव, हाबिल खलखो, कईला उरांव, मंगा मुंडा, कोषाध्यक्ष

दिलीप खाखा समेत कई लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । जतरा के दौरान हजारों की

भीड़ उमड़ पड़ी ।


 

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