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लापुंग में बारिश नहीं होने से सूखे सा भयानक मंजर

  • का वर्षा जब कृषि सुखाने कहावत चरितार्थ

  • लॉकडाउन की तंगहाली के बाद नई परेशानी

  • बीडीओ ने कहा कि बारिश होने की उम्मीद है

संवाददाता

लापुंग : लापुंग प्रखंड में बारिश नहीं होने से खेतों में सूखे के भयानक मंजर दिखने लगे हैं।

बारिश नहीं होने के कारण ” का वर्षा जब कृषि सुखाने ” कहावत लापुंग प्रखंड के किसानों

के लिए चरितार्थ हो रही है। लापुंग प्रखंड के उत्तरवर्ती दर्जनों गांवों में बारिश नहीं होने के

कारण लापुंग प्रखंड अकाल की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। किसानों के अनुसार सावन

महीने तक रोपनी का कार्य पूर्ण हो जाता था। इस बार पहले से लाॅक डाउन के कारण भारी

आर्थिक परेशानी झेल रहे लापुंग के किसानों के समक्ष अत्यल्प बारिश ने विकट स्थिति

पैदा कर दी है। किसानों ने बताया कि लापुंग प्रखंड के 80% से अधिक किसानों के खेत पूरी

तरह से सूखे पड़े हैं। दूर-दूर तक यह नजारा किसानों के लिए चिंता का सबब बन गई है।

लापुंग प्रखंड के ताबेर खुर्द,शाहेदा, सरसा, देवगांव,पोकटा, ककरिया, नावाटोली, दरंदा,

दादगो, फतेहपुर, डुरु, खटंगा, लालगंज, सोहागी, हुलसू, दानेकेरा, कोयनारा समेत

विभिन्न गांवों में खेतों में लगे धान के बिचड़े सूख रहे हैं। चारों और जहां तक नजर जाती है

सूखा का भयानक मंजर नजर आता है। ताबेर खुर्द के किसान बसंत गोप ने बताया कि

गांव इस बार अब तक मॉनसून में बारिश नहीं हुई है। धान के बिचड़े खेतों में ही सूखकर

अब मुरझाने लगे हैं। उन्होंने कहा कि अगर खेती नहीं हुई तो हम लोग भूखे मर जाएंगे।

इसी गांव की महिला किसान अनु देवी ने कहा कि धान की फसल से साल भर के खाने का

अनाज हो जाता था। इस बार भी उम्मीद थी कि वर्षा होगी लेकिन रोज सिर्फ बादल नजर

आते हैं कभी बूंदाबांदी वर्षा तो हो जाती है लेकिन हम लोगों के सब्र का बांध अब टूटता जा

रहा है।

 

लापुंग में बारिश नहीं तो साल भर बच्चे खायेंगे क्या

हमलोगों को चिंता है कि बच्चे साल भर क्या खाएंगे कैसे जीवन यापन होगा ? पोकटा के किसान शीबा उरांव ने कहा कि हजारों की पूंजी लगाकर धान का बीज खरीदा और मेहनत से धान का बिचड़ा तैयार किया।

लेकिन अब बिचड़ा पीले पड़ने लगे हैं। इस बार अगर

जल्दी बारिश नहीं हुई तो हजारों किसानों के समक्ष भारी समस्याओं का अंबार लग

जाएगा। इसी गांव के जयराम उरांव और गन्दुआ उरांव ने कहा कि अगर खेती नहीं हुई तो

हम लोगों के समक्ष आत्महत्या करने के अलावा कोई और दूसरा रास्ता नहीं बचा है। वहीं

सहदेव उरांव ने कहा कि बारिश नहीं होना हम लोगों के लिए काफी मुश्किल भरा साबित हो

सकता है। लापुंग के समाजसेवी अरविंद तिवारी ने कहा कि अकाल की ओर बढ़ते लापुंग

प्रखंड के किसानों की समस्याओं पर सरकार को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। अगर

सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया तो संपूर्ण प्रखंड में भुखमरी जैसी समस्या उत्पन्न हो

सकती है। वहीं दूसरी ओर लापुंग के प्रखंड विकास पदाधिकारी रोहित सिंह ने कहा कि

अभी हम लोग इंतजार कर रहे हैं। हो सकता है आने वाले दिन में बारिश हो जाय। नहीं

होगी तब कोई उपाय किया जाएगा।


 

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