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लालू के बेल से राजद के लालटेल में नया तेल

रांचीः लालू के बेल की खबर से बिहार में राजद समर्थकों में उत्साह की नई लहर दौड़ पड़ी

है। चारा घोटाला में जेल में बंद लालू प्रसाद को एक मामले में जमानत मिली है। वैसे इस

जमानत के बाद भी वह जेल से बाहर नहीं आयेंगे। लेकिन लालू के बेल की खबर बिहार में

सार्वजनिक होते ही रांची से लेकर पटन तक की राजनीति गरमा गयी है। ऐसे पहले से ही

माना जा रहा था कि अगर इस बार के विधानसभा चुनाव में लालू खुद मैदान में होते तो

नीतीश कुमार के लिए चुनाव जीतना काफी कठिन हो जाता। लेकिन वह चारा घोटाला के

तीन मामलों में अभियुक्त है। अदालत के आदेश पर सजा काट रहे लालू प्रसाद की

राजनीतिक हैसियत कम नहीं हुई है। आज उच्च न्यायालय ने लालू प्रसाद की जमानत

अर्जी मंजूर कर ली। वैसे श्री प्रसाद काफी समय से अपनी किडनी और मधुमेह संबंधी

बीमारियों की वजह से रिम्स में ईलाजरत हैं।

हाल ही में उन्हें रिम्स निदेशक के बंगले में भेजा गया है

हाल ही में संक्रमण के खतरे को देखते हुए उन्हें अन्यत्र एक बंगले में स्थानांतरित किया

गया है। यह बंगला रिम्स के निदेशक का है। वैसे भाजपा का आरोप है कि हेमंत सरकार

लालू पर अत्यधिक मेहरबान है। इसी वजह से उन्हें बंगले में भेजकर राजनीति करने की

छूट प्रदान की गयी है। इस बंगले से लालू बड़े आराम से बिहार के चुनाव का संचालन भी

कर रहे हैं। उच्च न्यायालय में लालू प्रसाद की तरफ से वकील ने यह दलील दी कि

चाईबासा ट्रेजरी के जिस मामले में श्री प्रसाद को सजा सुनायी गयी है, उसकी आधी अवधि

पूरी हो चुकी है। इसी आधार पर उन्हें जमानत दी जाए। याद रहें कि श्री प्रसाद को

सीबीआई की अदालत ने सजा सुनायी है। उच्च न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार करते

हुए इस मामले में उन्हें जमानत दे दी। लेकिन उनके खिलाफ अभी दो और मामले चल रहे

हैं। इसी वजह से एक मामले में जमानत मिलने के बाद भी दो अन्य मामलों की वजह से 

वह न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे।

लालू के बेल की खबर से दोनों खेमाओं में प्रतिक्रिया

लेकिन जमानत की खबर से बिहार के सत्तारूढ़ और राजद दोनों खेमा में मिली जुली

प्रतिक्रिया की आहट यहां तक साफ सुनाई देने लगी है। राजद के जमीनी कार्यकर्ता इस

बात से उत्साहित हैं कि एक मामले में जमानत मिलने के बाद अन्य मामलों में भी इसका

असर पड़ सकता है। यदि ऐसा हुआ तो जेल से रिहा होने के बाद लालू प्रसाद बिहार आ

सकते हैं। बिहार के दोनों खेमे अच्छी तरह इस बात को समझ रहे हैं कि लालू प्रसाद की

चुनावी मैदान में उपस्थिति से भी ढेर सारे समीकरण रातों रात बदल सकते हैं।


 

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