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ललित अमरूद ने अरुणाचल में रंग और स्वाद बदला







नयी दिल्लीः ललित अमरूद ने अरुणाचल प्रदेश की जलवायु से

प्रभावित होकर न केवल अपना रंग बदल कर सेब जैसा रूप ले लिया है

बल्कि इसका स्वाद भी बेहतरीन हो गया है और राज्य सरकार इसके

व्यावसायिक बागवानी की दिशा में कदम उठा रही है । अरुणाचल प्रदेश

में समुद्र से 5500 फुट की ऊंचाई पर स्थित याचुली के जंगली क्षेत्र में

आदिवासी युवकों की एक टीम ने ललित अमरूद का सफल

उत्पादन किया है। याचुली की ठंडी रातों और दिन में खिली हुई धूप ने

ललित किस्म के अमरूद के रंग और स्वाद को निखारा है। मिठास

के साथ-साथ खटास का अनुपम मिश्रण के चलते इस फल को एक बार

चखने के बाद बार-बार इसे खाने को मन मजबूर हो जाता है। केन्द्रीय

उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ के निदेशक शैलेन्द्र राजन के प्रयास

से विकसित  ललित किस्म के अमरूद केसरिया-पीले रंग का और

इसका गूदा गुलाबी होता है जबकि याचुली में यह किस्म गुलाबी गूदे के

साथ बाहर से सेब के रंग वाली हो गई है। इसके फल सुखद सुगंध के

साथ मीठे-हल्के अम्लीय होते हैं। सभी तरह की जांच के बाद इस क्षेत्र के

लिए ललित को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। डॉ राजन का कहना है कि

अरुणाचल जैसे स्वादिष्ट एवं आकर्षक ललित के फल देखने को नहीं

मिले जबकि यह किस्म देश में हजारों हेक्टेयर में उगाई जा रही है। पेटी

में रखे गए अमरूद के फलों को देखकर सेब का भ्रम हो जाता है।

अरुणाचल की परिस्थितियों में किस्मों का परीक्षण करने के लिए

ललित, श्वेता, लालिमा , इलाहाबाद सफेदा, लखनऊ-49 (सरदार) आदि

किस्मों के हजारों पौधे लगाए गए। इसका मुख्य उद्देश्य यहां की

परिस्थितियों में उपयुक्त किस्म का चुनाव एवं स्थानीय बाजार में मांग

के बारे में परीक्षण करना था।

ललित अमरूद का यह बदलाव वैज्ञानिकों के लिए हैरानी भी

याचुली की जलवायु का विश्लेषण करके अधिक संख्या में ललित के

पौधे लगाने की अनुशंसा की गयी। ललित पोषक तत्वों एवं

स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर किस्म है। यह अमरूद लाइकोपीन,

फाइबर, विटामिन सी से भरपूर है तथा मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कब्ज

एवं प्रोस्टेट कैंसर के रोगियों के लिए  उत्कृष्ट है। नयी किस्मों के

अमरूद के एक लाख पौधे लगाने की महत्वाकांक्षी योजना का प्रयास

याचुली के लिखा माज संस्था के द्वारा किया गया। करीब 5500 फीट

ऊँचे स्थान पर उबड़-खाबड़ पथरीली पहाड़ी जमीन में अमरूद की  खेती

करना आसान नहीं था। इस दुर्गम स्थान पर पौधा लगाने के लिए गड्ढा

खोदना एक महंगा और मुश्किल काम है। सीआईएसएच ने युवाओं को

अमरूद की आधुनिक बागवानी का प्रशिक्षण के साथ-साथ कलमी पौधे

भी प्रदान किए। इन किसानों को लखनऊ के संस्थान में एक हफ्ते की

ट्रेनिंग भी दी गई तथा नियमित रूप से व्हाट्सएप एवं फोन के माध्यम

से लखनऊ से मार्गदर्शन दिया जाता रहा। ललित दोहरे उपयोग वाली

किस्म है। फल समूचा या काट कर खाया जाता है। इसके अतिरिक्त यह

प्रसंस्करण के लिए उपयोग की जाने वाली एक प्रमुख किस्म है। गुलाबी

गूदा विभिन्न उत्पादों जैसे पल्प, आरटीएस, चमकदार जेली और

साइडर बनाने के लिए अत्यधिक उपयुक्त है। इस सफलता को देख कर

अरुणाचल के उपमुख्यमंत्री ने राज्य में अमरूद की व्यावसायिक

उत्पादन की सलाह दी है। मुख्य सचिव श्री नरेश कुमार ने याचुली

में उत्पादित ललित अमरूद के गुणवत्ता की सराहना की है।

अब इस प्रजाति का उत्पादन बढ़ाने पर विचार

उन्होंने आगामी वर्षों में प्रदेश में ललित के एक बड़े उत्पादक क्षेत्र को

विकसित करने का सुझाव दिया। डॉ राजन ने संस्थान से सर्वोत्तम

गुणवत्ता वाले रोपण सामग्री और अमरूद की उच्च स्तरीय उत्पादन

तकनीक से किसानों और अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए कार्य

योजना बनाई। यह प्रयास ताजे फल की मांग और प्रसंस्करण के लिए

फलों की आपूर्ति में सुधार करेगा। प्रदेश में निर्माणाधीन फूड पार्क को

प्रति माह कई टन फलों की आवश्यकता होगी और इस प्रकार ललित के

तहत क्षेत्र का विस्तार राज्य के बागवानी विकास के लिए एक उपयुक्त

कदम है। याचुली में अमरूद की बागवानी जैविक खेती की

आवश्यकताओं के साथ अच्छी तरह से फिट बैठती है। अमरूद के लिए

सीमित संसाधनों की आवश्यकता होती है। इस क्षेत्र में रोग एवं कीटों

द्वारा हानि न के बराबर है। जैविक उत्पादित अमरूद के उत्पाद का

घरेलू और निर्यात किया जा सकता है। ललित की वैज्ञानिक खेती से

अरुणाचल प्रदेश में फल और प्रसंस्कृत-उत्पाद उत्पादन को बढ़ावा

मिलेगा।



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