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लाला अमरनाथ यानी भारतीय क्रिकेट में एक सितारे का उदय

  • भारत इंग्लैंड क्रिकेट श्रृंखला पर विशेष प्रस्तुति और इतिहास की एक झलक

@ राकेश अग्रवाल

नयीदिल्लीः लाला अमरनाथ को क्रिकेट पसंद करने वाली वर्तमान पीढ़ी नहीं जानती

होगी। इस पीढ़ी की जानकारी शायद मोहिंदर अमरनाथ और सुरेंद्र अमरनाथ तक ही

होगी। लेकिन हम बात कर रहे हैं इन दोनों के पिता लाला अमरनाथ की, जिन्होंने भारतीय

क्रिकेट को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर पहचान दिलायी थी। इंग्लैंड की टीम क्रिकेट मैचों

की श्रृंखला खेलने के लिए भारत आयी हुई है। ये टीम यहां 4-टेस्ट, 3-एकदिवसीय और 5-

T20 मैच खेलेगी। चेन्नई में हुए दूसरे टेस्ट में भारत ने इंग्लैंड को 317 रनों की बड़ी जीत

के साथ पहले टेस्ट में हुई शर्मनाक हार का बदला लेते हुए श्रृंखला 1-1 से बराबर कर ली है।

इंग्लैंड की टीम ने ही 1932 में भारत को टेस्ट टीम का दर्ज़ा मिलने के बाद भारतीय

सरजमीं पर 3-टेस्ट मैच की पहली टेस्ट श्रृंखला (1933-34) खेली थी। इस दौरे का पहला

टेस्ट मैच बॉम्बे (आज का मुंबई) के जीमखाना ग्राउंड पर 15 से 18 दिसंबर 1933 को खेला

गया था। इंग्लैंड टीम की कमान डगलस जार्डिन (जो इंग्लैंड टीम के 1933-34 के

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बॉडी लाइन बोलिंग के चलते बहुत चर्चित हुए थे) के हाथों में थी,

जबकि भारतीय टीम का नेतृत्व स्वतंत्रता के पूर्व भारत के प्रथम कप्तान सी के नायुडु कर

रहे थे। भारतीय टीम ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करते हुए 219 रन बनाये थे।

लाला अमरनाथ ब्रैडमैन को हिट विकेट करने वाले एकमात्र खिलाड़ी

लाला अमरनाथ ने पारी में सर्वाधिक 38 रन बनाये थे। जवाब में इंग्लैंड की पारी 438 रनों

पर समाप्त हुई थी। भारत की दूसरी पारी की शुरुआत बहुत ख़राब हुई थी जब मात्र 9 रनों

पर उसका पहला विकेट गिर गया था। इस विकेट के गिरने के बाद बल्लेबाज़ी करने आये

थे लाला अमरनाथ और इतिहास रच दिया। उन्होंने 118 रनों की शानदार पारी खेली

जिसमें 21 चौके शामिल थे। उनकी ये सेंचुरी भारत की ओर से डेब्यू करने वाले किसी भी

खिलाड़ी की पहली अंतर्राष्ट्रीय सेंचुरी तो थी ही, विदेशी टीम के खिलाफ किसी भारतीय

द्वारा बनाई जाने वाली पहली सेंचुरी भी थी। यह भी एक अजीब संयोग ही है कि लाला

अमरनाथ इसके बाद अपने टेस्ट करियर में दूसरी सेंचुरी नहीं बना पाए थे| भारत ने अपनी

दूसरी पारी में कुल 258 रन बनाये थे। 4थे विकेट के रूप में आउट होकर अमरनाथ जब

पवेलियन वापस लौट रहे थे उस समय दर्शक दीर्घा में बैठी महिलाओं ने अपने जेवर उन

पर लुटाये थे। महाराजाओं ने उन्हें नकद राशि पुरस्कार में दी थी। उनकी इस सेंचुरी का

जश्न ऐसा हुआ था कि दूसरी पारी में 1 विकेट खोकर 40 रन बनाकर 9 विकेट से मैच

जीतने के बावजूद इंग्लैंड टीम की जीत कहीं गुम हो गयी थी। लाला अमरनाथ ने 24 टेस्ट

में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और 186 फर्स्ट-क्लास मैच भी खेले थे। टेस्ट में उनका

औसत 24.38 था, जबकि फर्स्ट-क्लास मैचों में उन्होनें 41.37 के औसत से रन बनाये थे।

कम समय खेलने के बाद भी अलग छाप छो़ड़ी

उन्होनें 45 टेस्ट और 463 फर्स्ट-क्लास विकेट भी लिए थे। छोटे करियर में उन्होंने टेस्ट में

5 विकेट दो बार और फर्स्ट-क्लास मैचों में 19 बार लेने का कारनामा भी किया था। क्रिकेट

इतिहास में डॉन ब्रैडमैन को “हिट विकेट आउट” करने वाले वो एकमात्र खिलाड़ी हैं।

ब्रैडमैन अपने टेस्ट करियर में 70 बार आउट हुए थे जिसमें केवल एक बार हिट विकेट

आउट थे। लगभग तीन दशकों बाद लाला के पुत्र मोहिंदर अमरनाथ को ऑस्ट्रेलिया में ही

हिट विकेट आउट करार दिया गया था। स्वतंत्र भारत में विदेशी दौरे पर 1947-48 में

ऑस्ट्रेलिया जाने वाली पहली भारतीय टीम का नेतृत्व लाला अमरनाथ ने ही किया था।

उन्होंने कुल 15 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की थी। लाला अमरनाथ का क्रिकेट

करियर और विवादों का लम्बा इतिहास रहा है। 1936 में इंग्लैंड के दौरे पर गयी भारतीय

टीम के कप्तान महाराजकुमार विजयानगर, जिन्हें ‘विज़्ज़ी’ भी कहा जाता था, ने उन्हें

बिना एक भी टेस्ट खिलाये अनुशासनहीनता के आधार पर भारत वापस लौटा दिया था।

जब उनके खेल की चारों ओर प्रशंसा हो रही थी उस समय एक बार फिर उन्हें अवज्ञा और

अनुचित व्यवहार के आरोप में टीम से ड्राप कर दिया गया था, लेकिन जनता के आक्रोश के

कारण वापस लेना पड़ा था। भारत ने 1952-53 में पहली बार उनकी कप्तानी में

पाकिस्तान के खिलाफ 2-1 से श्रृंखला जीती थी। इस श्रृंखला का दिल्ली के फ़िरोज़शाह

कोटला मैदान पर खेला गया पांचवां और अंतिम टेस्ट मैच लाला अमरनाथ के क्रिकेट

करियर का आखिरी मैच था।

दूसरे विश्वयुद्ध के कारण उनका क्रिकेट कैरियर प्रभावित हुआ

द्वितीय विश्व युद्ध के कारण लाला अमरनाथ का क्रिकेट करियर उन उचाईयों तक नहीं

पहुँच सका था जिसके वो हकदार थे। अविभाजित भारत की कर्पुथला रियासत में साधारण

हिन्दू परिवार में जन्मे लाला अमरनाथ भारद्वाज का परिवार देश के बटवारे के समय

भाग कर पटियाला आया था जहाँ वे 1952 तक रहे थे और उसके बाद दिल्ली आ गए थे।

क्रिकेट की असीमित क्षमताओं वाले लाला अमरनाथ एक स्पष्ट वक्ता थे और अपने

विचार रखने में कभी भी नहीं हिचकते थे। एक काबिल प्रशासक, कमेंटेटर, कोच, मैनेजर,

सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन लाला अमरनाथ को भारत सरकार ने 1991 में पद्म भूषण

की उपाधि से अलंकृत किया था। उनके दो पुत्र मोहिंदर एवं सुरेंदर भारतीय क्रिकेट टीम के

लिए खेले थे, जबकि तीसरे पुत्र राजिंदर फर्स्ट-क्लास क्रिकेट खेलते थे। भारतीय क्रिकेट के

इस चमकदार सितारे ने 5 अगस्त 2000 को दिल्ली में अपनी जीवन यात्रा समाप्त की थी।

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